मांडोली हत्याकांड: 80 वर्षीय मां का अनशन: मांडोली हत्याकांड: 14 दिनों से भूख हड़ताल पर 80 वर्षीय मां, सर्वसमाज का महापड़ाव और CBI जांच की उठी मांग

मांडोली हत्याकांड: 14 दिनों से भूख हड़ताल पर 80 वर्षीय मां, सर्वसमाज का महापड़ाव और CBI जांच की उठी मांग
Ad

Highlights

  • मांडोली हत्याकांड के खुलासे की मांग को लेकर मृतक गणपतसिंह की 80 वर्षीय मां 14 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं।
  • सर्वसमाज ने जालोर में महापड़ाव आयोजित कर मामले की जांच CBI को सौंपने की पुरजोर मांग की है।
  • परिजनों का आरोप है कि 18 महीने बाद भी पुलिस हत्यारों को गिरफ्तार करने में विफल रही है।
  • भाजपा नेता ने संदिग्धों के संपर्क में रहने वाले राजनेताओं के नार्को टेस्ट की मांग उठाई है।

जालोर | राजस्थान के जालोर जिले के रामसीन थाना क्षेत्र के मांडोली गांव में गणपतसिंह हत्याकांड का मामला अब गरमाता जा रहा है। न्याय की आस में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग मां पिछले 14 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी है, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल व्याप्त है। इस हत्याकांड के खुलासे और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सर्वसमाज की ओर से आयोजित महापड़ाव में भारी संख्या में लोग उमड़े। वक्ताओं ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और चेतावनी दी कि जब तक न्याय नहीं मिलता, यह आंदोलन और उग्र होगा।

14 दिनों से अन्न का त्याग, बिगड़ती तबीयत

मांडोली गांव के गणपतसिंह की मौत का सच सामने लाने के लिए उनकी 80 वर्षीय मां हवा कंवर, पत्नी भारती कंवर और बेटा खुशवंत 27 फरवरी 2026 से अनवरत भूख हड़ताल पर बैठे हैं। 14 दिनों से अन्न का पूरी तरह त्याग करने के कारण तीनों की शारीरिक स्थिति दिन-प्रतिदिन चिंताजनक होती जा रही है। मौके पर मौजूद समाज के वरिष्ठ जनों ने परिवार की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उन्हें भूख हड़ताल की जगह क्रमिक अनशन शुरू करने का सुझाव दिया है, ताकि आंदोलन को लंबे समय तक चलाया जा सके। हालांकि, परिवार का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनके बेटे के हत्यारे सलाखों के पीछे नहीं जाते, वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे और न्याय के लिए प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हैं।

CBI जांच और IPS अधिकारी की मांग

इस मामले को लेकर सर्वसमाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर डॉ. प्रदीप केशवराव गवांडे को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मृतक की पत्नी भारती कंवर ने बताया कि उनके पति गणपतसिंह की हत्या 28 अगस्त 2024 को हुई थी। घटना के 18 महीने बीत जाने के बावजूद पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। परिवार ने आशंका जताई है कि इस हत्याकांड में कुछ प्रभावशाली लोग शामिल हैं, जिसके कारण स्थानीय पुलिस दबाव में काम कर रही है। इसी के चलते मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई है। इसके साथ ही, जब तक CBI जांच शुरू नहीं होती, तब तक जांच का जिम्मा IPS अधिकारी काम्बले को देने और सहायक के रूप में सीआई तेजूसिंह को नियुक्त करने की मांग रखी गई है।

पुलिस की लापरवाही पर कड़ा रुख

ज्ञापन में पुलिस की प्रारंभिक जांच पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि पूर्व जांच अधिकारी ने जिन तीन संदिग्धों की पहचान की थी, उनसे कभी भी सख्ती से पूछताछ नहीं की गई। इसी लापरवाही के चलते मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई। समाज ने मांग की है कि रामसीन थाने में तैनात एएसआई अमरसिंह, जिन पर जांच में कोताही बरतने का आरोप है, उन्हें जांच पूरी होने तक वहां से हटाया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस की ढिलाई के कारण ही अपराधी अब तक खुले घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार असुरक्षित महसूस कर रहा है। प्रशासन को दिए ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि संदिग्धों की गिरफ्तारी में देरी न्याय की हत्या के समान है।

सड़क पर उतरी महिला शक्ति

महापड़ाव के दौरान उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब दोपहर में बड़ी संख्या में महिलाएं सड़क पर उतर आईं। महिला शक्ति ने न्याय की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की और वाहनों की आवाजाही रोक दी। सड़क जाम होने की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने काफी मशक्कत के बाद महिलाओं को समझाया और उन्हें वापस धरना स्थल पर भेजा। महिलाओं का कहना था कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो वे चक्का जाम करने और कलेक्ट्रेट का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगी।

नेताओं के नार्को टेस्ट की मांग से मचा हड़कंप

इस महापड़ाव में राजनीतिक बयानबाजी ने भी मामले को नया मोड़ दे दिया है। भाजपा नेता और सिरोही जिला परिषद सदस्य दिलीपसिंह मांडाणी ने मंच से संबोधित करते हुए एक विवादित लेकिन साहसी मांग रखी। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि किसी बड़े अपराध के बाद अपराधी किसी न किसी रसूखदार नेता के संरक्षण में रहते हैं। मांडाणी ने दावा किया कि इस मामले के संदिग्धों ने भी कुछ स्थानीय नेताओं से बातचीत की है। उन्होंने मांग की कि सच्चाई सामने लाने के लिए उन तमाम नेताओं का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए जिनके नाम संदिग्धों की कॉल डिटेल में आए हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि उनका नाम भी इसमें आता है, तो उनका भी नार्को टेस्ट होना चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

निष्कर्ष और आगे की रणनीति

मांडोली हत्याकांड अब केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे समाज का मुद्दा बन गया है। महापड़ाव में आए लोगों ने एकजुट होकर संकल्प लिया है कि वे पीड़ित परिवार को अकेला नहीं छोड़ेंगे। प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही CBI जांच की सिफारिश नहीं की गई और संदिग्धों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो यह आंदोलन जालोर जिले से निकलकर पूरे राजस्थान में फैल सकता है। फिलहाल, प्रशासन की ओर से ठोस आश्वासन का इंतजार है, जबकि मांडोली में धरना स्थल पर तनावपूर्ण शांति और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। समाज के लोगों ने साफ कर दिया है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, उनका महापड़ाव जारी रहेगा।

Must Read: हत्या के आरोपी पति को आजीवन कारावास, 10 हजार जुर्माना

पढें क्राइम खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News) के लिए डाउनलोड करें thinQ360 App.

  • Follow us on :