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भारत

रक्षा मंत्रालय का ₹858 करोड़ का सौदा: रक्षा मंत्रालय ने तुंगुस्का मिसाइलों और P8I विमानों के लिए 858 करोड़ रुपये के अनुबंधों पर किए हस्ताक्षर

मानवेन्द्र जैतावत मानवेन्द्र जैतावत

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना और नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 858 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें तुंगुस्का मिसाइल प्रणाली और P8I विमानों का रखरखाव शामिल है।

HIGHLIGHTS

  • रक्षा मंत्रालय ने कुल 858 करोड़ रुपये के दो प्रमुख रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए।
  • भारतीय सेना के लिए 445 करोड़ रुपये में तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइलें खरीदी जाएंगी।
  • P8I समुद्री टोही विमानों के रखरखाव के लिए बोइंग इंडिया के साथ 413 करोड़ का समझौता हुआ।
  • यह कदम 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' अभियान को मजबूती प्रदान करेगा।
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नई दिल्ली | रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को बढ़ाने के लिए 858 करोड़ रुपये के दो महत्वपूर्ण रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में संपन्न हुए।

तुंगुस्का मिसाइल प्रणाली की खरीद

भारतीय सेना की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रूस की जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ 445 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया है। इसके तहत अत्याधुनिक तुंगुस्का वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली की खरीद की जाएगी। यह प्रणाली ड्रोन, लड़ाकू विमान और क्रूज मिसाइलों जैसे हवाई खतरों को नष्ट करने में सक्षम है। यह समझौता भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और गहरा करेगा।

P8I विमानों का स्वदेशी रखरखाव

भारतीय नौसेना के P8I दीर्घ-श्रेणी समुद्री टोही विमानों के डिपो स्तर के निरीक्षण के लिए बोइंग इंडिया के साथ 413 करोड़ रुपये का समझौता हुआ है। यह पूरी तरह स्वदेशी सामग्री पर आधारित है। इस अनुबंध के तहत विमानों का रखरखाव भारत में ही स्थित एमआरओ (MRO) केंद्रों में किया जाएगा। यह कदम भारत सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक-इन-इंडिया' विजन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सैन्य शक्ति में होगा इजाफा

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षरित इन समझौतों से रक्षा तैयारियों में सुधार होगा। यह घरेलू रक्षा उद्योग को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ सेना की मारक क्षमता को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

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