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राजस्थान

नौतपा 2026: भीषण गर्मी और अलर्ट: नौतपा 2026: 48 डिग्री तक तपेगा पारा, सरकार ने जारी किया अलर्ट

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आज से शुरू हुआ नौतपा, सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश से बढ़ेगी तपिश और सियासी पारा।

HIGHLIGHTS

  • नौतपा 25 मई से 2 जून तक चलेगा, जिसमें सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा।
  • राजस्थान के कई हिस्सों में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है।
  • 29 मई के बाद ग्रहों की चाल बदलने से आंधी और हल्की बारिश के आसार हैं।
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नौतपा की अधिक गर्मी अच्छे मानसून का संकेत है।
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जयपुर | आज 25 मई से साल के सबसे गर्म नौ दिनों यानी नौतपा की शुरुआत हो गई है। सूर्य के दोपहर 3:38 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही तपिश बढ़ गई है। प्रशासन ने भीषण लू को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया है।

ज्योतिषविदों के अनुसार, नौतपा के दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी काफी कम हो जाती है। इस कारण धरती पर सीधे किरणें पड़ती हैं और तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाता है। यह समय काफी चुनौतीपूर्ण होता है।

इस बार नौतपा 2 जून तक चलेगा। शुरुआती छह दिनों में भीषण गर्मी रहने वाली है। हालांकि, आखिरी तीन दिनों में मौसम का मिजाज बदलने की पूरी संभावना जताई जा रही है, जिससे लोगों को राहत मिल सकती है।

नौतपा का ज्योतिषीय महत्व और मानसून के संकेत

अलवर के ज्योतिषाचार्य तपेश अवस्थी ने बताया कि 'नौतपा' शब्द 'नव' और 'तप' से बना है। इसका अर्थ है नौ दिनों की भारी तपिश। यह समय खेती और मानसून की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस साल रोहिणी का निवास समुद्र में माना जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब रोहिणी का वास समुद्र में होता है, तो यह आने वाले समय में अच्छी वर्षा के मजबूत संकेत देता है। किसान इसके लिए आशान्वित हैं।

मान्यता है कि नौतपा के दौरान जितनी अधिक गर्मी पड़ती है, मानसून उतना ही बेहतर होता है। भीषण तपिश समुद्र से नमी खींचने में मदद करती है, जो आगे चलकर अच्छी बारिश का आधार बनती है।

48 डिग्री तक जा सकता है पारा: प्रशासन की तैयारी

मौसम विभाग ने राजस्थान के कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। जयपुर मौसम केंद्र के मुताबिक, पश्चिमी राजस्थान के रेतीले इलाकों में पारा 48 डिग्री के पार जा सकता है। यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।

बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे जिलों में लू का भयंकर दौर शुरू हो गया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है। प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक बाहर न निकलने की सलाह दी है।

प्रशासनिक तैयारियां और राजनीतिक सक्रियता

गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राज्य सरकार ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्बाध पेयजल आपूर्ति और बिजली सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। राजनीतिक दल भी सक्रिय हैं।

अस्पतालों में हीटवेव वार्ड आरक्षित किए गए हैं और दवाइयों का स्टॉक बढ़ा दिया गया है। विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की है कि ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती न की जाए ताकि पशु-पक्षियों को राहत मिले।

ग्रहों की चाल बदलेगी मौसम: आंधी और बारिश का अलर्ट

ज्योतिषाचार्य पं. मोहनलाल शर्मा के अनुसार, 29 मई को बुध ग्रह मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इस गोचर के कारण नौतपा के अंतिम दिनों में मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिलेगा। आंधी चलने की संभावना है।

मिथुन राशि में गुरु, शुक्र और बुध के आने से 'त्रिग्रही योग' बन रहा है। इस विशेष योग के प्रभाव से 30 मई के बाद तेज आंधी और हल्की बारिश हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आएगी।

यदि नौतपा के दौरान बारिश हो जाती है, तो इसे 'नौतपा खंडित होना' कहा जाता है। इससे तात्कालिक राहत तो मिलती है, लेकिन पुरानी मान्यताओं के अनुसार मानसून की तीव्रता पर इसका असर पड़ सकता है।

क्या कहता है मौसम विज्ञान?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इस समय सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लंबवत होती हैं। भारत का अधिकांश हिस्सा इसी क्षेत्र में आता है, जिससे यहां भीषण गर्मी महसूस होती है। यह एक वार्षिक खगोलीय घटना है।

मौसम विशेषज्ञ राधेश्याम शर्मा का कहना है कि स्थानीय स्तर पर बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र के कारण धूल भरी आंधी चल सकती है। यह सामान्य मानसूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और हर साल ऐसा देखा जाता है।

"इस बार ग्रहों का संयोग ऐसा है कि गर्मी के साथ-साथ चक्रवाती हवाओं का असर भी दिखेगा। 30 मई से प्रदेश के कई हिस्सों में बूंदा-बांदी की संभावना है, जिससे राहत मिलेगी।" - ज्योतिषाचार्य

स्वास्थ्य और दान-पुण्य का महत्व

भीषण गर्मी के बीच लोगों को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। पर्याप्त पानी पिएं और सूती कपड़े पहनें। पशु-पक्षियों के लिए भी छतों पर पानी का इंतजाम करना एक बड़ी मानवीय सेवा है।

नौतपा के दौरान दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस समय ठंडी चीजों जैसे मिट्टी के घड़े, हाथ के पंखे और शीतल जल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है।

कृषि और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

किसानों के लिए नौतपा का मौसम काफी महत्वपूर्ण होता है। वे इस समय अपनी जमीनों को जोतकर खाली छोड़ देते हैं। तेज धूप मिट्टी के भीतर छिपे हानिकारक कीड़ों को खत्म करने में सहायक होती है।

हालांकि, भीषण गर्मी खड़ी फसलों और बागवानी के लिए चुनौती भी पेश करती है। सिंचाई की व्यवस्था दुरुस्त रखना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है। सरकार ने इसके लिए विशेष कृषि सब्सिडी की घोषणा की है।

कुल मिलाकर, इस साल का नौतपा मिला-जुला रहने वाला है। जहां शुरुआती दिनों की तपिश रिकॉर्ड तोड़ेगी, वहीं अंत में मिलने वाली राहत मानसून के आगमन की आहट देगी। प्रशासन और जनता दोनों को पूरी तरह सतर्क रहना होगा।

*Edit with Google AI Studio

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