सिरोही | जिले में स्थित आदिवासी गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने हॉस्टल में मिल रही अव्यवस्थाओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है। खाने में कीड़े मिलने और वार्डन द्वारा कथित बदसलूकी से नाराज करीब 50 छात्राएं पैदल ही कलेक्ट्रेट पहुंच गईं। छात्राओं ने जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त की।
आदिवासी छात्राओं का हल्ला बोल: सिरोही: खाने में कीड़े, छात्राओं ने कलेक्ट्रेट में खोला मोर्चा
सिरोही में आदिवासी गर्ल्स हॉस्टल की करीब 50 छात्राओं ने खाने की खराब गुणवत्ता और वार्डन की बदसलूकी के खिलाफ कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया।
HIGHLIGHTS
- खाने में कीड़े मिलने पर आदिवासी छात्राओं का जोरदार प्रदर्शन।
- करीब 50 छात्राएं पैदल चलकर सिरोही कलेक्ट्रेट पहुंचीं।
- हॉस्टल वार्डन पर बदसलूकी और अपशब्द कहने का गंभीर आरोप।
- कलेक्टर ने जांच कमेटी गठित कर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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छात्राओं के खाने में मिले कीड़े
प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता अत्यंत खराब है।
उन्होंने दावा किया कि कई बार उनके खाने में कीड़े भी पाए गए हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है।
वार्डन पर बदसलूकी का आरोप
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छात्राओं ने यह भी शिकायत की कि जब वे इन समस्याओं के बारे में हॉस्टल वार्डन से बात करती हैं, तो वह उनके साथ दुर्व्यवहार करती हैं।
छात्राओं के अनुसार, वार्डन मेम उन्हें अपशब्द कहती हैं और "तुम सब ग्वार हो" जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करती हैं।
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से लिया। उन्होंने लगभग एक घंटे तक छात्राओं से बातचीत की और उनकी सभी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, कलेक्टर ने तुरंत मौके पर एसडीएम, तहसीलदार और शिक्षा विभाग के एडीपीसी को तलब किया।
कलेक्टर ने एक जांच कमेटी का गठन किया है, जिसे हॉस्टल की व्यवस्थाओं और छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों की गहन जांच करने का निर्देश दिया गया है।
छात्राओं को सुरक्षित हॉस्टल पहुंचाया गया
छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, कलेक्टर ने उन्हें सरकारी वाहनों से वापस हॉस्टल भेजने की व्यवस्था की। इसके बाद, लगभग चार सरकारी गाड़ियों से सभी छात्राओं को सुरक्षित उनके हॉस्टल पहुंचाया गया।
अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई जांच कमेटी की रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे।