जयपुर | राजस्थान में नीट पेपरलीक का मामला अब काफी गरमा चुका है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। उन्होंने इस घोटाले की जांच कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है।
नीट पेपरलीक: जूली का सरकार पर हमला: नीट पेपरलीक: जूली ने उठाए सवाल, कोर्ट की निगरानी में हो जांच
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सीबीआई और ईडी की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।
HIGHLIGHTS
- जूली ने कहा कि भाजपा राज के 10 साल में 89 पेपर लीक हुए हैं।
- उन्होंने राजस्थान पुलिस और एसओजी की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाए।
- जूली ने सीबीआई और ईडी की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कम होने की बात कही।
- जयपुर में नीट का पेपर छपने और अलवर में नकल के मामलों का जिक्र किया।
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जूली का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि अब देश की जनता का भरोसा केंद्रीय जांच एजेंसियों से पूरी तरह उठ चुका है।
केंद्रीय एजेंसियों पर भरोसे का संकट
जूली ने कहा कि अब देश की जनता का सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों से विश्वास कम हो गया है। यही कारण है कि वे इस मामले में कोर्ट की निगरानी चाहते हैं।
उन्होंने राजस्थान पुलिस और एसओजी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। जूली ने पूछा कि जब शुरुआत में शिकायतें मिलीं, तो एसओजी ने इसे पेपरलीक मानकर मामला दर्ज क्यों नहीं किया?
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भाजपा सरकार पर तीखा हमला
नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा के 10 साल के शासनकाल को पेपरलीक का काल बताया। उन्होंने दावा किया कि इन सालों में कुल 89 पेपर लीक हुए हैं, जो एक कड़वी सच्चाई है।
सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा केवल कार्रवाई के खोखले दावे करती है। धरातल पर युवाओं की कड़ी मेहनत बर्बाद हो रही है।
राजस्थान की भाजपा सरकार ने सच्चाई उजागर करने के बजाय उसे दबाने की कोशिश की। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि युवाओं के प्रति घोर संवेदनहीनता का प्रमाण है।
जयपुर और अलवर के कनेक्शन का जिक्र
जूली ने दावा किया कि नीट का पेपर जयपुर में ही छपा था। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जो सरकार की मंशा पर संदेह पैदा करता है।
उन्होंने अलवर की घटनाओं का भी जिक्र किया, जहां पेपर खुले मिले थे और नकल के मामले पकड़े गए थे। जूली ने कहा कि विधानसभा में ओएमआर शीट बदलने का मुद्दा उठाया गया था।
जूली ने जोर देकर कहा कि अलवर में नकल करते हुए लोग पकड़े गए, लेकिन प्रशासन ने उसे लीक की श्रेणी में नहीं रखा। यह छात्रों के साथ सरासर धोखा है।
ओएमआर शीट में हेराफेरी के मामलों ने भी सरकार की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। विधानसभा में विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का सरकार के पास कोई ठोस जवाब नहीं था।
अंत में जूली ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता अपनी छवि बचाना नहीं, बल्कि न्याय सुनिश्चित करना होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो युवाओं का आक्रोश और बढ़ेगा।
यह मामला अब लाखों छात्रों के भविष्य और देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा है। सरकार को तुरंत इस पर गंभीर कदम उठाकर छात्रों का भरोसा जीतना चाहिए।
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