thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजनीति

पाली में भाजपा की नमिता बनीं महापौर: पाली में कांग्रेस के 29 पार्षद, फिर भी भाजपा की नमिता बुबकिया बनीं महापौर; सुमित्रा जैन को सिर्फ 3 वोट

Pradeep Beedawat

पाली नगर निगम में 29 पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को केवल तीन वोट मिले। भाजपा की नमिता बुबकिया 33 मत लेकर महापौर चुनी गईं, जबकि कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाली राजबाला हिंगड़ को 29 मत मिले। परिणाम ने कांग्रेस के उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक समन्वय पर सवाल खड़े किए हैं।

+Follow us
thinQ360 को गूगल पर फेवरेट बनाएँ

HIGHLIGHTS

  • भाजपा की नमिता बुबकिया 33 मत हासिल कर पाली की महापौर निर्वाचित हुईं।निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ को 29 मत मिले।29 पार्षदों वाली कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को केवल तीन वोट मिले।भाजपा को उसकी निर्वाचित संख्या से 12 अधिक मत प्राप्त हुए।गोपनीय मतदान के कारण किसी पार्षद के व्यक्तिगत वोट की आधिकारिक पुष्टि संभव नहीं है।
pali mayor election namita bubakia wins sumitra jain three votes rajbala hingad

पाली | पाली नगर निगम के महापौर चुनाव में वार्ड चुनाव के दलगत आंकड़ों से बिल्कुल अलग परिणाम सामने आया है। नगर निगम में 29 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल होने के बावजूद कांग्रेस अपना महापौर नहीं बना सकी। भाजपा की नमिता बुबकिया ने 33 मत हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को केवल तीन मत मिले।

नगर निगम के सभी 65 पार्षदों ने मतदान किया। तीनों प्रत्याशियों को मिले मतों का कुल योग भी 65 रहा। नमिता बुबकिया के बहुमत के लिए आवश्यक 33 मत हासिल करते ही पाली नगर निगम में भाजपा का महापौर निर्वाचित हो गया।

कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 और निर्दलीय 15 पार्षद

पाली नगर निगम के 65 वार्डों के चुनाव परिणाम 14 सितंबर 2026 को घोषित हुए थे। कांग्रेस ने 29 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि भाजपा के 21 प्रत्याशी पार्षद बने। इसके अतिरिक्त 15 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीतकर नगर निगम पहुंचे।

नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा 33 था। कांग्रेस बहुमत से चार सीट दूर थी, जबकि भाजपा को अपना महापौर बनाने के लिए अपने 21 पार्षदों के अतिरिक्त 12 मतों की आवश्यकता थी। संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस भाजपा के मुकाबले आठ सीट आगे थी, लेकिन कोई भी दल अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं था।

कांग्रेस में उम्मीदवार चयन के बाद सामने आई बगावत

कांग्रेस की ओर से महापौर पद के लिए सुमित्रा जैन और राजबाला हिंगड़ सहित कई नाम दावेदारी में थे। राजबाला हिंगड़ वार्ड संख्या 38 और सुमित्रा जैन वार्ड संख्या 34 से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद निर्वाचित हुई थीं। भाजपा की नमिता बुबकिया वार्ड संख्या 33 से चुनाव जीती थीं।

कांग्रेस ने सुमित्रा जैन को महापौर पद का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया। पार्टी का टिकट नहीं मिलने के बाद राजबाला हिंगड़ ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। इस तरह कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी को निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाने के साथ अपने ही दल से निर्वाचित बागी उम्मीदवार की चुनौती का सामना करना पड़ा।

छह प्रत्याशियों ने दाखिल किए थे नामांकन

महापौर पद के लिए प्रारंभ में छह उम्मीदवारों की ओर से कुल 10 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। इनमें कांग्रेस की सुमित्रा जैन, भाजपा की नमिता बुबकिया, राजबाला हिंगड़, पुष्पा सोमनानी, कुसुम सोनी और राशिदा बानो शामिल थीं।

नाम वापसी के अंतिम दिन कुसुम सोनी, पुष्पा सोमनानी और राशिदा बानो ने अपने नाम वापस ले लिए। इसके बाद मुख्य मुकाबला भाजपा की नमिता बुबकिया, कांग्रेस की सुमित्रा जैन और निर्दलीय राजबाला हिंगड़ के बीच रह गया। राजबाला को ‘सोफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था।

सिंबल जमा कराने के बाद विधायक के भाई से कथित मारपीट

नामांकन प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी सुमित्रा जैन का अधिकृत सिंबल जमा कराकर लौट रहे पाली विधायक भीमराज भाटी के छोटे भाई लक्ष्मीनारायण भाटी के साथ कथित मारपीट का मामला भी सामने आया था।

आरोप था कि उनकी स्कूटी को एक वाहन से टक्कर मारकर गिराया गया और इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई। इस घटना को लेकर पुलिस में शिकायत दी गई थी। हालांकि घटना के पीछे कौन लोग थे और उसका उद्देश्य क्या था, इसका निर्धारण पुलिस जांच के आधार पर ही हो सकता है। इसे किसी राजनीतिक पक्ष से जोड़ने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

मतदान में सभी 65 पार्षदों ने लिया हिस्सा

21 सितंबर को पाली नगर निगम में महापौर पद के लिए मतदान हुआ। भाजपा की नमिता बुबकिया और कांग्रेस की सुमित्रा जैन मतदान स्थल पहुंचीं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ अपने समर्थक पार्षदों के साथ नगर निगम पहुंचीं।

मतदान के दौरान दो निर्दलीय पार्षदों के पास कथित रूप से छिपे हुए कैमरे मिलने की बात भी सामने आई। बताया गया कि पुलिस ने उन्हें प्रवेश द्वार पर रोक लिया। इस घटनाक्रम से संबंधित विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

सभी 65 पार्षदों के मतदान के बाद मतगणना हुई। भाजपा की नमिता बुबकिया को 33, निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को केवल तीन मत मिले।

29 पार्षदों वाली कांग्रेस की प्रत्याशी को तीन वोट क्यों?

पाली महापौर चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी को मिले केवल तीन मत हैं। कांग्रेस के टिकट पर 29 पार्षद निर्वाचित हुए थे, लेकिन सुमित्रा जैन के पक्ष में केवल तीन वोट पड़े। पार्टी के निर्वाचित पार्षदों की संख्या और अधिकृत प्रत्याशी को मिले मतों के बीच 26 का अंतर रहा।

इस गणना में राजबाला हिंगड़ भी शामिल हैं, क्योंकि उन्होंने पार्षद का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीता था, लेकिन महापौर पद का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा। राजबाला को 29 मत मिले, जो कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी से 26 अधिक हैं।

महापौर पद के लिए मतदान गोपनीय था। इसलिए केवल परिणाम के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता कि कांग्रेस, भाजपा अथवा निर्दलीय पार्षदों में से किसने किस उम्मीदवार को वोट दिया। इतना स्पष्ट है कि कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी अपने दल से निर्वाचित पार्षदों का व्यापक समर्थन हासिल नहीं कर सकीं।

भाजपा को अपने पार्षदों से 12 वोट अधिक मिले

नगर निगम चुनाव में भाजपा के 21 पार्षद निर्वाचित हुए थे, जबकि पार्टी की महापौर प्रत्याशी नमिता बुबकिया को 33 मत मिले। इस तरह उन्हें भाजपा की मूल निर्वाचित संख्या से 12 वोट अधिक प्राप्त हुए।

ये अतिरिक्त मत भाजपा के बाहर से निर्वाचित पार्षदों के समर्थन की ओर संकेत करते हैं। हालांकि इनमें कितने निर्दलीय थे और क्या कांग्रेस से निर्वाचित किसी पार्षद ने भी भाजपा प्रत्याशी को वोट दिया, इसका निश्चित निर्धारण गोपनीय मतदान के कारण नहीं किया जा सकता।

नमिता बुबकिया के 33 मतों तक पहुंचने से यह स्पष्ट है कि भाजपा ने चुनाव से पहले आवश्यक अतिरिक्त समर्थन जुटा लिया था। दूसरी ओर राजबाला हिंगड़ के 29 मतों ने वास्तविक मुकाबले को भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच ला दिया।

राजबाला और सुमित्रा को मिलाकर भी भाजपा से एक वोट कम

चुनावी आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि राजबाला हिंगड़ को मिले 29 और सुमित्रा जैन को मिले तीन मतों को जोड़ने पर कुल संख्या 32 होती है। यह भाजपा की विजयी प्रत्याशी नमिता बुबकिया को मिले 33 मतों से एक कम है।

हालांकि यह केवल परिणाम के बाद का गणित है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि राजबाला को कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने पर यही सभी मत उनके साथ बने रहते। उम्मीदवार बदलने की स्थिति में पार्षदों का समर्थन और चुनावी समीकरण भी बदल सकते थे।

उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक समन्वय पर सवाल

पाली के परिणाम ने कांग्रेस के उम्मीदवार चयन, स्थानीय नेतृत्व और पार्षदों के बीच समन्वय को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या महापौर प्रत्याशी के नाम पर पार्टी के सभी निर्वाचित पार्षदों के बीच सहमति थी।

यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व राजबाला हिंगड़ की दावेदारी को लेकर समय रहते कोई सहमति बना सकता था और क्या निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के लिए कोई साझा रणनीति तैयार की गई थी। इन सवालों का स्पष्ट उत्तर कांग्रेस नेतृत्व, निर्वाचित पार्षदों और दोनों दावेदारों के विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।

सिरोही और पाली में दिखी अलग राजनीतिक तस्वीर

पाली और सिरोही में 21 सितंबर को हुए निकाय प्रमुखों के चुनाव ने दो अलग-अलग राजनीतिक तस्वीरें प्रस्तुत कीं। सिरोही नगर परिषद में कांग्रेस के 23 पार्षद थे, जबकि कांग्रेस की ऋतु जैन को सभापति चुनाव में 30 मत मिले। भाजपा की पूजा माली को पांच वोट प्राप्त हुए।

इसके विपरीत पाली में कांग्रेस के 29 पार्षद होने के बावजूद पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी को केवल तीन मत मिले। सिरोही में कांग्रेस प्रत्याशी को उसकी निर्वाचित संख्या से सात मत अधिक मिले, जबकि पाली में कांग्रेस प्रत्याशी और पार्टी की निर्वाचित संख्या के बीच 26 मतों का अंतर रहा।

यह तुलना बताती है कि वार्ड चुनाव में अधिक सीटें जीतना और उसके बाद महापौर अथवा सभापति चुनाव में पार्षदों का समर्थन बनाए रखना दो अलग-अलग राजनीतिक चुनौतियां हैं।

महापौर चुनी गईं, लेकिन सदन का मूल गणित नहीं बदला

नमिता बुबकिया के महापौर निर्वाचित होने के बावजूद नगर निगम के निर्वाचित पार्षदों का मूल दलगत आंकड़ा नहीं बदला है। कांग्रेस के टिकट पर 29, भाजपा के टिकट पर 21 और निर्दलीय रूप से 15 पार्षद चुनाव जीते हैं।

भाजपा प्रत्याशी को महापौर चुनाव में 33 मत मिलने का यह अर्थ नहीं है कि नगर निगम में भाजपा के निर्वाचित पार्षदों की संख्या 33 हो गई है। नगर निगम की समितियों, बजट, प्रस्तावों और अन्य नीतिगत निर्णयों के दौरान महापौर चुनाव में मिला समर्थन किस सीमा तक कायम रहता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

नए बोर्ड के सामने शहर के विकास की चुनौती

महापौर चुनाव के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब पाली की जनता की नजर नगर निगम के कामकाज पर रहेगी। महापौर नमिता बुबकिया के सामने शहर की सड़कें, सफाई, पेयजल, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, नगर निगम की संपत्तियों और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुख चुनौती होंगे।

कांग्रेस के सामने अपने निर्वाचित पार्षदों के बीच समन्वय स्थापित करने, अधिकृत प्रत्याशी को केवल तीन मत मिलने के कारणों की समीक्षा करने और नगर निगम में प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने की चुनौती है। वहीं राजबाला हिंगड़ का समर्थन करने वाले पार्षद भविष्य में नगर निगम के मुद्दों पर क्या रुख अपनाते हैं, इस पर भी राजनीतिक निगाहें रहेंगी।

पाली का महापौर चुनाव तीन आंकड़ों के कारण लंबे समय तक चर्चा में रहेगा—कांग्रेस के 29 निर्वाचित पार्षद, उसकी अधिकृत प्रत्याशी को मिले तीन मत और भाजपा की नमिता बुबकिया की 33 वोटों से हुई जीत।

शेयर करें: