पाली |
परशुराम महादेव मेले में बसों का अभाव: पाली: परशुराम महादेव मेले में रोडवेज बसों का अभाव, सड़कें भी बदहाल; श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर उठे सवाल
18 अगस्त को होने वाले परशुराम महादेव मेले से पहले परिवहन और सड़क व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। रोडवेज बसों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने और घाट सेक्शन की सड़कों की खराब स्थिति के बीच श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित यातायात व मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
HIGHLIGHTS
- 18 अगस्त को होने वाले परशुराम महादेव मेले से पहले परिवहन व्यवस्था को लेकर सवाल उठे।
- मेले के दौरान रोडवेज बसों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर चिंता जताई गई।
- घाट सेक्शन और घुमावदार मार्ग पर सड़कों की खराब स्थिति के कारण सुरक्षित यात्रा के लिए मरम्मत की मांग की गई।
- कुंडधाम से परशुराम महादेव गुफा तक चट्टान गिरने के संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई गई।
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18 अगस्त को होने वाले परशुराम महादेव मेले से पहले श्रद्धालुओं के लिए परिवहन, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मेले की तैयारियों को लेकर फुटादेवल में बैठक आयोजित करने और मौके पर समस्याओं का समाधान करने की आवश्यकता जताई गई है।
रोडवेज बसों की व्यवस्था पर उठे सवाल
देसूरी उपखंड स्तर पर सादड़ी पालिका में आयोजित बैठक के दौरान मेले में सरकारी बसों की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से श्रद्धालुओं के आवागमन की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। मांग की गई है कि प्रशासन यह स्पष्ट करे कि मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए किस प्रकार की सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध रहेगी।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की संभावित आवाजाही को देखते हुए रोडवेज बसों सहित सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई गई है।
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दो महीने तक रहती है श्रद्धालुओं की आवाजाही
परशुराम महादेव तीर्थ पर सावन सहित मेले की अवधि में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया गया है कि लगभग दो महीने की अवधि में लाखों श्रद्धालु भगवान परशुराम महादेव के दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में यातायात, सड़क, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
घाट सेक्शन की सड़कें दुरुस्त करने की मांग
परशुराम महादेव जाने वाले मार्ग की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है। घाट सेक्शन और घुमावदार रास्ता होने के कारण सड़क का दुरुस्त रहना श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। खराब सड़क के कारण यात्रियों को जोखिम उठाना पड़ सकता है।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि मेले से पहले प्रशासनिक बैठकें तो आयोजित होती हैं, लेकिन सड़क और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े कई काम धरातल पर समय से पूरे नहीं हो पाते।
45 लाख रुपए के स्वीकृत कार्य का भी मुद्दा
दावा किया गया है कि दिसंबर 2023 में करीब 45 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी, जिससे एक रपट और घाट सेक्शन में सड़क की सीमेंटेड पटरियों से संबंधित कार्य किए जाने थे। इन कार्यों की प्रगति और समय पर क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
चट्टान गिरने के खतरे को लेकर चिंता
कुंडधाम से परशुराम महादेव गुफा तक के मार्ग पर चट्टान गिरने के संभावित खतरे को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा उपाय करने और जोखिम वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी की आवश्यकता बताई गई है।
मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग
श्रद्धालुओं की आस्था और मेले में होने वाली भारी आवाजाही को देखते हुए प्रशासन से सड़क मरम्मत, रोडवेज बसों की पर्याप्त व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा सहित मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की गई है। साथ ही जनप्रतिनिधियों से भी मेले की तैयारियों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा जताई गई है।
- पाली से सुनील त्रिवेदी की रिपोर्ट