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राजस्थान

जयपुर नगर निगम: कांग्रेस की जीत से बढ़ी भाजपा की धड़कनें

बलजीत सिंह शेखावत

जयपुर नगर निगम के 4 वार्डों में हुए पुनर्मतदान में कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया है। 78 सीटों के साथ बहुमत होने के बाद भी भाजपा में मेयर पद के लिए भारी लॉबिंग और क्रॉस वोटिंग का खतरा बना हुआ है।

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HIGHLIGHTS

  • जयपुर नगर निगम के 4 वार्डों के पुनर्मतदान में कांग्रेस ने सभी सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया।
  • कांग्रेस की सीटों की संख्या 53 से बढ़कर 57 हुई, जबकि भाजपा 78 सीटों के साथ बहुमत के करीब है।
  • मेयर पद के लिए भाजपा में संघ और केंद्रीय मंत्रियों की एंट्री के साथ जातीय लॉबिंग तेज हो गई है।
  • भाजपा को 2019 के 'विष्णु लाटा कांड' की तरह क्रॉस वोटिंग और निर्दलीयों के पाला बदलने का डर है।
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जयपुर | जयपुर नगर निगम 2026 के लंबित चल रहे चार वार्डों के पुनर्मतदान के नतीजे घोषित होते ही गुलाबी नगरी की राजनीति में अचानक बड़ा मोड़ आ गया है। री-पोलिंग के बाद गुरुवार को आए नतीजों में चारों की चारों सीटें कांग्रेस के खाते में चली गईं।

इस क्लीन स्विप के साथ ही कांग्रेस का आंकड़ा 53 से बढ़कर 57 हो गया है। जबकि भाजपा 78 सीटों पर टिकी हुई है और 15 निर्दलीय जीतकर आए हैं।

पुनर्मतदान के नतीजे: कांग्रेस का दबदबा

EVM में आई तकनीकी खराबी के बाद वार्ड 9, 18, 25 और 34 के पांच बूथों पर दोबारा मतदान कराया गया था। गुरुवार को श्री भवानी निकेतन में हुई मतगणना में कांग्रेस ने चारों सीटों पर जीत हासिल की।

वार्डवार चुनावी परिणाम का विवरण

  • वार्ड 9: कांग्रेस की कैलाश देवी ने 4,610 वोट हासिल किए। उन्होंने भाजपा की मंजू अग्रवाल को 764 वोटों के बड़े अंतर से हराया।
  • वार्ड 18: कांग्रेस की वंदिता शर्मा को 4,962 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के नीरज कुमावत को 181 वोटों से मात दी।
  • वार्ड 25: कांग्रेस की रेखा देवी सैनी 5,533 वोट पाकर विजयी रहीं। उन्होंने निर्दलीय चंचल कंवर को 397 वोटों से पीछे छोड़ा।
  • वार्ड 34: कांग्रेस के सुरेश यादव को 4,405 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के पीयूष किराड़ को 149 वोटों से हराया।

भाजपा में मेयर पद के लिए मथानी

78 सीटों के साथ बहुमत में होने के बावजूद भाजपा के भीतर मेयर प्रत्याशी के चयन को लेकर भारी असमंजस है। पार्टी के सामने एक नाम पर सर्वसम्मति बनाना सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है।

मेयर पद के दावेदारों में सुनील कोठारी, पुनीत कर्णावट, शैलेंद्र भार्गव, सुभाष सिंघी, विमल अग्रवाल और भवानी सिंह राजावत के नाम पहले से चर्चा में थे। अब अनुराधा माहेश्वरी और विजय अग्रवाल के नाम भी तेजी से आगे आए हैं।

केंद्रीय नेतृत्व और संघ की सक्रियता

सूत्रों के अनुसार, एक नए और निष्पक्ष चेहरे को आगे बढ़ाने के लिए राजस्थान के एक केंद्रीय मंत्री सहित दो बड़े केंद्रीय नेता सक्रिय हो चुके हैं। संघ के शीर्ष पदाधिकारी भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं।

यहां तक कि एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल से जुड़े गैर-पार्षद व्यक्ति का नाम भी अचानक लॉबिंग में उछल रहा है। इससे जयपुर के मेयर का चुनाव पेचीदा और राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है।

जातीय समीकरण और लॉबिंग का खेल

मेयर पद के लिए जातीय समीकरण पूरी तरह हावी हो चुके हैं। वैश्य समाज के दावे के बाद अब अन्य समाजों ने भी अपनी मांगें तेज कर दी हैं।

अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा और विप्र फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से मुलाकात की है। उन्होंने ब्राह्मण चेहरे को मौका देने की मांग रखी है।

दूसरी ओर, श्री अग्रवाल समाज समिति और राजपूत सभा जयपुर के प्रतिनिधियों ने भी ज्ञापन सौंपे हैं। वे अपनी बिरादरी के प्रत्याशी को मेयर बनाने के लिए दबाव बना रहे हैं।

2019 का 'विष्णु लाटा फैक्टर' और क्रॉस वोटिंग का डर

भाजपा नेतृत्व को 2019 का वह उपचुनाव बार-बार याद आ रहा है। तब 90 सदस्यों वाले बोर्ड में 63 पार्षद होने के बावजूद भाजपा अपने मेयर प्रत्याशी मनोज भारद्वाज को नहीं जिता पाई थी।

तब बागी भाजपा नेता विष्णु लाटा ने कांग्रेस और निर्दलीयों के साथ-साथ भाजपा के सेंधमार वोटों के दम पर 45 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। नगर निगम में दलबदल कानून लागू नहीं होने के कारण इस बार भी क्रास वोटिंग का खतरा बना हुआ है।

निर्दलीयों को पाले में लाने की रेस

अपनी सरकार और बहुमत को सुरक्षित करने के लिए भाजपा ने निर्दलीयों में सेंधमारी तेज कर दी है। वार्ड 108 के निर्दलीय पार्षद के बाद गुरुवार को वार्ड 80 की निर्दलीय पार्षद रेणु चौधरी ने भाजपा की सदस्यता ले ली।

भाजपा का दावा है कि 50% से अधिक निर्दलीय उनके संपर्क में हैं। हालांकि, जब तक मेयर का आधिकारिक नामांकन और वोटिंग नहीं हो जाती, तब तक पार्षदों की बाड़ाबंदी और पर्दे के पीछे का खेल जारी रहेगा।

*Edit with Google AI Studio

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