नई दिल्ली | भारत में आम जनता के लिए एक बार फिर महंगाई की खबर आ रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जल्द ही एक और बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना प्रबल हो गई है।
पेट्रोल-डीजल की बढ़ेंगी कीमतें: भारत में फिर बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम; BPCL की चेतावनी
वैश्विक ऊर्जा संकट और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है।
HIGHLIGHTS
- 9 दिन में 3 बार बढ़ चुके हैं पेट्रोल-डीजल के दाम।
- बीपीसीएल डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने दी बड़ी चेतावनी।
- अमेरिका-ईरान जंग से ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान।
- भारत ने रूस और अफ्रीका से बढ़ाया तेल का आयात।
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तेल कंपनी भारत पेट्रोलियम (BPCL) के डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने इस संबंध में महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वैश्विक ऊर्जा संकट जारी रहने पर दाम बढ़ाना मजबूरी होगी।
पिछले 9 दिनों के भीतर देश में पहले ही तीन बार ईंधन के दाम बढ़ चुके हैं। 23 मई को कीमतों में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा दर्ज किया गया था।
इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल-डीजल के दामों में 3 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई थी। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के घरेलू बजट पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है।
ऊर्जा संकट और नीतिगत चुनौतियां
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राज कुमार दुबे के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है।
वर्तमान स्थितियों को देखते हुए नीति निर्माताओं के पास अब बहुत ही सीमित विकल्प बचे हैं। सरकार और तेल कंपनियां इस संकट से निकलने के लिए मंथन कर रही हैं।
तेल कंपनियों के पास मौजूद तीन रास्ते
दुबे ने स्पष्ट किया कि इस संकट से निपटने के लिए मुख्य रूप से तीन रास्ते खुले हैं। पहला रास्ता पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतों को सीधे बढ़ा देना है।
दूसरा विकल्प यह है कि तेल कंपनियां खुद इस नुकसान को उठाएं और अपने घाटे को बढ़ने दें। हालांकि, यह लंबी अवधि के लिए एक टिकाऊ समाधान नहीं माना जा रहा।
तीसरा विकल्प यह है कि सरकार फाइनेंसिंग के जरिए तेल कंपनियों को आवश्यक फंड मुहैया कराए। इससे कंपनियों को वित्तीय दबाव से राहत मिल सकती है और कीमतें स्थिर रह सकती हैं।
अमेरिका-ईरान जंग का व्यापक असर
अमेरिका-ईरान जंग की वजह से वैश्विक ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। दुबे ने बताया कि शुरुआत में कीमतों में हुई वृद्धि को अस्थायी माना जा रहा था।
लेकिन अब जिस तरह से हालात बदल रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि यह संकट लंबा खिंचेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर की तबाही को ठीक करने में अभी बहुत वक्त लगेगा।
अगर यही वैश्विक स्थिति बनी रही, तो ईंधन के दामों में एक और बढ़ोतरी होना बिल्कुल तय है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितनी वृद्धि की जाएगी।
होर्मुज स्ट्रेट और सप्लाई चेन की बाधा
जंग के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है और दुनिया की लाइफलाइन है।
वैश्विक स्तर पर कुल तेल सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई थी।
जंग की शुरुआत में कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो मार्च तक 120 डॉलर तक पहुंच गया। फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल 103 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है।
भारत की नई तेल रणनीति और डाइवर्सिफिकेशन
संकट के बीच भारत ने अपनी तेल सप्लाई के स्रोतों में बड़ा बदलाव किया है। अब भारतीय कंपनियां रूसी तेल और अफ्रीका के बाजारों से तेल का आयात बढ़ा रही हैं।
बीपीसीएल और अन्य भारतीय ऊर्जा कंपनियों ने अपनी सोर्सिंग का काफी विस्तार किया है। पहले भारत के पास केवल 20 सप्लाई पॉइंट्स थे, जो अब बढ़कर 40 हो गए हैं।
सप्लाई चेन में इस डाइवर्सिफिकेशन से भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिली है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों का दबाव अभी भी बना हुआ है।
भविष्य की राह और शांति की उम्मीद
मिडिल ईस्ट में विवाद 28 फरवरी को तब बढ़ा था, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले किए थे। इसके बाद ईरान ने भी कड़ा जवाबी हमला किया था।
अप्रैल में सीजफायर के बाद शांति समझौते की बातचीत चल रही है, लेकिन बाजार अभी भी डरा हुआ है। अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं हो रहे।
निष्कर्षतः, आने वाले कुछ हफ्ते भारतीय उपभोक्ताओं के लिए काफी अहम होने वाले हैं। वैश्विक परिस्थितियों में सुधार ही पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगा सकता है।
सरकार की कोशिश है कि आम जनता पर कम से कम बोझ पड़े। लेकिन वैश्विक ऊर्जा संकट की गहराई को देखते हुए राहत की उम्मीद फिलहाल कम ही नजर आती है।
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