कोलकाता | तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों के नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी (NCPI) में कथित विलय को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए इसे भाजपा द्वारा ठुकराए जाने का नतीजा बताया है।
TMC में बगावत: TMC के 20 बागियों पर कुणाल घोष का तंज, 'BJP ने दरवाजा बंद किया'
TMC नेता ने कहा- बागी सांसद भाजपा में शामिल होना चाहते थे, लेकिन उन्हें 'किराए का घर' थमा दिया गया।
HIGHLIGHTS
- तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के एनसीपीआई में विलय की खबरें।
- टीएमसी नेता कुणाल घोष ने दावा किया कि सांसद पहले भाजपा में शामिल होना चाहते थे।
- घोष ने आरोप लगाया कि भाजपा ने बागियों को पार्टी में लेने से इनकार कर दिया।
- टीएमसी नेता ने एनसीपीआई पार्टी के वजूद और प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए।
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भाजपा ने बंद किए दरवाजे
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने दावा किया कि ये सभी सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ संपर्क में थे। वे एनडीए में शामिल होने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे।
घोष के अनुसार, इन सांसदों ने भाजपा नेताओं के घरों के चक्कर भी लगाए, लेकिन पार्टी ने उन्हें शामिल करने से साफ इनकार कर दिया।
ये मेहमान हैं जो स्वागत के लायक हैं लेकिन घर के अंदर नहीं। उन्हें किराए का घर दे दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ कई बैठकें हुईं, लेकिन जब विलय की बात आई तो भाजपा ने अपने दरवाजे बंद कर लिए।
घोष ने तंज कसते हुए कहा कि अगर भाजपा इन नेताओं को अपना मानती तो सीधे अपनी पार्टी में शामिल कर लेती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे साफ है कि उनकी कोई इज्जत नहीं बची।
NCPI के वजूद पर उठाए सवाल
कुणाल घोष ने एनसीपीआई की प्रामाणिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि यह पार्टी आखिर है क्या और इसके बारे में किसी को कोई जानकारी क्यों नहीं है।
उन्होंने कहा, "मुझे NCPI के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।"
घोष ने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि इस तथाकथित पार्टी की अब तक कोई बैठक या कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है।
उन्होंने सवाल किया, "इन सांसदों की तरफ से कौन बोल रहा था? वे तो भाजपा से बात कर रहे थे, वहां एनसीपीआई का कोई नहीं था। उन्हें पार्टी में किसने शामिल किया?"
टीएमसी नेता ने इसे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया कि इन सांसदों को पार्टी का झंडा तक नहीं दिया गया।
राजनीतिक भविष्य पर संकट
इस पूरे घटनाक्रम ने बागी सांसदों के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। वहीं, टीएमसी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस बगावत को हल्के में नहीं लेगी और पार्टी अनुशासन को सर्वोपरि रखेगी। यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
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