नई दिल्ली | देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर मचे घमासान के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है।
सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि ईंधन के दाम ₹28 तक बढ़ सकते हैं, जिससे जनता में भारी चिंता थी।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन खबरों को पूरी तरह से भ्रामक और गलत बताया है। सरकार ने कहा कि फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार, ऐसी खबरें केवल जनता के बीच डर फैलाने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं और इनमें कोई सच्चाई नहीं है।
पेट्रोल-डीजल के दाम पर सरकार का जवाब: क्या पेट्रोल-डीजल ₹28 महंगा होगा? सरकार ने दी बड़ी सफाई
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹28 की बढ़ोतरी की खबरों को सरकार ने पूरी तरह भ्रामक और गलत बताया है।
HIGHLIGHTS
- सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दामों में ₹28 की वृद्धि की खबरों को पूरी तरह खारिज किया है।
- पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी का कोई भी प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।
- कोटक की रिपोर्ट में चुनाव के बाद दाम बढ़ने का अनुमान लगाया गया था, जिसे सरकार ने भ्रामक बताया।
- सरकारी तेल कंपनियों को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारी घाटा उठाना पड़ रहा है।
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अफवाहों पर सरकार का कड़ा रुख
दरअसल, कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के बाद यह चर्चा शुरू हुई थी। इसमें चुनाव बाद दाम बढ़ने की बात कही गई थी।
उस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि कच्चा तेल $120 प्रति बैरल तक जा सकता है, जिससे तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा।
लेकिन सरकार ने साफ किया है कि भारत दुनिया का इकलौता ऐसा बड़ा देश है, जहां पिछले 4 साल में कीमतें लगभग स्थिर रही हैं।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को इससे बचाकर रखा गया है।पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹25-28 की बढ़ोतरी की खबरें पूरी तरह से निराधार हैं और मंत्रालय के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।
तेल कंपनियों का बढ़ता घाटा और वैश्विक संकट
रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है।
यह घाटा हर महीने करीब ₹27,000 करोड़ तक पहुंच गया है, क्योंकि खरीद और बिक्री की कीमतों में बड़ा अंतर आ चुका है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है।
'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जैसे प्रमुख तेल रूट के बंद होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई कम होने का डर बना हुआ है।
मार्च और अप्रैल के दौरान भारत का कच्चे तेल का आयात गिरा है, लेकिन आयात बिल में रोजाना करीब 2000 करोड़ की वृद्धि हुई है।
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आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?
अगर भविष्य में ईंधन के दाम बढ़ते हैं, तो इसका सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ता है। इससे रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं।
सब्जियां, फल और अनाज की कीमतों में उछाल आने से आम आदमी का बजट बिगड़ सकता है, इसलिए सरकार सावधानी बरत रही है।
फिलहाल दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अपने पुराने स्तर पर ही बनी हुई हैं।
सरकार का मुख्य ध्यान अंतरराष्ट्रीय बाजार की चुनौतियों के बावजूद घरेलू बाजार में महंगाई को नियंत्रित करने पर केंद्रित है।
निष्कर्ष के तौर पर, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी इजाफे की खबरें अभी केवल अटकलें हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह जनता पर बोझ डालने के पक्ष में नहीं है, हालांकि वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं।
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