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भारत

UNSC में पाकिस्तान-चीन को झटका: BLA और मजीद ब्रिगेड को वैश्विक आतंकी सूची में शामिल करने की कोशिश रुकी

बलजीत सिंह शेखावत
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efforts to include the bla and the majeed brigade in the global terrorist list have stalled

 संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान और चीन को उस समय बड़ा झटका लगा, जब अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी सहयोगी इकाई मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवादी सूची में शामिल करने के प्रस्ताव को आगे बढ़ने से रोक दिया। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र की 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति के तहत पेश किया गया था।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान और चीन ने सितंबर 2024 में संयुक्त रूप से BLA और मजीद ब्रिगेड को ब्लैकलिस्ट करने के लिए प्रस्ताव दायर किया था। हालांकि, इस महीने सुरक्षा परिषद के तीन स्थायी सदस्य अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने इस पहल पर सहमति नहीं दी, जिसके चलते प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।

पाकिस्तान ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने सुरक्षा परिषद की बैठक में दावा किया कि ISIL-K, अल-कायदा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM), BLA और मजीद ब्रिगेड जैसे संगठन अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में 60 से अधिक आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर मौजूद हैं, जो सीमा पार घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों के संचालन केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं।

परिषद को संबोधित करते हुए अहमद ने कहा, "पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त रूप से 1267 प्रतिबंध समिति के समक्ष BLA और मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी संगठन घोषित करने का अनुरोध सौंपा है। हमें उम्मीद है कि समिति जल्द ही इस पर सकारात्मक निर्णय लेगी।"

सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान की भूमिका

पाकिस्तान वर्तमान में 2025-26 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यीय समूह में एक अस्थायी सदस्य है। वहीं चीन परिषद का स्थायी सदस्य होने के साथ वीटो अधिकार भी रखता है।

इसके अलावा पाकिस्तान 2025 में UNSC की 1988 तालिबान प्रतिबंध समिति का अध्यक्ष तथा आतंकवाद-रोधी समिति का उपाध्यक्ष भी रह चुका है।

भारत-चीन के बीच पहले भी रहा है विवाद

आतंकी संगठनों को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल करने को लेकर सुरक्षा परिषद में मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। चीन कई मौकों पर भारत और उसके सहयोगी देशों द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकियों और आतंकी संगठनों को 1267 प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध करने के प्रस्तावों को रोक चुका है।

भारत ने समय-समय पर चीन के इस रुख पर चिंता भी जताई है और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई में दोहरे मानदंडों का मुद्दा उठाया है।

अमेरिका का रुख क्या है?

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका पहले ही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) को विदेशी आतंकवादी संगठन (Foreign Terrorist Organization-FTO) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (Specially Designated Global Terrorist-SDGT) घोषित कर चुका है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने मजीद ब्रिगेड को भी BLA की सहयोगी इकाई और उसके एक अन्य नाम (Alias) के रूप में अपने आतंकवादी प्रतिबंध ढांचे में शामिल किया हुआ है।

वर्ष 2019 में कई बड़े हमलों के बाद वॉशिंगटन ने BLA को SDGT घोषित किया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इसके बाद भी BLA और मजीद ब्रिगेड ने कई हमलों की जिम्मेदारी ली है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस

संयुक्त राष्ट्र स्तर पर BLA और मजीद ब्रिगेड को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित कराने की पाकिस्तान-चीन की हालिया कोशिश फिलहाल सफल नहीं हो सकी है। ऐसे में आतंकवाद के मुद्दे पर प्रमुख शक्तियों के अलग-अलग रुख और संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध प्रक्रिया को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छिड़ गई है।

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