नई दिल्ली | केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर के बाद निर्यातकों के साथ बैठक की। इस बैठक का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया गया, जिसमें निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए रणनीतियों पर चर्चा हुई।
$2 ट्रिलियन निर्यात का मिशन: भारत का $2 ट्रिलियन निर्यात लक्ष्य: पीयूष गोयल का बड़ा प्लान
2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात लक्ष्य के लिए एफटीए का लाभ उठाने पर जोर।
HIGHLIGHTS
- वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात रिकॉर्ड 860.09 अरब डॉलर के पार पहुंचा।
- वर्ष 2030 तक 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प।
- डीजीएफटी ने निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए नया सुधार प्रारूप पेश किया।
- एमएसएमई के लिए अनुपालन लागत कम करने और व्यापार सुगमता बढ़ाने का आश्वासन।
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निर्यात के रिकॉर्ड आंकड़े और भविष्य
श्री गोयल ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल माल और सेवा निर्यात रिकॉर्ड 860.09 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि पिछले वर्ष की तुलना में 4.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है, जो वैश्विक मंदी के बीच भारत की मजबूत स्थिति को दिखाती है। अभियांत्रिकी सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और कृषि आधारित उत्पादों ने निर्यात की इस गति को बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाई है। रत्न एवं आभूषण जैसे पारंपरिक क्षेत्रों ने भी वैश्विक व्यवधानों के बावजूद अपनी निर्यात क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है।
विकसित भारत @ 2030 का विजन
मंत्री ने कहा कि यह वर्तमान उपलब्धि 'विकसित भारत' की परिकल्पना के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य का आधार बनेगी। उन्होंने निर्यातकों और उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का पूरा लाभ उठाएं। इन समझौतों के माध्यम से बाजार पहुंच बढ़ाना, निर्यात को बढ़ावा देना और देश में रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना अनिवार्य है। श्री गोयल ने जोर देकर कहा कि इन अंतरराष्ट्रीय समझौतों का समय पर और प्रभावी उपयोग करना भारत की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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डीजीएफटी का नया निर्यात सुधार प्रारूप
बैठक के दौरान विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने निर्यात प्रदर्शन और वर्तमान में जारी सुधारों पर एक विस्तृत और संरचित प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति में एक व्यापक निर्यात सुधार ढांचे की रूपरेखा पेश की गई, जिसमें क्षेत्रीय निर्यात प्रदर्शन को मापने के नए मानक शामिल हैं। निर्यात प्रोत्साहन परिषदों (ईपीसी) के लिए केपीआई-आधारित ढांचा तैयार किया गया है ताकि उनके प्रदर्शन का सटीक मूल्यांकन किया जा सके। ई-कॉमर्स निर्यात को प्रोत्साहन देने और जिलों को निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
डिजिटल ट्रेड और वैश्विक चुनौतियां
सरकार ने एक प्रस्तावित डिजिटल व्यापार अकादमी की स्थापना की योजना बनाई है, जो निर्यातकों को आधुनिक व्यापारिक कौशल से लैस करेगी। पश्चिम एशिया संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों पर सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया और निर्यातकों को सुरक्षित रखने के उपायों की भी समीक्षा की गई। निर्यात दायित्व मुक्ति प्रमाणपत्र (ईओडीसी) को शीघ्र जारी करने के लिए चल रहे विशेष अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया गया है। डीजीएफटी ने कहा कि ईपीसी को बाजार विविधीकरण और प्रौद्योगिकी के अधिक उपयोग में सरकार के साथ समान भागीदार के रूप में कार्य करना चाहिए।
एमएसएमई और व्यापार सुगमता
उद्योग प्रतिनिधियों ने अनुपालन लागत, परीक्षण आवश्यकताओं और विदेशी बाजारों में प्रवेश की बाधाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को बैठक में उठाया। विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई और समाधान के रास्ते तलाशे गए। श्री पीयूष गोयल ने वर्तमान योजनाओं के अंतर्गत सहायता और प्रवेश बाधाओं को कम करने के लिए लक्षित हस्तक्षेपों का पूर्ण आश्वासन दिया। सरकार व्यापार करने में सुगमता (Ease of Doing Business) बढ़ाने के लिए निरंतर नीतिगत सुधारों और डिजिटल समाधानों पर काम कर रही है।
प्रमुख उद्योग निकायों की भागीदारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) और जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल जैसे निकायों ने भाग लिया। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) और फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (Pharmexcil) के प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव साझा किए। आईटी क्षेत्र से नैसकॉम और प्रमुख वाणिज्य मंडलों जैसे फिक्की (FICCI) और एसोचैम (ASSOCHAM) ने भी इस संवाद में सक्रिय भूमिका निभाई। कृषि, समुद्री उत्पाद, हस्तशिल्प और कपड़ा जैसे विविध क्षेत्रों की परिषदों ने भी अपनी भविष्य की योजनाओं और समस्याओं को प्रस्तुत किया।
निर्यात प्रोत्साहन मिशन की प्रगति
चर्चा के दौरान निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) के अंतर्गत हुई प्रगति की जानकारी दी गई, जो निर्यातकों के लिए एक प्रमुख योजना है। श्री गोयल ने ईपीसी को सक्रिय निर्यातकों की संख्या बढ़ाने और नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की खोज करने के लिए विशेष कदम उठाने को कहा। उन्होंने निर्यात वृद्धि को गति देने के लिए वर्तमान बाजारों में भारत की उपस्थिति को और अधिक सघन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सरकार का लक्ष्य भारत को एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भागीदार (Supply Chain Partner) के रूप में स्थापित करना है।
विकसित भारत की परिकल्पना के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 2 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हासिल करना हमारा साझा संकल्प है।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
श्री पीयूष गोयल ने सतत सुधारों और उद्योग के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से एक सुगम व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की पुष्टि की। यह बैठक भारत के वैश्विक व्यापारिक प्रभाव को बढ़ाने और घरेलू उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले वर्षों में, एफटीए का प्रभावी कार्यान्वयन और एमएसएमई का सशक्तिकरण ही भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में सहायक होगा। सरकार और उद्योग के बीच यह निरंतर संवाद भारत के निर्यात लक्ष्यों को वास्तविकता में बदलने के लिए एक ठोस रोडमैप प्रदान करता है।
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