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भारत

मेलोडी टॉफी और शेयर बाजार का खेल: पीएम मोदी ने दी मेलोडी टॉफी, शेयर बाजार में लगा अपर सर्किट

बलजीत सिंह शेखावत

पीएम मोदी और मेलोनी के वीडियो के बाद पार्ले इंडस्ट्रीज के शेयर में जबरदस्त तेजी आई है।

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HIGHLIGHTS

  • पीएम मोदी ने इटली की पीएम मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की।
  • सोशल मीडिया पर 'Melodi' ट्रेंड होने से पार्ले इंडस्ट्रीज का शेयर उछला।
  • पार्ले इंडस्ट्रीज का मेलोडी टॉफी बनाने वाली कंपनी से कोई संबंध नहीं है।
  • मेलोडी टॉफी असल में पार्ले प्रोडक्ट्स बनाती है, जो लिस्टेड नहीं है।
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मुंबई | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पीएम मोदी मेलोनी को 'मेलोडी' टॉफी गिफ्ट करते नजर आ रहे हैं। इसके बाद भारतीय शेयर बाजार में एक लिस्टेड कंपनी के शेयरों में अचानक सुनामी आ गई।

सोशल मीडिया ट्रेंड और शेयरों की उछाल

जैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 'Melodi' ट्रेंड वायरल हुआ, निवेशकों ने पार्ले इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों की अंधाधुंध खरीदारी शुरू कर दी। देखते ही देखते स्टॉक में अपर सर्किट लग गया।

रिटेल निवेशकों को लगा कि यह वही कंपनी है जो मशहूर मेलोडी टॉफी बनाती है। लेकिन शेयर बाजार की इस तेजी के पीछे एक बहुत बड़ा कन्फ्यूजन और नाम का खेल छिपा हुआ था।

हकीकत यह है कि मेलोडी कैंडी बनाने वाली असली कंपनी 'पार्ले प्रोडक्ट्स' (Parle Products) है। यह कंपनी पार्ले-जी, मोनाको और मैंगो बाइट जैसे प्रसिद्ध ब्रांड्स की मालिक है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पार्ले प्रोडक्ट्स शेयर बाजार में लिस्टेड ही नहीं है। जिस कंपनी के शेयर आज भागे, उसका टॉफी या फूड के कारोबार से कोई सीधा लेना-देना नहीं है।

क्या करती है पार्ले इंडस्ट्रीज लिमिटेड?

बीएससी पर लिस्टेड पार्ले इंडस्ट्रीज मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट डेवलपमेंट के क्षेत्र में सक्रिय है। इसके अलावा कंपनी पेपर और पेपर वेस्ट रीसाइक्लिंग का काम भी करती है।

दिलचस्प बात यह है कि कभी यह कंपनी पार्ले-बिस्लेरी ग्रुप का हिस्सा हुआ करती थी। लेकिन साल 2000 के बाद से इसका पार्ले ग्रुप या बिस्लेरी से कोई संबंध नहीं रह गया है।

बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशकों ने सिर्फ 'पार्ले' नाम देखकर पैसा लगा दिया। यह घटना बाजार में बिना रिसर्च के निवेश करने के बड़े खतरों को भी उजागर करती है।

"निवेशकों को किसी भी कंपनी के नाम के बजाय उसके बिजनेस प्रोफाइल और फंडामेंटल्स को गहराई से समझना चाहिए ताकि बाजार के भ्रम से बचा जा सके।"

इस पूरे मामले ने यह साबित कर दिया कि सोशल मीडिया का असर अब केवल मीम्स तक सीमित नहीं है। एक छोटे से वीडियो ने शेयर बाजार में बड़ी हलचल मचा दी।

हालांकि, पार्ले इंडस्ट्रीज के निवेशकों के लिए यह तेजी केवल एक इत्तेफाक साबित हुई। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि ऐसी तेजी के समय निवेशकों को बेहद सावधान रहना चाहिए।

*Edit with Google AI Studio

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