नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत के सुर तेज हो गए हैं, जिससे सियासी पारा चढ़ गया है। पार्टी के करीब 20 बागी सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इस सियासी हलचल के केंद्र में सांसद सायोनी घोष और माला रॉय हैं।
TMC में बगावत: 20 सांसद दिल्ली में, ममता की बढ़ी टेंशन
सांसद सायोनी घोष और माला रॉय दिल्ली पहुंचीं। बागी गुट लोकसभा स्पीकर से मिलकर अलग समूह की मांग करेगा।
HIGHLIGHTS
- पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद दिल्ली पहुंच गए हैं।
- सांसद सायोनी घोष ने कहा कि वह सही समय आने पर ही इस मुद्दे पर बोलेंगी।
- बागी गुट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलकर एक अलग समूह के रूप में मान्यता की मांग करेगा।
- बीजेपी नेताओं से मुलाकात के बाद सुदीप बनर्जी भी बागी गुट में शामिल हो गए हैं।
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सायोनी घोष का सस्पेंस भरा बयान
रविवार को दिल्ली पहुंचीं सांसद सायोनी घोष ने पत्रकारों के सवालों पर सस्पेंस बनाए रखा। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
मैं अभी कुछ नहीं बोलूंगी, जब सही समय आएगा, तब बोलूंगी। उस समय आपको पता चल जाएगा।
घोष ने आगे कहा कि वह केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को जवाब देंगी और उन्हें विश्वास है कि उनकी आवाज आगे तक पहुंचेगी। उनके इस बयान ने अटकलों के बाजार को और गर्म कर दिया है।
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बागी गुट की क्या है रणनीति?
सूत्रों के मुताबिक, यह बागी गुट सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करने की तैयारी में है। इससे पहले सोमवार शाम को गुट की एक अहम बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इस बैठक में स्पीकर को सौंपे जाने वाले मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा। ये सांसद संसद में एक स्वतंत्र संसदीय समूह या गुट के रूप में मान्यता के लिए औपचारिक आवेदन करने की योजना बना रहे हैं।
कैसे 20 तक पहुंची संख्या?
पहले टीएमसी के 19 सांसदों की एक सूची सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। लेकिन शनिवार को सांसद सुदीप बनर्जी के भाजपा नेताओं से मुलाकात के बाद बागी गुट में शामिल होने से यह संख्या 20 हो गई है।
इस बीच, दक्षिण कोलकाता की सांसद माला रॉय भी दिल्ली पहुंच गई हैं, जिन्होंने 8 जून को ही तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
पार्टी में संकट, असली गुट कौन?
इस बगावत से पार्टी में संकट गहरा गया है। अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी से मुलाकात कर इस संकट पर चर्चा की है। वहीं, अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दो शिकायतें भी दर्ज हुई हैं, जिससे पार्टी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब सवाल यह उठता है कि पार्टी का असली और मजबूत गुट कौनसा है और पश्चिम बंगाल की राजनीति का भविष्य क्या होगा।
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