जयपुर | राजस्थान में अब बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। राज्य विद्युत विनियामक आयोग (RERC) ने 'टाइम ऑफ यूज' (TOU) टैरिफ का नया कॉन्सेप्ट पेश किया है। इस नई व्यवस्था के तहत, आपका बिजली का बिल केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि आपने कितनी यूनिट खर्च की है। बल्कि यह इस पर भी तय होगा कि आपने बिजली का उपयोग किस समय किया है।
राजस्थान बिजली बिल बचत टिप्स: राजस्थान में अब समय के हिसाब से तय होगा बिजली का बिल, मोबाइल पर आएगा अलर्ट, जानें कैसे बचेगा पैसा
राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) बिजली बिल कम करने के लिए 'टाइम ऑफ यूज' टैरिफ कॉन्सेप्ट लाया है। इसके तहत बिजली की दरें समय के आधार पर बदलेंगी और उपभोक्ताओं को मोबाइल पर इसका अलर्ट मिलेगा।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान में बिजली बिल अब केवल खपत नहीं, बल्कि उपयोग के समय पर भी निर्भर करेगा।
- उपभोक्ताओं को मोबाइल पर 1 से 1.5 घंटे पहले बिजली सस्ती या महंगी होने का अलर्ट मिलेगा।
- सुबह और शाम के पीक समय में बिजली महंगी होगी, जबकि रात के ऑफ-पीक समय में दरें कम रहेंगी।
- इस नई व्यवस्था से सोलर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और ग्रिड पर दबाव कम होगा।
संबंधित खबरें
बिजली बिल घटाने का नया फॉर्मूला
आयोग का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली के विकल्प देना है। इस सिस्टम में दिन के अलग-अलग घंटों के लिए बिजली की दरें अलग-अलग निर्धारित की जाएंगी। सस्ती बिजली का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव करना होगा। भारी उपकरणों का उपयोग उस समय करना होगा जब मांग कम और बिजली सस्ती हो।
मोबाइल पर मिलेगा एडवांस अलर्ट
इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उपभोक्ताओं को अंधेरे में नहीं रखा जाएगा। बिजली महंगी या सस्ती होने से करीब 1 से 1.5 घंटे पहले मोबाइल पर अलर्ट भेजा जाएगा। यह अलर्ट उपभोक्ताओं को सूचित करेगा कि आगामी समय में बिजली की दरें क्या रहने वाली हैं। इससे लोग अपने घरेलू और व्यावसायिक कार्यों को सस्ती बिजली वाले स्लॉट में शिफ्ट कर सकेंगे।
संबंधित खबरें
समय के अनुसार बदलेंगी दरें
प्रस्तावित योजना के अनुसार, दिन को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा जा सकता है। सुबह 6 से 10 बजे और शाम 6 से रात 10 बजे तक 'पीक टाइम' माना जाएगा। इस पीक समय के दौरान बिजली की दरें सबसे अधिक होंगी क्योंकि इस वक्त ग्रिड पर भारी दबाव रहता है। वहीं, सुबह 10 से दोपहर 4 बजे तक का समय 'सोलर टाइम' होगा। इस समय सौर ऊर्जा की उपलब्धता अधिक रहती है, इसलिए दरें मध्यम या कम हो सकती हैं। रात 10 बजे के बाद 'ऑफ-पीक' समय शुरू होगा, जिसमें बिजली सबसे सस्ती मिलेगी।
बचत का उदाहरण: ईवी चार्जिंग
इसे एक उदाहरण से समझें। यदि आप अपना इलेक्ट्रिक वाहन (EV) शाम 7 बजे चार्ज करते हैं, तो आपको महंगी दरों पर भुगतान करना होगा। लेकिन यदि आप वही चार्जिंग रात 11 बजे के बाद करते हैं, तो आपके बिल में 10 से 20 प्रतिशत तक की सीधी बचत हो सकती है। यही नियम वाशिंग मशीन और गीजर पर भी लागू होगा।
सोलर एनर्जी और ग्रिड मैनेजमेंट
आयोग का मानना है कि इस सिस्टम से लोग सौर ऊर्जा वाले समय में अधिक बिजली उपयोग करेंगे। इससे पारंपरिक कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, पीक आवर्स में बिजली की मांग का प्रबंधन करना आसान हो जाएगा। शुरुआत में यह व्यवस्था उन उपभोक्ताओं पर लागू की जा सकती है जिनके पास स्मार्ट मीटर लगे हैं।
विशेषज्ञों की राय और वैश्विक मॉडल
पूर्व डिस्कॉम्स एमडी आर. जी. गुप्ता के अनुसार, इस कॉन्सेप्ट को पहले प्रयोग के तौर पर लागू करना चाहिए। उपभोक्ताओं की आदतों का विश्लेषण करना इसमें सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होगी। गौरतलब है कि दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इस तरह के मॉडल पर काम चल रहा है। वहीं, अमेरिका और यूरोपीय देशों में यह सिस्टम लंबे समय से सफलतापूर्वक लागू है।
ताज़ा खबरें
स्वच्छ भारत मिशन 2.0: राजकोट में रोबोट करेंगे सीवर की सफाई, स्वच्छता कर्मियों को मिली नई पहचान और सम्मान
झुंझुनूं: इंस्टाग्राम रील पर कमेंट का विवाद बना मौत का कारण, युवक के सीने में सटाकर मारी गोली, 3 गिरफ्तार
स्वच्छ भारत मिशन 2.0: गुजरात ने पेश किया स्वच्छता और सम्मान का मॉडल, रोबोटिक तकनीक से बदली सफाईकर्मियों की जिंदगी
एम्स जोधपुर में दुर्लभ अनुवांशिक रोग से जूझती महिला की सफल किडनी सर्जरी, डॉक्टरों ने बचाई जान