जयपुर | राजस्थान के न्याय के मंदिर से शनिवार को एक ऐसी मानवीय और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने राज्य के जर्जर सरकारी स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए एक दिन का वेतन देने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम न केवल आर्थिक सहायता के रूप में देखा जा रहा है बल्कि यह समाज के सक्षम वर्गों के लिए एक बड़ा संदेश भी है।
जर्जर स्कूलों के लिए जजों की बड़ी पहल: Rajasthan High Court: जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए हाईकोर्ट जजों ने दिया एक दिन का वेतन, 1 जुलाई से असुरक्षित भवनों में नहीं चलेंगी कक्षाएं
राजस्थान हाईकोर्ट ने जर्जर स्कूल भवनों की स्थिति सुधारने के लिए ऐतिहासिक पहल की है, जहां न्यायाधीशों ने अपना एक दिन का वेतन दान करने का प्रस्ताव दिया है। सरकार ने भी आश्वासन दिया है कि आगामी जुलाई सत्र से किसी भी जर्जर भवन में बच्चों की कक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए अपने एक दिन के वेतन का योगदान देने का प्रस्ताव दिया है।
- राज्य सरकार ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि 1 जुलाई से किसी भी जर्जर या असुरक्षित स्कूल भवन में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी।
- सरकार ने अगले पांच वर्षों में स्कूलों के कायाकल्प के लिए 12,335 करोड़ रुपये का विस्तृत बजट और कार्ययोजना पेश की है।
- झालावाड़ में हुई दुखद घटना के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की है।
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न्यायालय की ऐतिहासिक पहल और आर्थिक सहयोग
न्यायाधीश महेन्द्र कुमार गोयल और न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने शनिवार को स्कूल भवनों की दयनीय स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने न केवल सरकार को दिशा-निर्देश दिए बल्कि स्वयं भी इस पुनीत कार्य में भागीदारी निभाने की इच्छा जताई। जजों के इस निर्णय के बाद न्यायालय कक्ष में मौजूद अन्य कानूनी विशेषज्ञों ने भी अपनी ओर से आर्थिक सहयोग की घोषणा की। केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास ने इस नेक कार्य के लिए डेढ़ लाख रुपये की राशि देने का वादा किया।
अधिवक्ताओं का भी मिला भरपूर साथ
न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े अन्य वरिष्ठ सदस्यों ने भी इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का संकल्प लिया है। शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने भी 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ब्यूरोक्रेट्स सहित सभी वैतनिक कर्मचारियों और समाज के अन्य वर्गों से भी इस कार्य के लिए सहयोग लिया जाना चाहिए। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के भविष्य यानी बच्चों को एक सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल प्रदान करना है।
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सरकार का बड़ा आश्वासन: 1 जुलाई से बदलेगी तस्वीर
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि 1 जुलाई से प्रदेश के किसी भी जर्जर स्कूल भवन में कक्षाएं नहीं चलाई जाएंगी। सरकार ने जर्जर भवनों की पहचान करने और उनके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत बनने वाली विशेष कमेटियां अब नियमित रूप से सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगी।
सुरक्षा ऑडिट और निजी स्कूलों पर सख्ती
कोर्ट ने केवल सरकारी ही नहीं बल्कि निजी स्कूलों की सुरक्षा को लेकर भी कड़े रुख के संकेत दिए हैं। अब निजी स्कूलों से अनिवार्य रूप से सुरक्षा ऑडिट प्रमाण पत्र लिया जाएगा ताकि वहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत राज्य और जिला स्तर पर कमेटियां गठित की गई हैं जो स्कूलों की निगरानी करेंगी। इन कमेटियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे हर भवन की मजबूती की जांच करें और समय पर रिपोर्ट पेश करें।
12,335 करोड़ रुपये का मेगा प्लान
राजस्थान सरकार ने प्रदेश के स्कूलों की सूरत बदलने के लिए एक विशाल बजट की योजना तैयार की है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि अगले पांच वर्षों में 12,335 करोड़ रुपये खर्च कर जर्जर स्कूलों को नए सिरे से बनाया जाएगा। इस बजट का उपयोग न केवल निर्माण कार्य में बल्कि स्कूलों में बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने में भी होगा। केंद्र सरकार ने भी इस योजना के लिए प्रारंभिक तौर पर 409 करोड़ रुपये की राशि मंजूर कर दी है।
स्कूल गोद लेने की योजना और नामकरण
सरकार ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की है जिसके तहत कोई भी व्यक्ति या संस्था किसी स्कूल को गोद ले सकती है। यदि कोई व्यक्ति स्कूल भवन की मरम्मत कराता है या नया निर्माण कराता है तो उस भवन पर उनके द्वारा सुझाया गया नाम लिखा जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक बार लिखा गया यह नाम भविष्य में कभी भी बदला नहीं जाएगा। इस योजना का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय कमेटियों का गठन
शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक 10 सदस्यीय राज्य स्तरीय कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में वित्त सचिव, समग्र शिक्षा अभियान के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और एमएनआईटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसके अलावा यूनिसेफ के प्रतिनिधि और एनजीओ के सदस्यों को भी इसमें स्थान दिया गया है। जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है जिसमें पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।
झालावाड़ हादसे की याद ने किया भावुक
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 25 जुलाई 2025 को झालावाड़ में हुई उस दर्दनाक घटना का भी जिक्र किया जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। उस हादसे में एक स्कूल भवन के ढहने से 7 मासूम बच्चों की अकाल मृत्यु हो गई थी और कई गंभीर रूप से घायल हुए थे। इसी घटना के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की थी। कोर्ट का लक्ष्य है कि भविष्य में ऐसी किसी भी दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो।
आगामी सुनवाई और भविष्य की रूपरेखा
हाईकोर्ट ने अब इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की है। कोर्ट ने सरकार और संबंधित कमेटियों से अपेक्षा की है कि वे तब तक अपनी प्रगति रिपोर्ट और नई गाइडलाइन के सुझाव पेश करें। न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि वे स्कूलों के लिए एक ऐसी व्यापक गाइडलाइन बनाना चाहते हैं जो भविष्य के लिए एक मानक बन सके। प्रदेश की जनता और शिक्षाविदों ने हाईकोर्ट की इस सक्रियता और जजों की उदारता की जमकर सराहना की है।
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