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राजनीति

कांग्रेस का घमासान: राजस्थान पंचायत चुनाव सीताराम लांबा का अपनी पार्टी पर हमला

बलजीत सिंह शेखावत

राजस्थान पंचायत चुनाव के टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस नेता सीताराम लांबा ने विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि अगर टिकट विधायक तय करेंगे तो दफ्तरों पर ताले लगा देने चाहिए।

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HIGHLIGHTS

  • सीताराम लांबा ने पंचायत चुनाव टिकट वितरण प्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल।
  • कहा- केवल विधायक तय करेंगे टिकट तो पार्टी कार्यालयों पर लगा दें ताले।
  • जमीनी कार्यकर्ताओं और ब्लॉक कमेटियों की अनदेखी का लगाया आरोप।
  • नेताओं द्वारा रिश्तेदारों और करीबियों को तरजीह देने से बगावत का खतरा।
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पंचायत चुनाव में टिकट वितरण को लेकर उभरा असंतोष

राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों के बीच टिकट वितरण पर राजनीतिक दलों में नाराजगी सामने आ रही है।

इसी बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और राजस्थान युवा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सीताराम लांबा ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला है।

यदि जिला परिषद और पंचायत समिति के टिकटों के असली मालिक केवल वर्तमान विधायक और विधानसभा चुनाव हार चुके पूर्व प्रत्याशी ही हैं, तो फिर पार्टी संगठनों और जमीनी कार्यकर्ताओं के कार्यालयों पर ताले लगा देनी चाहिए।

संगठनात्मक व्यवस्था और गुटबाजी पर सवाल

लांबा के इस दो टूक बयान ने पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और संगठनात्मक व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं।

लंबे समय से भारतीय युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के जरिए जमीनी राजनीति करने वाले लांबा के रुख ने सियासी पारा बढ़ा दिया है।

जिम्मेदार राष्ट्रीय पदाधिकारी द्वारा सार्वजनिक मंच से गुस्सा जाहिर करने से प्रदेश नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

विधायकों और पूर्व प्रत्याशियों के एकाधिकार का विरोध

लांबा के इस बयान का सीधा इशारा टिकट वितरण में स्थानीय कमेटियों की अनदेखी की ओर है।

आरोप है कि जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही है।

पूरी टिकट प्रक्रिया कुछ खास नेताओं के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है।

कार्यकर्ताओं की अनदेखी के गंभीर मायने

  • स्थानीय जनप्रतिनिधि और पूर्व प्रत्याशी चुनावी क्षेत्र को व्यक्तिगत जागीर समझने लगे हैं।
  • संगठन के पदाधिकारियों और अनुभवी कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है।
  • नेताओं द्वारा अपने वफादारों, रिश्तेदारों और चहेतों को मैदान में उतारा जा रहा है।
  • ब्लॉक और जिला स्तर पर बनी कमेटियों का वजूद महज कागजी बनकर रह गया है।

जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटने की चेतावनी

छात्र राजनीति से निकले लांबा ने उन कार्यकर्ताओं का पक्ष रखा जो दिन-रात पार्टी के लिए झंडा उठाते हैं।

रैलियों में भीड़ जुटाने और दरी बिछाकर संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं की मेहनत दरकिनार की जा रही है।

नेताओं के वीआईपी कोटे से टिकट बांटे जाने के कारण कार्यकर्ताओं का मनोबल बुरी तरह टूट रहा है।

पार्टी में महत्व न मिलने पर कार्यकर्ता प्रचार से दूरी बना रहे हैं या निर्दलीय मैदान में उतर रहे हैं।

इस अंदरूनी कलह और बगावत का सीधा नुकसान आने वाले चुनावों में पार्टी को उठाना पड़ सकता है।

*Edit with Google AI Studio

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