जयपुर | राजस्थान के आम नागरिकों के लिए महंगाई एक बहुत बड़ी और असहनीय चुनौती बन गई है। विशेष रूप से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही लगातार वृद्धि ने हर किसी का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले कुछ दिनों में तेल की कीमतों में जो उबाल देखा गया है, उसने जनता को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
राजस्थान में पेट्रोल-डीजल सस्ता?: राजस्थान में ₹15 सस्ता होगा पेट्रोल? जानें नया फॉर्मूला
टैक्स में 30% कटौती से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आ सकती है भारी गिरावट।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान में पिछले 11 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में चार बार भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, टैक्स में 30% की कटौती से ईंधन के दाम ₹15 प्रति लीटर तक कम हो सकते हैं।
- जयपुर में पेट्रोल ₹112.66 और डीजल ₹97.78 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे जनता परेशान है।
- ईंधन की कुल कीमत का लगभग 35 से 50 फीसदी हिस्सा केवल केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स में जाता है।
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महंगाई का नया प्रहार: 11 दिनों की पूरी कहानी
राजस्थान में पिछले 11 दिनों का रिकॉर्ड उठाकर देखें तो यह बहुत डराने वाला है।
इन 11 दिनों के भीतर ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार बड़ी वृद्धि की गई है।
सोमवार को तेल कंपनियों ने एक बार फिर आम जनता की कमर तोड़ दी है।
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पेट्रोल में प्रति लीटर 2.61 रुपए और डीजल में 2.71 रुपए की भारी बढ़ोतरी की गई है।
इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी जयपुर में पेट्रोल 112.66 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
वहीं डीजल की कीमत भी 97.78 रुपए प्रति लीटर के खौफनाक स्तर पर पहुंच चुकी है।
जनता अब त्राहि-त्राहि कर रही है क्योंकि परिवहन की लागत सीधे तौर पर बढ़ गई है।
11 दिनों के भीतर पेट्रोल कुल 7.50 रुपए और डीजल करीब 8 रुपए महंगा हो गया है।
कब और कितनी बढ़ी कीमतें?
अगर हम तारीखवार आंकड़ों को देखें तो स्थिति की गंभीरता साफ समझ आती है।
25 मई को सबसे बड़ा झटका लगा जब पेट्रोल ₹2.82 और डीजल ₹2.73 महंगा हुआ।
इससे पहले 23 मई को भी कीमतों में करीब 90 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी।
19 मई को भी तेल कंपनियों ने दाम बढ़ाकर जनता को तगड़ा झटका दिया था।
15 मई को मार्च 2024 के बाद की सबसे बड़ी एकमुश्त बढ़ोतरी देखी गई थी।
इन झटकों ने मध्यम वर्ग के परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह से बिगाड़ दिया है।
लोग अब अपनी निजी गाड़ियों की जगह सार्वजनिक परिवहन की तलाश कर रहे हैं।
लेकिन सार्वजनिक परिवहन भी ईंधन महंगा होने के कारण महंगा होता जा रहा है।
क्या है वो ₹15 वाला जादुई फॉर्मूला?
इस भीषण महंगाई के बीच आर्थिक विशेषज्ञों ने एक बहुत ही राहतकारी फॉर्मूला पेश किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की महंगाई का असली कारण कच्चा तेल नहीं है।
भारत में बिकने वाले ईंधन की कीमत में सबसे बड़ा हिस्सा सरकारी टैक्स का होता है।
यदि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर टैक्स में 30 फीसदी की कटौती कर दें, तो बड़ी राहत मिलेगी।
इस कटौती से पेट्रोल और डीजल के दाम सीधे 14 से 15 रुपए प्रति लीटर कम हो सकते हैं।
वर्तमान में पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स का बोझ 35 से 50 फीसदी तक है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि टैक्स कम करने से खपत बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
लेकिन सरकारें अपने राजस्व घाटे को भरने के लिए टैक्स कम करने से कतरा रही हैं।
टैक्स का गणित और विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों ने गणना करके बताया है कि टैक्स स्लैब को नीचे लाना कितना जरूरी है।
अभी केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कई तरह के सेस और वैट वसूलती हैं।
यदि इन ऊंचे टैक्स स्लैब को तर्कसंगत बनाया जाए, तो कीमतें तुरंत धड़ाम से गिरेंगी।
बड़े शहरों में जो 20 रुपए का अतिरिक्त बोझ है, वह राहत में बदल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाना भी एक स्थाई समाधान हो सकता है।
लेकिन इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच राजनीतिक सहमति का होना अनिवार्य है।
"यदि सरकारें टैक्स के ढांचे में सुधार करें, तो महंगाई को नियंत्रित करना संभव है।" - आर्थिक विशेषज्ञ
आपकी जेब से सरकार की तिजोरी तक का सफर
आम आदमी को अक्सर यह लगता है कि पूरी कीमत तेल कंपनियों के पास जाती है।
लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है और काफी चौंकाने वाली भी है।
अगर पेट्रोल 102 रुपए लीटर बिकता है, तो उसकी मूल लागत महज 56 रुपए होती है।
इस 56 रुपए के तेल पर केंद्र सरकार करीब 22 रुपए की एक्साइज ड्यूटी लगाती है।
इसके बाद राज्य सरकारें अपना वैट और सेस लगाकर इसे और महंगा कर देती हैं।
राजस्थान में वैट की दरें देश के अन्य राज्यों के मुकाबले काफी ऊंची हैं।
यही कारण है कि जयपुर में पेट्रोल की कीमतें दिल्ली से काफी ज्यादा रहती हैं।
पेट्रोल पंप डीलर को इस पूरे खेल में महज 4 रुपए का कमीशन मिलता है।
बेस प्राइस बनाम टैक्स का बोझ
56 रुपए का तेल आपकी टंकी तक पहुंचते-पहुंचते 112 रुपए का कैसे हो जाता है?
यह सवाल हर वाहन चालक के मन में बार-बार उठता रहता है।
इसका जवाब सीधा है - सरकार का भारी-भरकम टैक्स और उपकर।
तेल कंपनियां अपने पिछले घाटे की भरपाई के लिए भी कीमतें बढ़ा रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरने पर भी भारत में राहत नहीं मिलती।
इसका कारण यह है कि सरकारें उस समय टैक्स बढ़ाकर अपना राजस्व सुरक्षित कर लेती हैं।
जनता को कच्चे तेल की गिरावट का लाभ कभी भी पूरी तरह नहीं मिल पाता।
अन्य शहरों का हाल और भविष्य की चिंता
सिर्फ जयपुर ही नहीं, बल्कि देश के अन्य बड़े शहरों में भी स्थिति चिंताजनक है।
मुंबई में पेट्रोल 111 रुपए और चेन्नई में 113 रुपए के पार निकल चुका है।
बेंगलुरु और पटना जैसे शहरों में भी ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं।
ईंधन महंगा होने का मतलब है कि अब हर चीज महंगी होने वाली है।
माल ढुलाई महंगी होने से फल, सब्जियां और दूध के दाम भी बढ़ेंगे।
इससे आम आदमी की रसोई पर सीधा और बहुत गहरा प्रहार होगा।
छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए रोजाना का सफर अब एक बड़ी चुनौती है।
लोग अब हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख करने पर मजबूर हो रहे हैं।
क्या मिलेगी राजस्थान को मुक्ति?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों का यह अनियंत्रित बढ़ना चिंता का विषय है।
भजनलाल सरकार और केंद्र की मोदी सरकार को इस पर गंभीरता से सोचना होगा।
एक्सपर्ट्स के 30 फीसदी टैक्स कटौती के फॉर्मूले को लागू करना अब समय की मांग है।
जब तक टैक्स की दरों को कम नहीं किया जाएगा, तब तक राहत मिलना मुश्किल है।
आम जनता उम्मीद कर रही है कि सरकारें जल्द ही कोई ठोस कदम उठाएंगी।
महंगाई के इस दौर में एक छोटी सी राहत भी जनता के लिए बहुत बड़ी होगी।
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