जयपुर | राजस्थान की राजनीति में इन दिनों बयानों के तीखे तीर चल रहे हैं, जिसमें सचिन पायलट केंद्र बिंदु बने हुए हैं। भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गया है, जिससे सियासी पारा काफी चढ़ गया है।
पायलट पर मदन राठौड़ का पलटवार: राजस्थान राजनीति: सचिन पायलट को 'बच्चा' समझते हैं गहलोत- मदन राठौड़
मदन राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत आज भी सचिन पायलट को बच्चा समझते हैं, जो उनका अपमान है।
HIGHLIGHTS
- मदन राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत का बयान सचिन पायलट का अपमान है और वे उन्हें बच्चा समझते हैं।
- भाजपा ने 'बहुरूपिया' शब्द को नकारात्मक मानने से इनकार किया है और इसे व्यक्तित्व का हिस्सा बताया।
- राधा मोहन दास अग्रवाल ने पायलट को 'बाहरी' और 'अस्थिर' बताते हुए टोंक में तीखा हमला किया था।
- अशोक गहलोत ने दावा किया कि पायलट अब कांग्रेस में पूरी तरह समर्पित हैं और पुरानी गलतियां सुधार ली हैं।
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गहलोत के 'बच्चा' वाले नजरिए पर राठौड़ का हमला
जयपुर में मीडिया से बात करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तीखा हमला बोला। राठौड़ ने कहा कि गहलोत आज भी सचिन पायलट को एक बच्चा समझते हैं, जबकि पायलट राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि गहलोत का यह कहना कि 'पायलट के दोनों पैर कांग्रेस में हैं', दरअसल पायलट की परिपक्वता पर सवाल उठाता है। राठौड़ के अनुसार, गहलोत यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि पायलट ने अतीत में गलतियां की थीं और अब वे सुधर गए हैं। यह बयान सीधे तौर पर पायलट के राजनीतिक कद को कम करने की कोशिश है, जो लंबे समय से बड़े पदों पर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के भीतर की यह खींचतान अब खुलकर जनता के सामने आ रही है और यह अपमानजनक है। पायलट के राजनीतिक भविष्य को लेकर गहलोत की टिप्पणी ने भाजपा को कांग्रेस पर तंज कसने का एक नया मौका दे दिया है। राठौड़ ने कहा कि पायलट जैसे नेता को इस तरह से आंकना कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी और अविश्वास को दर्शाता है।
'बहुरूपिया' शब्द का अर्थ और भाजपा का बचाव
भाजपा प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल द्वारा पायलट को 'बहुरूपिया' कहे जाने पर मदन राठौड़ ने बचाव की मुद्रा अपनाई। उन्होंने कहा कि 'बहुरूपिया' शब्द का इस्तेमाल किसी नकारात्मक भावना के साथ नहीं किया गया था, बल्कि यह व्यक्तित्व का चित्रण था। राठौड़ ने समझाया कि सचिन पायलट का व्यक्तित्व बहुआयामी है, जहां वे कभी बेहद सौम्य दिखते हैं तो कभी रौद्र रूप धारण करते हैं। उन्होंने पायलट के पिता राजेश पायलट के साथ हुए व्यवहार के समय के उनके कड़े रुख का उदाहरण देते हुए इसे स्पष्ट किया। भाजपा का मानना है कि एक राजनेता को समय और परिस्थिति के अनुसार अपने अलग-अलग रूप दिखाने पड़ते हैं, इसलिए यह अपमान नहीं है। हालांकि, कांग्रेस इस स्पष्टीकरण को स्वीकार करने के मूड में नहीं है और इसे भाजपा की 'ओछी राजनीति' करार दे रही है। राठौड़ ने यह भी कहा कि अग्रवाल के शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके। भाजपा के अनुसार, बहुरूपिया शब्द एक कलात्मक संदर्भ भी हो सकता है जो व्यक्तित्व की विविधताओं को दर्शाता है।
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बाहरी बनाम स्थानीय का पुराना विवाद
राधा मोहन दास अग्रवाल ने पायलट को 'बाहरी' बताते हुए टोंक की जनता की अवमानना का मुद्दा भी उठाया था। इस पर राठौड़ ने कहा कि राजनीति में अनुभव और प्रशिक्षण ही किसी व्यक्ति को 'आंतरिक' या 'अपना' बनाता है। अग्रवाल ने पहले कहा था कि वे खुद उत्तर प्रदेश से हैं, लेकिन कभी राजस्थान से चुनाव लड़ने का सपना नहीं देखेंगे। उन्होंने पायलट की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनकी एक टांग हमेशा पार्टी से बाहर रहने की कोशिश में रहती है। भाजपा का दावा है कि टोंक की जनता अब बाहरी प्रत्याशियों के बजाय स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देने का मन बना चुकी है। आगामी चुनावों में भाजपा इसी रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है ताकि कांग्रेस को घेरा जा सके। इस 'बाहरी' टैग ने टोंक के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच भी एक नई बहस छेड़ दी है, जो लंबे समय से स्थानीय नेतृत्व की मांग कर रहे हैं। भाजपा इस मुद्दे को भुनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है ताकि पायलट की घेराबंदी की जा सके।
गहलोत का बचाव और 2021 की बगावत का साया
अशोक गहलोत ने भाजपा के इन हमलों का जवाब देते हुए पायलट का बचाव किया और उन्हें कांग्रेस का अभिन्न अंग बताया। गहलोत ने कहा कि 2021 के मानेसर कांड जैसी घटनाओं से पायलट ने बहुत कुछ सीखा है और अब वे कहीं नहीं जाएंगे। पायलट को अब अपनी पुरानी गलतियों के परिणामों का एहसास हो गया है, और वे मजबूती से पार्टी के साथ खड़े हैं।
गहलोत ने भाजपा पर साजिश रचने का आरोप लगाया और कहा कि विधायकों को मोहरे की तरह इस्तेमाल करना भाजपा की पुरानी आदत है। उन्होंने विश्वास जताया कि पायलट और पूरी कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर भाजपा की विभाजनकारी नीतियों का मुकाबला करेगी। हालांकि, गहलोत के इस बयान में भी एक छिपा हुआ संदेश था कि पायलट ने अतीत में 'गलती' की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का यह 'बचाव' भी पायलट के लिए एक तरह की चेतावनी या याद दिलाने जैसा ही है।
डोटासरा की कड़ी आपत्ति और माफी की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा प्रभारी के बयानों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और इसे मर्यादा का उल्लंघन बताया। डोटासरा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि व्यक्तिगत वैमनस्य और अपमानजनक टिप्पणियां भाजपा की गिरती सियासी संस्कृति का परिचायक हैं। उन्होंने भाजपा से मांग की कि राधा मोहन दास अग्रवाल को अपने शब्दों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। डोटासरा ने कहा कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर की गई ऐसी टिप्पणियां राजस्थान की जनता स्वीकार नहीं करेगी। कांग्रेस का तर्क है कि भाजपा विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बयानबाजी का सहारा ले रही है। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और भाजपा के 'दुष्प्रचार' का मुंहतोड़ जवाब देने का आह्वान किया है। डोटासरा ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के भीतर कोई मतभेद नहीं है और सभी नेता मिलकर राज्य के हितों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा को अपने घर की कलह सुलझाने की सलाह दी और पायलट के अपमान को राजस्थान का अपमान बताया।
निष्कर्ष: राजस्थान में गहराता सियासी संकट
राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट को लेकर शुरू हुआ यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। दोनों दलों के बीच की यह जुबानी जंग जनता के बीच उनकी छवि और आने वाले चुनावों के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। अंततः, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा इस 'बाहरी' कार्ड के जरिए पायलट के प्रभाव को कम कर पाती है। वहीं कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि वह अपने शीर्ष नेताओं के बीच के पुराने मतभेदों को पूरी तरह से खत्म कर जनता के सामने एकजुट दिखे।
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