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राजस्थान राज्यसभा: बीजेपी के दावेदार: राजस्थान राज्यसभा चुनाव: पूनिया-राठौड़ समेत इन नामों पर चर्चा

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राजस्थान राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी के संभावित उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं, जिसमें दिग्गजों की साख दांव पर है।

HIGHLIGHTS

  • राजस्थान में अगले महीने खाली हो रही तीन राज्यसभा सीटों के लिए बीजेपी में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया तेज हो गई है।
  • बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में सतीश पूनिया, राजेंद्र राठौड़ और अलका गुर्जर के नामों पर गंभीरता से मंथन किया गया है।
  • जातिगत समीकरणों को साधने के लिए पार्टी इस बार 'मूल ओबीसी' कार्ड खेल सकती है, जिसमें प्रभुलाल सैनी का नाम आगे है।
  • उदयपुर संभाग से सामान्य वर्ग के नेता को राज्यसभा भेजने की चर्चा है, जिसमें प्रमोद सामर एक प्रमुख दावेदार बनकर उभरे हैं।
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जयपुर | राजस्थान की राजनीति में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश में अगले महीने राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं, जिन पर नए चेहरों को भेजने की तैयारी है।

आंकड़ों के गणित को देखें तो इन तीन में से दो सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की जीत तय मानी जा रही है। वहीं एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की पूरी संभावना है।

बीजेपी अब केवल दो सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की रणनीति बना रही है। इसके लिए जयपुर में प्रदेश कोर कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी।

कोर कमेटी में नामों पर गहन मंथन

16 मई को हुई इस बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों की सूची तैयार की गई। बैठक में प्रदेश के राजनीतिक हालात और आगामी चुनावों को लेकर चर्चा की गई।

कोर कमेटी के सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अधिकृत किया है। वे अब उम्मीदवारों का फाइनल पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजेंगे।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बार जातिगत समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। एक सीट पर मूल ओबीसी प्रत्याशी को मौका मिल सकता है।

दिग्गजों की वापसी की उम्मीद

इस पैनल में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जा रहा है। दोनों नेता विधानसभा चुनाव में हार गए थे।

सतीश पूनिया को फिलहाल हरियाणा का प्रदेश प्रभारी बनाकर संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं राजेंद्र राठौड़ के पास वर्तमान में कोई बड़ा पद या जिम्मेदारी नहीं है।

इन दोनों नेताओं को लोकसभा चुनाव में भी टिकट नहीं मिला था। ऐसे में कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि पार्टी इन्हें राज्यसभा भेजकर सम्मानित कर सकती है।

महिला प्रतिनिधित्व और अलका गुर्जर

बीजेपी की राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर का नाम भी पैनल में शामिल है। पार्टी के मौजूदा राज्यसभा सांसदों में राजस्थान से कोई भी महिला चेहरा शामिल नहीं है।

अलका गुर्जर पूर्वी राजस्थान से आती हैं और गुर्जर समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ है। जातिगत और जेंडर समीकरण के लिहाज से उनका पलड़ा काफी भारी नजर आता है।

विधानसभा चुनाव के दौरान भी अलका गुर्जर को टिकट देने की चर्चा थी। हालांकि, उस समय उन्हें मौका नहीं मिला था, लेकिन अब उनकी उम्मीदें बढ़ गई हैं।

"राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों का चयन पार्टी की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतिम फैसला केंद्रीय संसदीय बोर्ड द्वारा ही लिया जाएगा जो प्रदेश के हित में होगा।"

उदयपुर और आदिवासी अंचल की रणनीति

पार्टी इस बार आदिवासी अंचल यानी उदयपुर संभाग से किसी सामान्य वर्ग के नेता को राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है। यह एक बड़ा रणनीतिक कदम हो सकता है।

उदयपुर जिले में अधिकांश राजनीतिक पद आरक्षित श्रेणी में आते हैं। लंबे समय से यहां के सामान्य वर्ग के कार्यकर्ताओं को बड़ा प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।

इस रेस में प्रमोद सामर का नाम तेजी से उभर रहा है। सामर प्रदेश टीम में मंत्री रहे हैं और सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक के रूप में सक्रिय हैं।

मूल ओबीसी और अन्य दावेदार

मूल ओबीसी कोटे से पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी का नाम भी चर्चा में है। सैनी वसुंधरा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और संगठन में भी काफी सक्रिय रहे हैं।

इसके साथ ही उद्योगपति और समाजसेवी नरसी कुलरिया के नाम की भी सुगबुगाहट है। कुलरिया की कंपनी ने नए संसद भवन के इंटीरियर का काम किया था।

नरसी कुलरिया को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भी समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। हालांकि, कोर कमेटी की औपचारिक चर्चा में उनका नाम अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।

निष्कर्ष और भविष्य की राह

राजस्थान से राज्यसभा के इन उम्मीदवारों का चयन आगामी निकाय चुनावों और उपचुनावों को भी प्रभावित करेगा। बीजेपी का लक्ष्य सभी वर्गों को साधने का है।

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को फिर से राजस्थान से ही राज्यसभा भेजे जाने की भी चर्चा है। हालांकि, इस पर अंतिम मुहर दिल्ली में ही लगेगी।

अब सबकी नजरें दिल्ली पर टिकी हैं, जहां बीजेपी आलाकमान इन नामों पर अंतिम फैसला लेगा। यह चुनाव राजस्थान बीजेपी के भीतर शक्ति संतुलन को भी तय करेगा।

*Edit with Google AI Studio

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