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राजस्थान

कलेक्टर को ज्ञापन: राजस्थान सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान ने RGHS के आदेशों में बदलाव और दरिंदगी की शिकार महिला पुलिसकर्मी के लिए मांगा न्याय

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राजस्थान सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान की ओर से सोमवार को अपनी मांगों को लेकर जयपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। 

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HIGHLIGHTS

  • राजस्थान सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान की ओर से सोमवार को अपनी मांगों को लेकर जयपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। 
rajasthan retired police welfare institute submitted memorandum to jaipur collector regarding demands

जयपुर । राजस्थान सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान की ओर से सोमवार को अपनी मांगों को लेकर जयपुर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। 

इस मौके पर चित्तौडगढ़ अध्यक्ष लालसिंह भाटी, ओम प्रकाश उपाध्याय प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष उदयपुर संभाग के साथ-साथ फैज मोहम्मद सैकेट्री चित्तौडगढ़ के मार्गदर्शन में कई सेवा निवृत्त अधिकारी और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किए।

जिनमें सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को देय आरजीएचएस की सुविधाओं में की गई कटौती के आदेशों को वापस लेने की मांग रखी गई। 

इसको लेकर कलेक्टर को राष्ट्रपति व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। 

ज्ञापन में कहा गया कि राजस्थान सरकार की RGHS योजना सभी सेवा निवृत्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए कष्टदायक बन गई है। 

सीनियर सिटीजन सेवा निवृत्त कर्मचारियों-अधिकारियों को अधिकतर जिन दवाइयां की ज्यादा आवश्यकता होती है उन दवाओं में हाल ही में राजस्थान सरकार द्वारा कटौती किए जाने के अन्यायपूर्ण आदेश को वापस लिए जाए।

प्रतिदिन 1000 से अधिक मूल्य की दवाइयां न दिए जाने के सरकार द्वारा किए गए आदेश अव्यवहारिक हैं जिन पर पुनः विचार किया जाकर आदेश वापस लिए जावे।

इसी के साथ कोई भी मरीज 5 दिन तक ही इस योजना के अंतर्गत इलाज करवाने एवं उसके बाद स्वयं के खर्चे पर इलाज करवाने की जो अन्याय पूर्ण शर्तें हैं जिनकों वापस लिया जाए।

ताकि इस प्रकार के आदेशों से वृद्धजनों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

ट्रेन में दरिंदगी की शिकार महिला पुलिसकर्मी के लिए न्याय की मांग

दूसरा ज्ञापन जिनमें 30-31 अगस्त 2003 की रात्रि में सरयू एक्सप्रेस ट्रेन में कर्तव्य निर्वहन कर रही सुलतानपुर में तैनात महिला पुलिसकर्मी के साथ ट्रेन में दरिंदगी के अभियुक्तों की शीघ्र गिरफ्तारी कर न्याय दिलवाने। फास्ट ट्रैक कोर्ट मे सुनवाई कर 60 दिन में निर्णय की मांग रखी गई।

ताकि कर्तव्य निर्वहन करते वक्त कोई इस प्रकार का जघन्य अपराध नहीं कर सके। 

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