जयपुर। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने कथित फर्जी MBBS डिग्रियों, मेडिकल डिप्लोमा और जाली दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीयन कराने वाले गिरोह का खुलासा किया है। मामले में SOG ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 7 अन्य लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की गई है।
फर्जी MBBS गिरोह का खुलासा, 2 गिरफ्तार: SOG का दावा—8वीं पास आरोपी फर्जी MBBS डिग्री से बना डॉक्टर, अस्पताल खरीदकर करने लगा ऑपरेशन
राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने फर्जी MBBS डिग्री और मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीयन कराने वाले कथित गिरोह का खुलासा किया है। सीकर निवासी पंकज यादव और जालोर निवासी नानजी राम चौधरी को गिरफ्तार किया गया है। SOG के अनुसार, नानजी राम केवल 8वीं पास है और कथित फर्जी डिग्रियों के आधार पर अस्पताल संचालित कर ऑपरेशन में शामिल हो रहा था। मामले में 7 अन्य लोगों के खिलाफ भी नामजद FIR दर्ज है।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान SOG ने फर्जी मेडिकल डिग्री मामले में 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया।SOG का दावा—नानजी राम चौधरी केवल 8वीं पास है।जिस अस्पताल में पर्चियां काटता था, बाद में उसी को खरीदकर संचालन शुरू किया।फर्जी MBBS और DGO दस्तावेजों से RMC पंजीयन कराने का आरोप।दूसरा आरोपी FMGE में 6 बार असफल होने के बाद फर्जी दस्तावेजों से पंजीकृत हुआ।मामले में 7 अन्य लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की गई है।RMC के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच जारी है।
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अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक SOG विशाल बंसल के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सीकर निवासी पंकज यादव (30) और जालोर निवासी नानजी राम चौधरी (45) के रूप में हुई है। पंकज यादव को हरियाणा के कैथल और नानजी राम चौधरी को जालोर जिले के रानीवाड़ा से पकड़ा गया।
8वीं पास आरोपी के डॉक्टर बनने का दावा
SOG की प्रारंभिक जांच में दावा किया गया है कि नानजी राम चौधरी केवल 8वीं कक्षा तक पढ़ा है। वह वर्ष 2010 से 2014 के बीच रानीवाड़ा के एक अस्पताल में OPD काउंटर पर मरीजों की पर्चियां काटने का काम करता था। इसके बाद उसने कुछ समय तक कपड़े की दुकान पर भी काम किया।
जांच एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2015-16 में नानजी राम ने उसी अस्पताल को खरीद लिया, जहां वह पहले काम करता था। बाद में अस्पताल का नाम बदलकर भास्कर हॉस्पिटल कर दिया गया। अस्पताल को कथित रूप से 100 बेड की सुविधा के रूप में विकसित किया गया और नानजी राम डॉक्टरों की टीम के साथ मरीजों के ऑपरेशन में भी शामिल होने लगा।
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कानपुर और मुंबई से फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने का आरोप
SOG का आरोप है कि नानजी राम ने आंध्र प्रदेश बोर्ड के नाम से 10वीं और 12वीं कक्षा के प्रमाणपत्र, रामा यूनिवर्सिटी कानपुर के नाम से MBBS की डिग्री और मुंबई के एक कॉलेज के नाम से DGO यानी डिप्लोमा इन गायनेकोलॉजी एंड ऑब्सटेट्रिक्स के दस्तावेज तैयार करवाए।
इन दस्तावेजों के आधार पर उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में डॉक्टर के रूप में पंजीयन प्राप्त किया। SOG के अनुसार, मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन कर्मचारियों और पदाधिकारियों से कथित सांठगांठ की आशंका की भी जांच की जा रही है।
संबंधित संस्थानों से सत्यापन कराने पर नानजी राम के DGO डिप्लोमा, अलॉटमेंट लेटर, पासिंग सर्टिफिकेट और अटेम्प्ट सर्टिफिकेट कथित रूप से फर्जी पाए गए। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन दस्तावेजों को किसने और कहां तैयार किया था।
अस्पताल संचालन और ऑपरेशन की भी जांच
SOG यह जांच कर रही है कि नानजी राम ने कथित फर्जी डिग्रियों और पंजीयन के आधार पर कितने समय तक चिकित्सा सेवाएं दीं और वह किन-किन ऑपरेशन में शामिल रहा। अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों, मरीजों से जुड़े रिकॉर्ड और उपचार संबंधी दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अस्पताल के संचालन के लिए आवश्यक अनुमति और चिकित्सा संबंधी दूसरे प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी किए गए।
FMGE में 6 बार असफल होने का आरोप
दूसरे गिरफ्तार आरोपी पंकज यादव के संबंध में SOG ने बताया कि उसने वर्ष 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान से चिकित्सा की पढ़ाई की थी। विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके लौटने वाले अभ्यर्थियों को भारत में चिकित्सा अभ्यास के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन यानी FMGE उत्तीर्ण करना जरूरी होता है।
SOG के अनुसार, पंकज यादव FMGE में लगातार 6 बार असफल रहा। इसके बाद उसने कथित रूप से बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज की फर्जी MBBS डिग्री और मार्कशीट तैयार करवाई। बिहार मेडिकल काउंसिल का फर्जी पंजीयन भी तैयार करवाने का आरोप है।
इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पंकज ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन हासिल किया। बिहार मेडिकल काउंसिल और संबंधित मेडिकल कॉलेज से सत्यापन कराने पर उसका पंजीयन दर्ज नहीं मिला तथा MBBS डिग्री और मार्कशीट को फर्जी बताया गया।
7 अन्य लोगों के खिलाफ नामजद FIR
SOG ने इस मामले में शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेन्द्र नेहरा, गीता कुमारी, महेश कुमार गुर्जर, सरीमूल मजूमदार और राम किशोर महावर के खिलाफ भी नामजद FIR दर्ज की है। इन लोगों की कथित भूमिका की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी डिग्रियां और मेडिकल दस्तावेज उपलब्ध कराने वाला नेटवर्क किस प्रकार काम कर रहा था तथा इसके जरिए कितने लोगों ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन हासिल किया।
अशोक नगर थाने में दर्ज हुई थी FIR
राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरिधारी गोपाल ने 14 अक्टूबर 2026 को जयपुर के अशोक नगर पुलिस थाने में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकृत डॉक्टरों के संबंध में FIR दर्ज कराई थी। बाद में प्रकरण की जांच SOG को सौंप दी गई।
राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने जांच के दायरे में आए सभी कथित फर्जी पंजीयन निरस्त कर दिए हैं। इसके साथ ही उस समय परिषद में कार्यरत पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिनके कार्यकाल में इन दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन जारी हुए थे।
फर्जी दस्तावेज नेटवर्क की तलाश
SOG अब कथित फर्जी MBBS डिग्री, मार्कशीट, डिप्लोमा, अलॉटमेंट लेटर और मेडिकल काउंसिल पंजीयन तैयार करने वाले पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। संबंधित विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों और मेडिकल काउंसिल से दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है।
जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि आरोपियों ने डॉक्टर के रूप में काम करते हुए कितने मरीजों का उपचार किया और उनके कथित चिकित्सा अभ्यास से किसी मरीज को नुकसान पहुंचा या नहीं।
नोट: समाचार में वर्णित आरोप SOG की जांच और पुलिस की ओर से दी गई जानकारी पर आधारित हैं। आरोपियों की भूमिका और दस्तावेजों की वास्तविकता न्यायिक प्रक्रिया में प्रमाणित होना बाकी है। अदालत में आरोप सिद्ध होने तक संबंधित व्यक्तियों को दोषी नहीं माना जा सकता।