जयपुर | अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासंघ ने 8 जून से प्रदेशव्यापी 'कर्मचारी जागृति यात्रा' का शुभारंभ किया है, जिसका जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में श्री गणेश किया गया।
सरकार के खिलाफ कर्मचारियों का हल्ला बोल: राजस्थान: सरकार के खिलाफ कर्मचारियों की यात्रा, निजीकरण का विरोध
महासंघ ने 25 सूत्री मांगों और RGHS के निजीकरण के विरोध में 8 जून से प्रदेशव्यापी यात्रा शुरू की।
HIGHLIGHTS
- महासंघ (एकीकृत) ने 8 जून से कर्मचारी जागृति यात्रा शुरू की है।
- यात्रा का मुख्य उद्देश्य सरकार की नीतियों और RGHS के निजीकरण का विरोध करना है।
- कर्मचारियों की 25 सूत्री लंबित मांगों को पूरा करने का दबाव बनाया जाएगा।
- यह यात्रा प्रदेश के सभी प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी।
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कर्मचारी जागृति यात्रा का उद्देश्य और प्रमुख मांगें
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में यह यात्रा राज्य सरकार की कथित कर्मचारी विरोधी नीतियों का विरोध करने के लिए आयोजित की जा रही है।
राठौड़ ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के आत्म सम्मान और हितों की रक्षा करने में विफल रही है।
RGHS के निजीकरण पर आक्रोश
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कर्मचारियों में सबसे बड़ा आक्रोश राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में सुधार करने के बजाय उसके निजीकरण की तैयारी को लेकर है।
महासंघ ने इसे कर्मचारियों के स्वास्थ्य लाभों पर सीधा हमला बताया है और इस कदम का पुरजोर विरोध करने का संकल्प लिया है।
राज्य सरकार ने अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में कर्मचारियों के लिए कुछ नहीं किया है। चिंताजनक बात यह है कि राज्य सरकार अब वर्षों से चली आ रही राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में सुधार करने के बजाय उसके निजीकरण की तैयारी में है।
25 सूत्री मांगों पर सरकार की अनदेखी
राठौड़ ने बताया कि सरकार के साथ संवादहीनता के कारण कर्मचारियों की 25 सूत्री न्यायोचित मांगें लंबे समय से लंबित हैं।
इन मांगों में चयनित वेतनमान को 8, 16, 24 और 32 वर्ष की सेवा पर देने की मांग प्रमुख है।
इसके अलावा, मंत्रालयिक कर्मचारियों को द्वितीय पदोन्नति पर ग्रेड पे 4200 देने और संविदा व ठेका कर्मियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग है।
अन्य मांगों में वेतन विसंगतियों का निराकरण और बजट घोषणा के अनुसार लंबित पदोन्नतियों के लिए अनुभव में 2 वर्ष की छूट देना शामिल है।
यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम
यह जागृति यात्रा पूरे प्रदेश को कवर करेगी और विभिन्न चरणों में आयोजित की जाएगी।
यात्रा 8 जून को दौसा, अलवर और भरतपुर से शुरू होगी। इसके बाद 9 जून को धौलपुर, करौली और सवाई माधोपुर पहुंचेगी।
10 और 11 जून को यह यात्रा टोंक, बूंदी, कोटा, बारां और झालावाड़ जिलों में कर्मचारियों को जागरूक करेगी।
12 से 14 जून के बीच यात्रा भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, राजसमंद, ब्यावर और अजमेर पहुंचेगी।
एक छोटे अंतराल के बाद, 17 जून को पाली, सिरोही और जालौर से यात्रा फिर शुरू होगी।
18 और 19 जून को बाड़मेर, जैसलमेर, फलोदी, जोधपुर और नागौर जिलों को कवर किया जाएगा।
यात्रा का अंतिम चरण 23 से 25 जून तक चलेगा, जिसमें सीकर, झुंझुनू, चुरु, हनुमानगढ़, गंगानगर, बीकानेर और डीडवाना शामिल होंगे।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य भर के कर्मचारियों को एकजुट करना और सरकार पर उनकी लंबित मांगों को पूरा करने के लिए दबाव बनाना है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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