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राजस्थान

मदन दिलावर vs शिक्षक: FIR दर्ज: राजस्थान में शिक्षकों पर FIR: मदन दिलावर के खिलाफ मोर्चा

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ग्रीष्मावकाश में कटौती के खिलाफ मार्च निकालने पर शिक्षक नेताओं पर पुलिस केस दर्ज किया गया है।

HIGHLIGHTS

  • शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के क्षेत्र में मार्च निकालने पर शिक्षक नेताओं पर FIR दर्ज।
  • शिक्षक संघ (सियाराम) के पदाधिकारियों के खिलाफ भाजपा कार्यकर्ता ने दर्ज कराई रिपोर्ट।
  • ग्रीष्मावकाश में कटौती और वेतन विसंगतियों को लेकर 3000 शिक्षकों ने किया था प्रदर्शन।
  • कोटा अधिवेशन में शिक्षकों ने मुकदमों के विरोध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया।
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कोटा | राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के विधानसभा क्षेत्र रामगंजमंडी में शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन अब कानूनी पचड़े में फंस गया है। ग्रीष्मावकाश में कटौती के विरोध में मार्च निकालने वाले कई शिक्षक नेताओं पर एफआईआर दर्ज की गई है। इस कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के शिक्षक समुदाय में भारी रोष पैदा कर दिया है।

रामगंजमंडी में शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन

राजस्थान के कोटा जिले में स्थित रामगंजमंडी में पिछले दिनों शिक्षकों ने एक विशाल रैली का आयोजन किया था। यह रैली शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा मानी जा रही थी।

राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) के आह्वान पर प्रदेशभर से लगभग तीन हजार से अधिक शिक्षक यहाँ जुटे थे। शिक्षकों का मुख्य विरोध ग्रीष्मकालीन अवकाश में की गई कटौती को लेकर था।

प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए शिविरा पंचांग को अव्यावहारिक बताया। उनका कहना है कि भीषण गर्मी के बावजूद छुट्टियों में कटौती करना शिक्षकों और छात्रों दोनों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

शिक्षक नेताओं पर दर्ज हुई एफआईआर

रैली के सफल समापन के कुछ समय बाद ही पुलिस ने शिक्षक संघ के प्रमुख पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। यह रिपोर्ट भाजपा की एक महिला कार्यकर्ता की शिकायत पर दर्ज की गई है।

एफआईआर में संगठन के मुख्य संरक्षक सियाराम शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र शर्मा का नाम मुख्य रूप से शामिल है। इसके अलावा प्रदेश महामंत्री रामदयाल मीणा को भी आरोपी बनाया गया है।

पुलिस की इस कार्रवाई में कोषाध्यक्ष हेमंत कुमार जांगिड़ और अन्य पदाधिकारियों को भी नामजद किया गया है। शिक्षकों का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें और नाराजगी

शिक्षक केवल छुट्टियों की कटौती से ही नाराज नहीं हैं, बल्कि उनकी मांगों की सूची काफी लंबी है। वे लंबे समय से अपनी वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग कर रहे हैं।

संगठन की प्रमुख मांग है कि तृतीय श्रेणी अध्यापकों का ग्रेड पे बढ़ाकर 4200 रुपये किया जाए। वहीं वरिष्ठ अध्यापकों के लिए ग्रेड पे को 4800 रुपये करने की मांग की गई है।

शिक्षकों का कहना है कि सातवें वेतनमान में कई विसंगतियां हैं जिन्हें अब तक दूर नहीं किया गया है। इसके कारण हजारों शिक्षकों को हर महीने आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

तबादला नीति और पुरानी पेंशन का मुद्दा

राजस्थान में शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए एक स्थायी और पारदर्शी नीति की मांग भी वर्षों पुरानी है। शिक्षकों का कहना है कि नीति के अभाव में तबादलों में पक्षपात होता है।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूर्ण रूप से लागू करना शिक्षकों के लिए एक भावनात्मक और सुरक्षात्मक मुद्दा है। वे चाहते हैं कि एनपीएस में जमा उनकी पूरी राशि जीपीएफ खातों में भेजी जाए।

इसके अलावा, ग्रीष्मावकाश के दौरान विद्यालय भवनों की जांच सार्वजनिक निर्माण विभाग से कराने की मांग भी उठाई गई है। शिक्षकों का मानना है कि जर्जर भवनों में काम करना जोखिम भरा है।

कोटा अधिवेशन में फूटा शिक्षकों का गुस्सा

एफआईआर दर्ज होने के बाद कोटा में आयोजित 58वें प्रांतीय महासमिति के दो दिवसीय अधिवेशन में माहौल काफी गरमा गया। यहाँ शिक्षकों ने सरकार की दमनकारी नीतियों की कड़ी निंदा की।

अधिवेशन में विभिन्न आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए मुकदमों के विरोध में एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। शिक्षक नेताओं ने दो टूक कहा कि वे जेल जाने से नहीं डरते।

इस कार्यक्रम में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और सांप्रदायिकता के खिलाफ भी आवाज उठाई गई। शिक्षकों ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया।

अधिवेशन में देवेंद्र झाझड़िया, भंवरलाल काला और पवन छींपा जैसे दिग्गज शिक्षक नेताओं ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री को शिक्षकों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनना चाहिए।

"यह रैली पूरी तरह शांतिपूर्ण थी और पुलिस के मार्गदर्शन में आयोजित की गई थी। शिक्षकों की आवाज दबाने के लिए यह एफआईआर दर्ज करवाई गई है, जिसका हम विरोध करेंगे।" - सियाराम शर्मा, मुख्य संरक्षक

भविष्य की रणनीति और आंदोलन की राह

शिक्षक संघ अब इस मामले को कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर लड़ने की तैयारी कर रहा है। प्रदेश के अन्य शिक्षक संगठनों ने भी इस कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया है।

अगर सरकार ने दर्ज मुकदमों को वापस नहीं लिया और मांगों पर विचार नहीं किया, तो आगामी सत्र में शिक्षण कार्य प्रभावित हो सकता है। शिक्षक अब बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।

राजस्थान की राजनीति में शिक्षकों का यह आंदोलन अब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस विवाद ने सरकार और कर्मचारी वर्ग के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है।

निष्कर्ष के तौर पर, राजस्थान में शिक्षकों और सरकार के बीच का यह टकराव अब केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक मोड़ ले चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि शासन इस गतिरोध को कैसे शांत करता है।

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