बाड़मेर | राजस्थान के बाड़मेर जिले में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। मंगलवार को भाटी गिरल गांव में राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) के खिलाफ किसानों के धरने में शामिल हुए।
रविंद्र भाटी का माइंस कंपनी पर हल्ला बोल: रविंद्र भाटी का माइंस कंपनी को अल्टीमेटम: बोले- अब खून बहा दूंगा
बाड़मेर के गिरल में माइंस कंपनी के खिलाफ धरने पर बैठे रविंद्र भाटी, अफसरों को दी कड़ी चेतावनी।
HIGHLIGHTS
- शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी बाड़मेर के गिरल में माइंस कंपनी के खिलाफ किसानों के साथ धरने पर बैठे।
- भाटी ने अफसरों को चेतावनी देते हुए कहा कि टेबल पर बात करने आएंगे तो नीचे 440 वॉट का वायर होगा।
- विधायक ने कंपनी पर विधानसभा में 65 हजार पौधे लगाने का गलत तथ्य पेश करने का आरोप लगाया।
- स्थानीय युवाओं को नौकरी से निकालने और बढ़ते प्रदूषण को लेकर ग्रामीण पिछले 27 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं।
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विधायक भाटी ने वहां मौजूद भीड़ को संबोधित करते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि आप लोगों ने मेरे लिए पसीना बहाया था, तब मैंने वादा किया था कि जरूरत पड़ी तो मैं अपना खून भी बहा दूंगा।
भाटी का यह तेवर देख वहां मौजूद किसानों और युवाओं में जोश भर गया। उन्होंने साफ कर दिया कि वे अपने क्षेत्र के लोगों के हक के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
अफसरों को दी 440 वॉट की चेतावनी
विधायक ने प्रशासन और कंपनी के अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जब मैं टेबल पर बात करने आऊंगा तो नीचे 440 वॉट का वायर होगा, जिससे सबकी धूजणी छूट जाएगी।
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दरअसल, गिरल में लिग्नाइट माइंस के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था। आरोप है कि कंपनी अब उन युवाओं को नौकरी से निकाल रही है।
इसी मांग को लेकर स्थानीय किसान और युवा पिछले 27 दिनों से धरने पर बैठे हैं। भाटी ने कहा कि इन लोगों की मांगें पूरी तरह से जायज हैं और उन्हें उनका हक मिलना चाहिए।
"विधानसभा में जवाब दिया गया कि हजारों पौधे लगाए गए हैं, लेकिन हकीकत में वहां एक भी पौधा नहीं है। अधिकारियों ने बबूल के पेड़ों को नीम बताकर पल्ला झाड़ लिया।"
विधानसभा में गलत आंकड़े पेश करने का आरोप
रविंद्र सिंह भाटी ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सदन में गलत जानकारी दी गई। कंपनी ने दावा किया कि उन्होंने इलाके में 65 हजार पौधे लगाए हैं, जबकि जमीन पर कुछ नहीं है।
भाटी ने बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों के साथ मौके का मुआयना किया, तो वहां केवल जंगली बबूल नजर आए। अधिकारियों के पास इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं था कि नीम के पेड़ कहां गए।
विधायक ने कहा कि कंपनी और ठेकेदार किसी भी नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। माइनिंग एरिया में सुरक्षा के लिए कोई तारबंदी नहीं की गई है, जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं।
प्रदूषण से कम हो रही लोगों की उम्र
भाटी ने गिरल इलाके में बढ़ते प्रदूषण पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि माइनिंग के कारण यहां के लोगों की उम्र 10-10 साल कम हो गई है। रात के समय आसमान काला नजर आता है।
खेतों में माइनिंग का कचरा डंप किया जा रहा है, जिससे उपजाऊ जमीन बर्बाद हो रही है। कंपनी ने बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन आज स्थिति बद से बदतर हो गई है।
विधायक ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि समय रहते इन समस्याओं का समाधान किया जाए। अगर हालात नहीं सुधरे तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
RSMML और गिरल माइंस का महत्व
RSMML राजस्थान सरकार का एक प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम है। यह रॉक फॉस्फेट, लिग्नाइट और जिप्सम जैसे खनिजों का खनन करता है। गिरल माइंस राज्य की पहली आधुनिक ओपनकास्ट लिग्नाइट खदान है।
यह खदान 1994 से संचालित है और गिरल पावर प्लांट को ईंधन की आपूर्ति करती है। हालांकि, स्थानीय लोगों के लिए यह अब रोजगार के बजाय परेशानियों का सबब बनती जा रही है।
रविंद्र सिंह भाटी के इस धरने ने अब राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। देखना होगा कि सरकार और माइंस प्रबंधन किसानों की इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं।
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