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राजनीति

सम्राट सरकार झुकी, FIR वापस: NEET प्रदर्शन: सम्राट सरकार ने वापस ली FIR, 355 छात्र होंगे रिहा

Pradeep Beedawat

NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज सभी केस सम्राट सरकार वापस लेगी। 355 गिरफ्तार युवकों को भी रिहा किया जाएगा। सरकार ने यह फैसला कई दबावों के बाद लिया है।

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HIGHLIGHTS

  • सम्राट सरकार NEET प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी 40 से ज्यादा FIR वापस लेगी।
  • गिरफ्तार किए गए सभी 355 युवकों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया है।
  • सीवान में AK-47 फायरिंग और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने सरकार पर भारी दबाव बनाया।
  • केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और छात्र संगठनों की आंदोलन की धमकी के बाद फैसला पलटा गया।
samrat government withdraws fir against neet protest students in bihar

NEET प्रदर्शन पर सम्राट सरकार का यू-टर्न

पटना | बिहार की सम्राट सरकार ने NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी केस वापस लेने का ऐलान किया है। 27 जुलाई की देर शाम लिए गए इस फैसले के तहत, गिरफ्तार किए गए सभी 355 युवकों को भी तत्काल रिहा किया जाएगा।

26 जुलाई तक प्रदर्शनकारी छात्रों पर 40 से ज्यादा FIR दर्ज की गई थीं। लेकिन अब सरकार ने अपना फैसला पलट दिया है। आइए जानते हैं इस फैसले के पीछे के 4 बड़े कारण क्या हैं।

1. टूटता समझौता और केंद्र का हस्तक्षेप

25 जुलाई को दिल्ली में केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच एक समझौता हुआ था। केंद्रीय मंत्रियों ने CJP प्रवक्ताओं को आश्वासन दिया था कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR रद्द की जाएंगी और भविष्य में कोई कार्रवाई नहीं होगी।

लेकिन इस समझौते के बावजूद, बिहार में सम्राट सरकार की कार्रवाई जारी थी। पुलिस ने 355 लोगों को गिरफ्तार किया और 167 युवकों की तस्वीरें अखबारों में प्रकाशित कर उन्हें असामाजिक तत्व बताया।

सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई से लोगों में गलत संदेश जा रहा था। केंद्र सरकार ने बिहार के हालात पर एक रिपोर्ट मंगवाई, जिसके बाद मामले में हस्तक्षेप किया गया। इसी के चलते 27 जुलाई को सम्राट सरकार ने केस वापस लेने की घोषणा की।

2. AK-47 फायरिंग ने कराई देशव्यापी किरकिरी

25 जुलाई को सीवान में एक DIU कांस्टेबल द्वारा छात्रों पर AK-47 से गोली चलाने का वीडियो वायरल हो गया। इस घटना की कांग्रेस नेता राहुल गांधी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कड़ी निंदा की।

राहुल गांधी ने X पर लिखा, 'छात्रों के खिलाफ पूरा का पूरा सिस्टम ही जानलेवा है। बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर AK-47 से गोलियां चलाई गई हैं... मोदी जी, कहां गया आपका वादा कि छात्रों पर कोई FIR नहीं की जाएगी?'

इस घटना की सोशल मीडिया पर भी भारी आलोचना हुई, जिससे बिहार पुलिस की छवि खराब हुई। बाद में, सीवान के DM और SP ने बताया कि कांस्टेबल अभिषेक पटेल को सस्पेंड कर दिया गया है क्योंकि फायरिंग पूरी तरह से अनधिकृत थी।

3. सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का दबाव

छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। RJD सांसद मनोज झा ने सीवान फायरिंग के खिलाफ याचिका दायर की।

27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ आंदोलन के आधार पर लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

मामले की सुनवाई 28 जुलाई को होनी थी। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में होने वाली किरकिरी से बचने के लिए सरकार ने पहले ही अपना फैसला बदल दिया।

4. छात्र संगठनों और विपक्ष की चेतावनी

सरकार की कार्रवाई के खिलाफ विपक्ष और छात्र संगठन एकजुट हो गए। तेजस्वी यादव ने चेतावनी दी कि अगर केस वापस नहीं हुए तो राज्य में बड़ा आंदोलन होगा।

इसी बीच, आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पटना पहुंचीं और जेल में बंद छात्रों से मुलाकात की।

नेहा बोरा ने कहा, 'अगर बिहार में गिरफ्तार किए गए छात्रों की रिहाई नहीं हुई तो यहां भी दिल्ली के जंतर मंतर जैसा नजारा होगा। जब तक जेल में बंद आखिरी छात्र रिहा नहीं होगा, तब तक हम लोग आंदोलन करते रहेंगे।'

27 जुलाई को 14 छात्र संगठनों ने बैठक कर 29 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरने और 30 जुलाई को बिहार बंद का ऐलान किया था। पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल के अनुसार, सरकार युवाओं के एक और बड़े आंदोलन का सामना नहीं करना चाहती थी, इसलिए उसे झुकना पड़ा।

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