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राजस्थान

शिवगंज रिवर फ्रंट की बदहाली: शिवगंज का जवाई रिवर फ्रंट बना बदहाली का अड्डा: 2 करोड़ का प्रोजेक्ट 11 महीने से वीरान, प्रशासन की अनदेखी से करोड़ों का नुकसान

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

शिवगंज में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बना जवाई रिवर फ्रंट आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। करोड़ों की लागत से बना यह प्रोजेक्ट पिछले 11 महीनों से रखरखाव के अभाव में खंडहर बनता जा रहा है।

HIGHLIGHTS

  • 2022 में करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से हुआ था रिवर फ्रंट का निर्माण।
  • पिछले साढ़े 11 महीनों से मेंटेनेंस ठप, ठेकेदार ने अप्रैल 2025 में छोड़ा काम।
  • सीसीटीवी कैमरे बंद, लाइटें टूटी और ऑस्ट्रेलियन घास पूरी तरह सूख चुकी है।
  • नगर पालिका को हर महीने हो रहा करीब 1.5 लाख रुपए का भारी राजस्व घाटा।
sheoganj jawai river front neglect maintenance issue

शिवगंज | शिवगंज शहर में पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के सपने के साथ जवाई नदी के तट पर 'रिवर फ्रंट' का निर्माण किया गया था। वर्ष 2022 में करीब 2 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि खर्च कर इसे सजाया-संवारा गया था, ताकि स्थानीय लोगों को मनोरंजन का एक बेहतर स्थान मिल सके। लेकिन आज हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। रखरखाव के अभाव में यह खूबसूरत स्थल अब बदहाली का शिकार होकर अपनी पहचान खो रहा है।

11 महीनों से वीरान पड़ा है प्रोजेक्ट

पिछले साढ़े ग्यारह महीनों से यह रिवर फ्रंट पूरी तरह वीरान पड़ा है। अप्रैल 2025 में ठेकेदार के काम छोड़ने के बाद से यहां सन्नाटा पसरा है। नगर पालिका प्रशासन की उदासीनता के चलते न तो इसकी सफाई हो रही है और न ही पौधों को पानी मिल पा रहा है। शुरुआत में नगर पालिका ने इसकी देखरेख की थी, लेकिन अब यह स्थान पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।

करोड़ों की संपत्ति हो रही है बर्बाद

रिवर फ्रंट के अंदर बिछाई गई महंगी ऑस्ट्रेलियन घास अब पूरी तरह सूख चुकी है। वहां लगी फैंसी लाइटें असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ दी गई हैं। सुरक्षा के लिए लगाए गए सभी 11 सीसीटीवी कैमरे और एक मूविंग कैमरा महीनों से बंद पड़े हैं, जिससे वहां चोरी का खतरा बढ़ गया है। पाइपलाइन टूटने की वजह से हरियाली खत्म हो गई है। परिसर में अब शराब की बोतलें, कचरे के ढेर और आवारा पशुओं का जमावड़ा नजर आता है।

नगर पालिका को लाखों का राजस्व घाटा

जब यह रिवर फ्रंट निजी हाथों में था, तब नगर पालिका को संचालन के एवज में हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपए की आय होती थी। ठेका रद्द होने के बाद से यह आय पूरी तरह बंद हो गई है। पालिका ने दोबारा टेंडर निकालने की कोशिश भी की, लेकिन सफलता नहीं मिली। 19 सितंबर और 20 नवंबर को निविदाएं जारी की गईं, लेकिन कड़ी शर्तों और परिसर की बदहाली को देखते हुए किसी ने रुचि नहीं दिखाई।

जनता का फूटा गुस्सा

स्थानीय निवासी लोकेश कुमार कहते हैं कि कभी यह परिवार के साथ बैठने की सबसे अच्छी जगह थी, लेकिन आज यहां आना मुश्किल है। आज यहां केवल मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। समझ नहीं आता कि हम यहां घूमने आएं या इसकी बदहाली देखने, प्रशासन सो रहा है। शहरवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने करोड़ों रुपए पानी में बहा दिए हैं और अब इसकी सुध लेने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं है।

विपक्ष ने घेरा प्रशासन को

यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाशराज मीणा ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद विकास कार्यों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। मीणा ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी नेताओं की अनदेखी से शिवगंज की शान कहा जाने वाला यह प्रोजेक्ट अब खंडहर में तब्दील हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सुधार कार्य शुरू नहीं हुआ, तो जनता के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

क्या होगा रिवर फ्रंट का भविष्य?

सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन फिर से इस स्थान को जीवित कर पाएगा? क्या जनता के टैक्स का पैसा इसी तरह बर्बादी की भेंट चढ़ता रहेगा? फिलहाल, शिवगंज की जनता को उम्मीद है कि नगर पालिका जल्द ही कोई ठोस कदम उठाएगी ताकि यह स्थल दोबारा चमक सके। जवाई नदी का यह तट फिर से बच्चों की हंसी और परिवारों की चहल-पहल से गुलजार हो, यही सबकी कामना है।

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