श्योपुर | मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में मानवता को शर्मसार करने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने एक ऐसी मासूम बच्ची की कहानी उजागर की है, जिसे चंद रुपयों के लालच में कई बार बेचा गया।
यह मामला तब शुरू हुआ जब 18 अप्रैल को एक हाईवे पर 2 साल की बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। श्योपुर पुलिस ने इस मामले की तह तक जाते हुए मानव तस्करी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश कर दिया है।
श्योपुर: मासूम की तस्करी का पर्दाफाश: श्योपुर में हाईवे पर छोड़ी गई मासूम, मानव तस्करी का बड़ा खुलासा
6 दिन की उम्र से बिकती रही मासूम, इंदौर के ब्यूटी पार्लर से चलता था काला धंधा।
HIGHLIGHTS
- श्योपुर के हाईवे पर लावारिस मिली 2 साल की मासूम के मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
- जांच में खुलासा हुआ कि बच्ची को मात्र 6 दिन की उम्र में करीब एक लाख रुपये में बेचा गया था।
- इंदौर के एक ब्यूटी पार्लर की आड़ में मानव तस्करी का यह पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
- पुलिस ने भोपाल, इंदौर, धार और खरगौन के आरोपियों को पकड़कर गिरोह के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
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हाईवे पर मासूम का मिलना और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार अग्रवाल ने बताया कि 18 अप्रैल की सुबह पुलिस को सूचना मिली थी। मानपुर थाना क्षेत्र के सोइखुर्द के पास एक अज्ञात व्यक्ति बच्ची को छोड़कर भाग गया था।
डायल-112 के माध्यम से मिली इस सूचना पर पुलिस तुरंत हरकत में आई और बच्ची को सुरक्षित बरामद किया। बच्ची को तुरंत वन स्टॉप सेंटर में रखा गया और बाल कल्याण समिति को सूचित किया गया।
शुरुआत में यह मामला सिर्फ एक लावारिस बच्ची का लग रहा था, लेकिन पुलिस को कुछ संदिग्ध महसूस हुआ। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू कर दिया।
सीसीटीवी और तकनीकी जांच से खुला राज
पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकाली और वाहनों की जांच की। जांच के दौरान एक संदिग्ध कार की पहचान हुई जो भोपाल के आकाश मूंदड़ा के नाम पर दर्ज थी।
पुलिस की एक विशेष टीम तुरंत भोपाल रवाना हुई और आकाश व उसकी पत्नी कृतिका को हिरासत में लिया। शुरू में दोनों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और बच्ची को गोद लेने का नाटक किया।
जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने कबूल किया कि उन्होंने बच्ची को खरीदा था। उन्होंने बताया कि बच्ची को इंदौर की एक ब्यूटी पार्लर संचालिका के माध्यम से एक लाख रुपये में लिया गया था।
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इंदौर के ब्यूटी पार्लर से जुड़ा तस्करी का जाल
इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले में मानव तस्करी और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धाराएं जोड़ दीं। एसपी के निर्देश पर तीन टीमें गठित की गईं और इंदौर में छापेमारी की गई।
इंदौर के महालक्ष्मी नगर में स्थित एक ब्यूटी पार्लर इस काले धंधे का मुख्य केंद्र निकला। पुलिस ने पार्लर संचालिका नीता जैन और उसके पति वैभव जैन को गिरफ्तार कर लिया है।
जांच में पता चला कि यह पार्लर सिर्फ दिखावे के लिए था, असल में यहां बच्चों का सौदा होता था। नीता जैन ही वह मुख्य कड़ी थी जो खरीदारों और सप्लायरों के बीच संपर्क का काम करती थी।
6 दिन की उम्र से शुरू हुआ मासूम का सौदा
बच्ची की कहानी सुनकर पुलिस अधिकारियों की रूह भी कांप गई जब उन्हें पता चला कि वह कब से बिक रही है। बच्ची का पहला सौदा 21 नवंबर 2024 को हुआ था, जब वह महज 6 दिन की थी।
धार जिले की एक महिला क्लीनिक संचालिका ने इसे खरगौन की एक महिला से प्राप्त किया था। वहां से इस बच्ची को इंदौर लाया गया और नीता जैन के जरिए भोपाल के दंपत्ति को बेच दिया गया।
इस मासूम को खिलौने की तरह एक शहर से दूसरे शहर और एक हाथ से दूसरे हाथ में भेजा गया। पुलिस अब उन जैविक माता-पिता की तलाश कर रही है जिन्होंने अपनी कोख को रुपयों के लिए बेच दिया।
गिरफ्तार आरोपियों की फेहरिस्त और पुलिस रिमांड
पुलिस ने अब तक इस मामले में कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें चार महिलाएं शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में नीता जैन, वैभव जैन, आकाश मूंदड़ा, कृतिका मूंदड़ा और दो अन्य महिलाएं हैं।
इन सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह ने और भी कई बच्चों का सौदा किया होगा जिसकी जांच जारी है।
एसपी सुधीर कुमार अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस गिरोह की कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था और सोशल मीडिया का भी उपयोग करता था।
समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी
यह घटना बताती है कि हमारे समाज में मासूमों की सुरक्षा को लेकर अभी भी कितनी बड़ी चुनौतियां हैं। ब्यूटी पार्लर और क्लीनिक जैसे वैध संस्थानों की आड़ में ऐसे अवैध काम होना चिंताजनक है।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय स्तर पर भी जुड़े हैं। राजस्थान और गुजरात की सीमाओं पर भी पुलिस की टीमें नजर बनाए हुए हैं ताकि अन्य सुराग मिल सकें।
"यह केवल एक बच्ची को बचाने का मामला नहीं है, बल्कि एक पूरे सिंडिकेट को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है। हम हर उस व्यक्ति तक पहुंचेंगे जो इस अमानवीय कृत्य में शामिल है।" - सुधीर कुमार अग्रवाल, एसपी श्योपुर
कानूनी प्रावधान और सख्त सजा की मांग
मानव तस्करी के मामलों में भारतीय न्याय संहिता और जेजे एक्ट के तहत कठोर सजा का प्रावधान है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटा रही है ताकि उन्हें कोर्ट से कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
समाजसेवियों का कहना है कि ऐसे मामलों में लिप्त लोगों को समाज में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। बच्ची फिलहाल सुरक्षित है और उसे बाल गृह में उचित देखभाल और प्यार दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को सरल लेकिन सुरक्षित बनाने की जरूरत है। अक्सर जटिल प्रक्रियाओं के कारण लोग अवैध रास्तों की ओर मुड़ जाते हैं, जिसका फायदा ऐसे अपराधी उठाते हैं।
भविष्य की जांच और नेटवर्क का विस्तार
श्योपुर पुलिस की टीमें अब धार और खरगौन के उन क्लीनिकों की जांच कर रही हैं जहां से बच्ची आई थी। पुलिस को संदेह है कि वहां कई और नवजात बच्चों के रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई हो सकती है।
इंदौर के उस ब्यूटी पार्लर के पिछले एक साल के कॉल रिकॉर्ड्स और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान आरोपी कई और बड़े खुलासे कर सकते हैं।
इस पूरे ऑपरेशन की सफलता ने श्योपुर पुलिस की साख को जनता के बीच काफी मजबूत किया है। मासूम बच्ची के भविष्य को लेकर अब प्रशासन और बाल कल्याण समिति मिलकर निर्णय लेंगे ताकि उसे एक सुरक्षित जीवन मिल सके।
यह मामला रोंगटे खड़े कर देने वाला है कि कैसे एक नन्ही जान को बार-बार बेचा गया। पुलिस की मुस्तैदी ने न केवल एक बच्ची को बचाया बल्कि एक बड़े आपराधिक गिरोह को भी बेनकाब किया है।
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