शिवगंज | नगर पालिका चुनाव में इस बार असली लड़ाई सिर्फ कमल बनाम हाथ की नहीं रह गई है। टिकट से नाराजगी हो या स्थानीय समीकरणों की मजबूरी—41 निर्दलीयों ने मैदान में उतरकर दोनों प्रमुख दलों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। यही वजह है कि कई वार्डों में अब जीत-हार का फैसला सीधे मुकाबले से नहीं, बल्कि वोटों के बंटवारे और निर्दलीयों की सेंध से तय होने के आसार हैं।
शिवगंज का चुनावी घमासान: निर्दलीयों ने बिगाड़ा BJP-कांग्रेस का खेल
शिवगंज नगर पालिका चुनाव में 41 निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला है, जिससे जीत-हार का फैसला वोटों के बंटवारे पर निर्भर करेगा।
HIGHLIGHTS
- शिवगंज नगर पालिका चुनाव में 35 वार्डों के लिए 110 प्रत्याशी मैदान में हैं।
- निर्दलीय उम्मीदवारों ने भाजपा और कांग्रेस के चुनावी समीकरणों को उलझा दिया है।
- वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जबकि 8 वार्डों में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है।
- वार्ड 25 में भाजपा का कोई प्रत्याशी नहीं है, जिससे मुकाबला कांग्रेस और निर्दलीय के बीच है।
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निर्दलीयों ने बदला चुनावी समीकरण
35 वार्डों वाली शिवगंज नगर पालिका में कुल 110 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 34, कांग्रेस के 35 और 41 निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं।
खास बात यह है कि 24 वार्डों में निर्दलीयों की मौजूदगी ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से उलझा दिया है।
10 वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला
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जानकारी के अनुसार, कम से कम 10 वार्डों में मुकाबला अब त्रिकोणीय हो चुका है। इन वार्डों में भाजपा, कांग्रेस और मजबूत निर्दलीय उम्मीदवार के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिल रहा है। वहीं, 12 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है।
दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
शिवगंज के 8 वार्ड ऐसे हैं, जहां भाजपा और कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। इन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों की सक्रियता ने मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि किसके बागी या असंतुष्ट वोट काटेंगे और किसका खेल बनाएंगे। इसका सटीक हिसाब अब बूथ स्तर पर ही लगाया जा रहा है।
वार्ड 29 और 25 बने हॉट सीट
कुछ वार्ड ऐसे हैं जो अपनी अनूठी चुनावी स्थिति के कारण चर्चा का केंद्र बन गए हैं। इनमें वार्ड 29 और वार्ड 25 प्रमुख हैं।
वार्ड 29 में 7 उम्मीदवार
वार्ड संख्या 29 में सबसे ज्यादा 7 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां मुकाबला बहुकोणीय होने से किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में स्पष्ट बढ़त का आकलन करना बेहद मुश्किल हो गया है। माना जा रहा है कि यहां छोटे-छोटे वोट समूह भी परिणाम की दिशा बदल सकते हैं।
वार्ड 25 में भाजपा नदारद
वहीं, वार्ड 25 का समीकरण और भी अलग है। यहां भाजपा ने अपना कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा है। इस वजह से यहां कांग्रेस प्रत्याशी और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच सीधा मुकाबला है। चुनावी नजरिए से यह वार्ड इसलिए भी अहम हो गया है कि भाजपा की गैरमौजूदगी ने यहां मुकाबले का पूरा गणित ही बदल दिया है।
'वोट कटवा' या असली चुनौती?
मतदान की तारीख नजदीक आते ही सभी प्रत्याशियों ने घर-घर संपर्क, बैठकों और जनसभाओं का दौर तेज कर दिया है। लेकिन इस चुनाव में सबसे ज्यादा निगाहें निर्दलीय उम्मीदवारों पर टिकी हुई हैं।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कितने निर्दलीय जीतेंगे, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि कितने निर्दलीय भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों का जीत का गणित बिगाड़ेंगे। क्योंकि शिवगंज के इन चुनावों में मुकाबला सिर्फ प्रत्याशियों के बीच नहीं है, बल्कि टिकट, नाराजगी, स्थानीय समीकरण और बगावत का असर भी ईवीएम तक पहुंचने वाला है।
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