सीकर | राजस्थान के सीकर जिले की पोक्सो कोर्ट संख्या एक ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मानवता को शर्मसार करने वाले अपराधी को कठोरतम सजा सुनाई है।
अदालत ने 8 साल की मासूम बच्ची के साथ बलात्कार करने वाले दोषी को उसकी अंतिम सांस तक जेल की सलाखों के पीछे रहने का आदेश दिया है।
8 साल की मासूम से दरिंदगी, उम्रकैद: सीकर: 8 साल की मासूम से हैवानियत करने वाले को अंतिम सांस तक जेल, जज बोले- ऐसे तो बच्चे बाहर खेलने से भी डरेंगे
सीकर में 8 साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने वाले दोषी को पोक्सो कोर्ट ने कठोर सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी को अंतिम सांस तक जेल में रहने का आदेश दिया है और सख्त टिप्पणी भी की है।
HIGHLIGHTS
- सीकर पोक्सो कोर्ट ने 8 साल की बच्ची से रेप के दोषी को आखिरी सांस तक जेल की सजा सुनाई।
- जज ने टिप्पणी की कि ऐसे अपराधों से बच्चों में बाहर खेलने को लेकर डर पैदा हो जाएगा।
- आरोपी पहले भी एक रेप केस में बरी हो चुका था, जिसके बाद उसने फिर वारदात को अंजाम दिया।
- पीड़िता को कुल 6.75 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने की अनुशंसा कोर्ट द्वारा की गई है।
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टॉफी का लालच देकर की हैवानियत
लोक अभियोजक भवानी सिंह जेरठी के अनुसार, घटना पिछले साल की है जब पीड़िता शाम के समय अपने घर के पास खेल रही थी।
उस समय बच्ची के माता-पिता मजदूरी करने गए हुए थे। तभी आरोपी वहां पहुंचा और मासूम को टॉफी का लालच देकर अपने साथ सुनसान खंडहर में ले गया।
आरोपी ने वहां मासूम के साथ दरिंदगी की। माता-पिता जब मजदूरी से लौटे तो बच्ची को लहूलुहान हालत में पाया। बच्ची ने दर्द से कराहते हुए अपनी आपबीती सुनाई।
जज की गंभीर टिप्पणी
केस ऑफिसर स्कीम के तहत हुई त्वरित सुनवाई में न्यायाधीश विक्रम चौधरी ने सजा सुनाते समय बच्चों की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की।
जज ने कहा कि "अगर ऐसे जघन्य अपराध होते रहे, तो मासूम बच्चे घरों के बाहर खेलने से भी डरने लगेंगे।" समाज में ऐसे अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है।
अदालत ने माना कि ऐसे अपराधियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। आरोपी दो साल पहले भी एक अन्य मामले में बरी हुआ था, जिससे उसका दुस्साहस बढ़ गया था।
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मुआवजे की अनुशंसा
पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए 31 गवाह और 61 दस्तावेज पेश किए।
कोर्ट ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। पीड़िता को पूर्व में मिली सहायता के अतिरिक्त, कोर्ट ने अब 5 लाख रुपये और देने की अनुशंसा की है।
इस फैसले से कानून के प्रति जनता का विश्वास बढ़ा है और अपराधियों को सख्त संदेश गया है कि जघन्य अपराधों में कड़ी सजा सुनिश्चित है।
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