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भारत

बिना OTP होगा ऑनलाइन पेमेंट: बिना OTP होगा ऑनलाइन पेमेंट: बैंक और टेलीकॉम कंपनियां लाएंगी 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' तकनीक, सिम मैच न होने पर रुकेगा फ्रॉड

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

भारत में अब ऑनलाइन पेमेंट के लिए OTP की जरूरत खत्म हो सकती है। बैंक और टेलीकॉम कंपनियां 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' पर काम कर रही हैं जो बैकग्राउंड में सिम और डिवाइस की जांच करेगा।

HIGHLIGHTS

  • साइलेंट ऑथेंटिकेशन तकनीक से बिना OTP के सुरक्षित ऑनलाइन ट्रांजैक्शन संभव होगा।
  • बैंक और टेलीकॉम कंपनियां बैकग्राउंड में सिम कार्ड और रजिस्टर्ड नंबर का मिलान करेंगी।
  • सिम क्लोनिंग और ई-सिम स्वैप जैसे फ्रॉड को रोकने में यह तकनीक बेहद कारगर होगी।
  • RBI के नए नियमों के तहत टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के लिए बायोमेट्रिक्स को भी बढ़ावा मिलेगा।
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नई दिल्ली | भारत में डिजिटल पेमेंट का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। अब आपको पेमेंट के लिए बार-बार ओटीपी (OTP) का इंतजार नहीं करना होगा। देश के बड़े प्राइवेट बैंक और टेलीकॉम कंपनियां एक खास तकनीक पर काम कर रही हैं। इसे 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' कहा जा रहा है।

इस तकनीक के आने के बाद ऑनलाइन शॉपिंग या मनी ट्रांसफर के दौरान वन-टाइम पासवर्ड की जरूरत खत्म हो सकती है। यह तकनीक काफी सुरक्षित मानी जा रही है और इसे जल्द ही लागू किया जा सकता है। इससे ग्राहकों का बैंकिंग अनुभव पहले से काफी बेहतर और तेज होने की उम्मीद है।

कैसे काम करेगी यह तकनीक?

साइलेंट ऑथेंटिकेशन सिस्टम पूरी तरह से बैकग्राउंड में काम करेगा। जब आप बैंक ऐप से पेमेंट करेंगे, तो सिस्टम खुद ही सुरक्षा की जांच कर लेगा। यह देखेगा कि आपके फोन में लगा सिम कार्ड और बैंक में रजिस्टर्ड नंबर एक ही हैं या नहीं।

इसके लिए टेलीकॉम नेटवर्क बैंक को एक विशेष सिग्नल भेजेगा। अगर सिम कार्ड और रजिस्टर्ड नंबर मैच हो जाते हैं, तो ट्रांजैक्शन बिना ओटीपी के पूरा हो जाएगा। इससे यूजर का कीमती समय बचेगा और पेमेंट प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी।

फ्रॉड रोकना होगा आसान

एक्सिस बैंक के डिजिटल बिजनेस हेड समीर शेट्टी के अनुसार, यह तकनीक सिम क्लोनिंग और ई-सिम स्वैप जैसे फ्रॉड को रोकने में मदद करेगी। अगर कोई हैकर आपके खाते से पैसे निकालने की कोशिश करता है, तो सिम और डिवाइस मैच नहीं होगा।

ऐसी स्थिति में ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लॉक हो जाएगा। खास बात यह है कि यूजर को इस प्रक्रिया के लिए कुछ भी अलग से नहीं करना होगा। यह तकनीक ई-सिम (eSIM) पर भी उतनी ही सटीकता से काम करेगी, जिससे डिजिटल सुरक्षा का एक नया कवच तैयार होगा।

नेटवर्क लेवल पर सुरक्षा

PWC इंडिया के साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब तक सुरक्षा की परतें ऐप लेवल पर थीं। अब बैंक और टेलीकॉम कंपनियां वेरिफिकेशन को सीधे नेटवर्क के मुख्य हिस्से में शिफ्ट कर रही हैं। नेटवर्क लेवल पर वेरिफिकेशन होने से इसे हैक करना लगभग नामुमकिन होगा।

सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए इसमें फेस आईडी और बायोमेट्रिक्स जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं। इससे ग्राहकों का भरोसा डिजिटल पेमेंट पर बढ़ेगा। साथ ही, ओटीपी न आने की वजह से ट्रांजैक्शन फेल होने की समस्या भी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

RBI के कड़े नियम और भविष्य

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल लेन-देन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) को अनिवार्य कर दिया है। इसमें पासवर्ड और बायोमेट्रिक्स जैसी सुरक्षा परतें शामिल हैं। हालांकि एसएमएस वाले ओटीपी पूरी तरह बंद नहीं होंगे, लेकिन आधुनिक तरीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

अब बैंक ओटीपी भेजने के लिए वॉट्सएप जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स का भी सहारा ले सकेंगे। इससे चेकआउट प्रक्रिया आसान होगी और ग्राहकों का डिजिटल एडॉप्शन तेज होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।

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