सिरोही | नगर परिषद चुनाव में भाजपा के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब पार्टी के भीतर ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। वार्ड संख्या 4 से भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी रहे संजय वर्मा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों, वार्ड प्रभारी और संयोजक की चुनावी भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सिरोही भाजपा में घमासान: भाजपा की हार के बाद संगठन में घमासान, वार्ड 4 के प्रत्याशी ने प्रभारी-संयोजक पर लगाए गंभीर आरोप
सिरोही नगर परिषद के वार्ड संख्या 4 से भाजपा प्रत्याशी रहे संजय वर्मा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पार्टी के वार्ड प्रभारी और संयोजक की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन ने अपेक्षित सहयोग नहीं किया और कुछ लोगों ने भाजपा के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में काम किया।
HIGHLIGHTS
- वार्ड संख्या 4 से भाजपा प्रत्याशी रहे संजय वर्मा ने सोशल मीडिया पर संगठन की भूमिका पर सवाल उठाए।वार्ड प्रभारी और संयोजक पर समाज की बैठक नहीं करवाने तथा अपेक्षित सहयोग नहीं करने का आरोप।भाजपा प्रत्याशी के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में काम करने का दावा।महिपाल सिंह चारण की प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर मामला और गरमाया।वार्ड प्रभारी एवं भाजपा जिला उपाध्यक्ष छगनलाल घांची का पक्ष सामने आना बाकी।
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महत्वपूर्ण: समाचार में वर्णित आरोप संजय वर्मा की सोशल मीडिया पोस्ट और उस पर आई प्रतिक्रियाओं पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जिन पदाधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
प्रभारी और संयोजक ने अपेक्षित काम नहीं किया—वर्मा
संजय वर्मा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भाजपा ने नगर परिषद चुनाव के दौरान विभिन्न वार्डों में प्रभारी और संयोजक नियुक्त किए थे, लेकिन कई लोगों ने पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में अपेक्षित रूप से काम नहीं किया।
उन्होंने विशेष रूप से वार्ड संख्या 4 का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वार्ड प्रभारी और संयोजक ने अपने समाज के मतदाताओं से उनके पक्ष में संपर्क तक नहीं किया। वर्मा का दावा है कि संगठनात्मक सहयोग के अभाव का असर उनके चुनाव परिणाम पर पड़ा।
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बार-बार आग्रह के बाद भी नहीं हुई समाज की बैठक
संजय वर्मा के अनुसार उन्होंने वार्ड प्रभारी और संयोजक से कई बार आग्रह किया था कि भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में समाज की बैठक आयोजित करवाई जाए, लेकिन उनके आग्रह के बावजूद बैठक नहीं हुई।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के सिरोही प्रवास के दौरान भी उन्होंने घांची समाज के कुछ प्रमुख लोगों के साथ बैठक करवाने का आग्रह किया था, लेकिन यह बैठक आयोजित नहीं हो सकी।
वर्मा का कहना है कि मदन राठौड़ जिस होटल में ठहरे थे, वहां होटल संचालक के माध्यम से भी समाज के लोगों से संपर्क करवाया जाता तो चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में हो सकता था। हालांकि यह संजय वर्मा का व्यक्तिगत आकलन है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।




दो अन्य प्रत्याशियों से भी संपर्क करवाने का दावा
संजय वर्मा ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि भाजपा ने घांची समाज के दो अन्य व्यक्तियों को भी चुनाव में टिकट दिया था। उन्होंने उन प्रत्याशियों से वार्ड संख्या 4 में आकर अपने समाज के लोगों से भाजपा के पक्ष में संपर्क करने का आग्रह किया, लेकिन वे प्रचार के लिए नहीं आए।
वर्मा के अनुसार संबंधित प्रत्याशियों की ओर से कथित रूप से यह कहा गया कि यदि वे उनके वार्ड में प्रचार करने आए तो निर्दलीय प्रत्याशी दलपत पटेल नाराज हो सकते हैं और इसका प्रभाव उनके अपने चुनाव पर भी पड़ सकता है। इस दावे पर संबंधित प्रत्याशियों का पक्ष सामने नहीं आया है।
निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में काम करने का आरोप
संजय वर्मा ने आरोप लगाया कि घांची समाज लंबे समय से भाजपा का समर्थक रहा है, लेकिन वार्ड संख्या 4 में समाज से आने वाले निर्दलीय प्रत्याशी को जिताने के लिए पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ काम किया गया।
उन्होंने वार्ड प्रभारी और संयोजक पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने समाज के मतदाताओं को भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में लाने के लिए कोई प्रभावी प्रयास नहीं किया। वर्मा ने यह भी दावा किया कि भाजपा संगठन की ओर से एक कार्यकर्ता तक उनके वार्ड में प्रचार के लिए नहीं भेजा गया।
उनका कहना है कि नगर परिषद चुनाव में उनके जैसे कई अन्य भाजपा प्रत्याशियों को भी संगठनात्मक सहयोग की कमी का सामना करना पड़ा।
महिपाल सिंह चारण की टिप्पणी से बढ़ी चर्चा
संजय वर्मा की सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता महिपाल सिंह चारण ने भी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि इस विषय में उन्होंने स्वयं वार्ड प्रभारी से बातचीत की थी।
चारण के मुताबिक प्रभारी ने कथित रूप से जवाब दिया था कि ‘सांवला जी के समाज ने सौगंध डाली है, कैसे काम करें।’ इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि यह कथित बातचीत किन परिस्थितियों में हुई और ‘सौगंध’ से किस सामाजिक अथवा चुनावी संदर्भ की ओर संकेत किया गया था। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण आने के बाद ही इसकी वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
वार्ड प्रभारी थे जिला उपाध्यक्ष छगनलाल घांची
नगर परिषद चुनाव के दौरान भाजपा संगठन ने वार्ड संख्या 4 में जिला उपाध्यक्ष छगनलाल घांची को वार्ड प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी थी। ऐसे में संजय वर्मा की ओर से लगाए गए आरोपों के केंद्र में उनकी चुनावी भूमिका है।
वर्मा ने दावा किया है कि वार्ड प्रभारी रहते हुए छगनलाल घांची ने भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में अपने समाज के लोगों से अपेक्षित संपर्क नहीं किया और समाज की बैठक करवाने के आग्रह पर भी पहल नहीं की।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि वार्ड में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया गया। इन आरोपों पर छगनलाल घांची की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
भाजपा की चुनावी रणनीति पर उठे सवाल
नगर परिषद चुनाव में भाजपा की हार के बाद सामने आए इन आरोपों ने पार्टी की वार्ड स्तरीय रणनीति, प्रभारियों की जवाबदेही और प्रत्याशियों के साथ संगठन के समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में संगठनात्मक स्तर पर अपेक्षित प्रचार और सामाजिक संपर्क नहीं हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी। क्या भाजपा संगठन हार के कारणों की वार्डवार समीक्षा करेगा और प्रत्याशियों की शिकायतों पर संबंधित पदाधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा?
जातीय निष्ठा बनाम पार्टी अनुशासन की बहस
संजय वर्मा ने अपनी पोस्ट के अंत में पार्टी की मौजूदा स्थिति के लिए ऐसे लोगों को जिम्मेदार बताया, जो उनके अनुसार पार्टी का पद और टिकट मिलने के बावजूद अधिकृत प्रत्याशी के स्थान पर अपनी जाति के व्यक्ति को जिताने का प्रयास करते हैं।
उनके आरोपों ने भाजपा के भीतर पार्टी अनुशासन और जातीय निष्ठा को लेकर भी बहस छेड़ दी है। वर्मा ने दावा किया कि उन्होंने चुनाव के दौरान ही इस संबंध में पार्टी के कई लोगों को जानकारी दी थी और महिपाल सिंह चारण को भी पूरे मामले से अवगत कराया था।
दूसरे पक्ष के जवाब का इंतजार
संजय वर्मा के आरोपों पर वार्ड प्रभारी छगनलाल घांची, संबंधित संयोजक और निर्दलीय प्रत्याशी दलपत पटेल का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है। निष्पक्ष तस्वीर के लिए आरोपों से जुड़े सभी पक्षों का जवाब आवश्यक है।
अब निगाहें भाजपा संगठन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों को प्रत्याशी की व्यक्तिगत नाराजगी मानकर छोड़ देता है या चुनावी हार की समीक्षा करते हुए वार्ड स्तर पर जिम्मेदारी तय करता है।