नॉस्टेल्जिया स्कैम का कहर: 80s फोटो ट्रेंड बना ठगी का हथियार, पुलिस ने चेताया
सोशल मीडिया पर वायरल 80s रेट्रो फोटो ट्रेंड अब 'नॉस्टेल्जिया स्कैम' बन गया है। साइबर ठग फर्जी लिंक भेजकर फोन हैक कर रहे हैं और कई राज्यों की पुलिस ने चेतावनी जारी की है।
HIGHLIGHTS
- सोशल मीडिया पर वायरल 80s रेट्रो फोटो ट्रेंड 'नॉस्टेल्जिया स्कैम' का रूप ले चुका है।
- साइबर ठग फर्जी लिंक और APK फाइल भेजकर फोन हैक कर रहे हैं और निजी जानकारी चुरा रहे हैं।
- राजस्थान, झारखंड, हिमाचल और यूपी समेत कई राज्यों की पुलिस ने आधिकारिक चेतावनी जारी की है।
- AI टूल्स पर फोटो अपलोड करने से चेहरे का बायोमेट्रिक डेटा लीक होने और डीपफेक बनने का खतरा है।
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आजकल सोशल मीडिया पर हर तरफ 80 के दशक की रेट्रो-स्टाइल तस्वीरें छाई हुई हैं। लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपनी और परिवार की तस्वीरों को पुराने जमाने का लुक देकर शेयर कर रहे हैं।
लेकिन इस ट्रेंड के पीछे एक बड़ा खतरा छिपा है, जिसे 'नॉस्टेल्जिया स्कैम' कहा जा रहा है। राजस्थान सहित देशभर में करोड़ों लोग अनजाने में इस स्कैम का शिकार हो सकते हैं।
क्या है 'नॉस्टेल्जिया स्कैम'?
नॉस्टेल्जिया स्कैम साइबर ठगी का एक नया तरीका है, जिसमें ठग लोगों की पुरानी यादों (Nostalgia) के प्रति लगाव का फायदा उठाते हैं।
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वे 80 के दशक के रेट्रो ट्रेंड की आड़ में लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। यह पुरानी यादों के नाम पर किया जाने वाला एक खतरनाक साइबर फ्रॉड है।
कैसे काम करता है यह स्कैम?
साइबर अपराधी इस ट्रेंड का फायदा उठाकर लोगों को फंसा रहे हैं। इसके काम करने का तरीका बहुत सरल लेकिन प्रभावी है।
- फर्जी लिंक और मैसेज: ठग सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर "अपनी फोटो को 80s का लुक दें" या "फ्री में रेट्रो पोर्ट्रेट बनाएं" जैसे आकर्षक मैसेज के साथ एक लिंक भेजते हैं।
- मैलिशियस APK फाइल: लिंक पर क्लिक करते ही यूजर को एक फर्जी ऐप (APK फाइल) डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है, जो प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं होती।
- डेटा की चोरी: ऐप इंस्टॉल होते ही यह फोन की गैलरी, कैमरा, कॉन्टैक्ट्स और मैसेज जैसी जरूरी अनुमतियां मांग लेता है। अनुमति मिलते ही ठग OTP, बैंकिंग डिटेल्स और अन्य निजी जानकारी चुरा लेते हैं।
- बैंक खाता खाली: चुराई गई जानकारी का उपयोग करके अपराधी बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं या पहचान की चोरी (Identity Theft) जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।
कई राज्यों की पुलिस ने जारी की चेतावनी
इस बढ़ते खतरे को देखते हुए झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक समेत कई राज्यों की पुलिस ने आधिकारिक चेतावनी और एडवाइजरी जारी की है।
झारखंड: बोकारो साइबर पुलिस की सलाह
बोकारो साइबर थाना प्रभारी पवन कुमार ने लोगों को AI ट्रेंड्स के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान ऐप पर फोटो अपलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी की जांच अवश्य करें।
हिमाचल प्रदेश: CID साइबर क्राइम ब्यूरो का अलर्ट
हिमाचल पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी के नेतृत्व में स्टेट CID साइबर क्राइम ब्यूरो ने चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, "सोचें, समझें, फिर अपलोड करें।" अनजान AI ऐप पर तस्वीरें अपलोड करने से डीपफेक वीडियो, फर्जी प्रोफाइल और ब्लैकमेलिंग का खतरा बढ़ सकता है।
उत्तर प्रदेश: मुरादाबाद पुलिस की चेतावनी
मुरादाबाद में एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह और साइबर एक्सपर्ट्स ने बताया कि ठग APK फाइल भेजकर फोन हैक कर रहे हैं। साइबर थाने के प्रशांत सिंह ने आगाह किया कि अनजान ऐप्स को परमिशन देने से निजी डेटा चोरी हो सकता है।
सबसे बड़ा खतरा: बायोमेट्रिक डेटा लीक
जब लोग अपनी हाई-क्वालिटी तस्वीरें ChatGPT या अन्य AI टूल्स पर अपलोड करते हैं, तो वे अनजाने में अपना सबसे कीमती डेटा, यानी चेहरे का बायोमेट्रिक डेटा, लीक कर देते हैं।
इस डेटा का इस्तेमाल पहचान चुराने, फर्जी KYC करवाने या आधार से जुड़े स्कैम करने के लिए किया जा सकता है। इससे डीपफेक वीडियो बनाकर किसी को बदनाम भी किया जा सकता है।
धोखाधड़ी होने पर क्या करें?
साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराएं नहीं। तत्काल राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
आप अपनी शिकायत ऑनलाइन माध्यम से cybercrime.gov.in पर भी दर्ज करा सकते हैं। याद रखें, आपकी पुरानी यादें कीमती हैं, लेकिन आपकी डिजिटल सुरक्षा उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।