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राजनीति

भाजपा में टिकट पर घमासान: सिरोही भाजपा में घमासान, टिकट बंटवारे से पहले तकरार

महेन्द्रसिंह शेखावत

सिरोही में निकाय चुनाव के टिकट वितरण से पहले भाजपा में आंतरिक कलह बढ़ गई है। वार्ड प्रभारियों की बैठक में कार्यकर्ताओं ने रायशुमारी पर सवाल उठाए, जिसके बाद प्रदेश पदाधिकारी और जिला महामंत्री में तकरार हो गई।

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HIGHLIGHTS

  • निकाय चुनाव में टिकट वितरण से पहले भाजपा की बैठक में असंतोष के सुर तेज हो गए हैं।
  • कार्यकर्ताओं ने कुछ वार्डों में निष्पक्ष रायशुमारी न होने का आरोप लगाया।
  • प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य नारायण देवासी और जिला महामंत्री गणपत सिंह के बीच तकरार हुई।
  • जिला महामंत्री गणपत सिंह ने पूरे घटनाक्रम को 'छोटी सी बातचीत' कहकर खारिज कर दिया।
sirohi bjp infighting before civic election ticket distribution

सिरोही |निकाय चुनाव में टिकट वितरण से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में अंदरूनी खींचतान और घमासान खुलकर सामने आने लगा है। मजबूत दावेदारों की राय जानने के लिए आयोजित वार्ड प्रभारियों की एक बैठक में कार्यकर्ताओं के असंतोष और पदाधिकारियों के बीच हुई तकरार ने पार्टी की चुनावी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बैठक में क्यों बिगड़ा माहौल?

पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने यह आरोप लगाया कि कई वार्डों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर की गई रायशुमारी निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मजबूत और समर्पित कार्यकर्ताओं को इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से जानबूझकर बाहर रखा गया। इसको लेकर कार्यकर्ताओं ने बैठक में मौजूद प्रभारी पदाधिकारियों और राज्यमंत्री के समक्ष अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की।

पदाधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक

मामला तब और गरमा गया जब प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य नारायण देवासी ने कार्यकर्ताओं के बीच उपजे असंतोष को शांत करने का प्रयास किया।

देवासी का आरोप है कि इसी दौरान भाजपा जिला महामंत्री गणपत सिंह ने उनके साथ हस्तक्षेप करते हुए अमर्यादित एवं अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे बैठक का माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया।

कार्यकर्ताओं को सुनने की नसीहत पर सवाल

इस घटनाक्रम ने भाजपा के भीतर एक असहज सवाल खड़ा कर दिया है। पार्टी नेतृत्व लगातार कार्यकर्ताओं को संगठन की नींव बताता है और उनकी बात सुनने पर जोर देता है।

ऐसे में जब कार्यकर्ताओं ने अपनी शिकायत सामने रखी, तो माहौल संभालने की कोशिश कर रहे एक पदाधिकारी के साथ ही विवाद क्यों खड़ा हो गया? यह सवाल अब पार्टी के गलियारों में गूंज रहा है।

'80% सुनो, 20% बोलो'

प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य नारायण देवासी ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रीय अधिवेशन में पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सभी पदाधिकारियों को 80 प्रतिशत सुनने और केवल 20 प्रतिशत बोलने की नसीहत दी थी।

देवासी के अनुसार, "कार्यकर्ता पार्टी की नींव हैं और उनकी नाराजगी को सम्मानपूर्वक सुनकर समाधान निकालना संगठन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल विवाद को समाप्त कर कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करना था। देवासी ने यह भी बताया कि उन्होंने पूरे मामले की जानकारी प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सैनी और निकाय चुनाव प्रभारी देवीशंकर भूतड़ा को भी दी है।

विवाद पर जिला महामंत्री की सफाई

वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर जब जिला महामंत्री गणपत सिंह से बात की गई तो उन्होंने किसी भी बड़े विवाद से इनकार किया।

उनका कहना है कि, “इस प्रकार का कोई घटनाक्रम नहीं हुआ, छोटी सी बातचीत हुई जो हमारे कार्यकर्ताओं के बीच की है।”

टिकट से पहले ही ‘संगठन की परीक्षा’

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब भाजपा निकाय चुनाव में टिकट वितरण के चरण तक भी नहीं पहुंची है। वार्ड स्तर की रायशुमारी ने ही संगठन के भीतर चल रही खींचतान की तस्वीर को साफ कर दिया है।

एक तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट कर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ टिकट के संभावित दावेदारों को लेकर उठे सवाल और पदाधिकारियों के बीच हुई कथित तकरार ने पार्टी नेतृत्व के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना यह है कि टिकट की दौड़ शुरू होने से पहले भाजपा नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने में सफल होती है या यह अंदरूनी खींचतान टिकट वितरण के साथ और गहराती है।

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