सिरोही |
चंपावती बावड़ी: इतिहास रो रहा!: सिरोही: ऐतिहासिक चंपावती बावड़ी बदहाल, संरक्षण की गुहार
सिरोही की ऐतिहासिक चंपावती बावड़ी संरक्षण के अभाव में बदहाल है। स्थानीय लोग जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से इस अमूल्य विरासत को बचाने की गुहार लगा रहे हैं।
HIGHLIGHTS
- सिरोही की ऐतिहासिक चंपावती बावड़ी संरक्षण के अभाव में बदहाल।
- धरोहर परिसर में गंदगी और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है।
- स्थानीय लोगों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से संरक्षण की मांग की।
- समय पर जीर्णोद्धार न होने पर अस्तित्व खत्म होने का खतरा।
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शहर के रामझरोखा मंदिर के पास स्थित ऐतिहासिक चंपावती बावड़ी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। कभी सिरोही की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान रही यह धरोहर आज संरक्षण के अभाव में उपेक्षा का शिकार हो गई है।
विडंबना यह है कि करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के दावे करने वाले जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की नजर अब तक इस अमूल्य विरासत पर नहीं पड़ी है, जिसके कारण यह ऐतिहासिक स्थल लगातार अपना अस्तित्व खोता जा रहा है।
धरोहर की दुर्दशा पर स्थानीय लोगों में रोष
स्थानीय लोगों का कहना है कि चंपावती बावड़ी केवल एक जल स्रोत नहीं, बल्कि सिरोही के गौरवशाली इतिहास की एक जीवंत पहचान है। इसके बावजूद, इसकी स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।
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गंदगी और झाड़ियों का साम्राज्य
नियमित साफ-सफाई, संरक्षण और सौंदर्यीकरण के अभाव में बावड़ी परिसर में गंदगी फैली हुई है और चारों तरफ झाड़ियां उग आई हैं। यह स्थिति इस ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को गंभीर रूप से ठेस पहुंचा रही है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से संरक्षण की अपील
क्षेत्रवासियों ने सांसद, विधायक, जिला प्रमुख, नगर परिषद, जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग सहित अन्य सभी जनप्रतिनिधियों से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि विकास के दावे करने के साथ-साथ सिरोही की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए भी ठोस पहल करना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते संरक्षण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इस धरोहर को केवल तस्वीरों में ही देख पाएंगी।
तत्काल कार्रवाई की मांग
नागरिकों ने जिला कलेक्टर और नगर परिषद प्रशासन से तत्काल एक विशेष सफाई अभियान चलाने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, उन्होंने बावड़ी का जीर्णोद्धार कराने, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और इसे पर्यटन व धार्मिक दृष्टि से विकसित करने की भी मांग की है।
एक अनसुलझा सवाल
लोगों का मानना है कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और जनप्रतिनिधियों का भी नैतिक दायित्व है। अब सवाल यह उठता है कि क्या जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी सिरोही की इस ऐतिहासिक धरोहर की पुकार सुनेंगे, या फिर चंपावती बावड़ी यूं ही उपेक्षा की धूल में अपना अस्तित्व खोती रहेगी?