सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले के आबूरोड सदर थाना क्षेत्र से खाकी को शर्मसार करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। यहाँ कानून के रखवालों पर ही एक गरीब मजदूर के साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट करने का आरोप लगा है। पीड़ित मजदूर ने अब जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पास पहुँचकर न्याय की गुहार लगाई है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह घटना पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है।
पुलिस की बर्बरता: मजदूर की पिटाई: सिरोही में पुलिसकर्मियों की गुंडागर्दी: हेलमेट के नाम पर मांगे पैसे, मना करने पर मजदूर को बेरहमी से पीटा
सिरोही के आबूरोड में दो पुलिसकर्मियों द्वारा एक मजदूर के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि हेलमेट न होने पर रिश्वत न देने पर उसे बुरी तरह पीटा गया और डायल-100 से भी मदद नहीं मिली।
HIGHLIGHTS
- सिरोही के आबूरोड सदर थाना क्षेत्र में दो पुलिसकर्मियों पर मारपीट का गंभीर आरोप। मजदूर भरतराम से हेलमेट न पहनने के एवज में मांगे गए थे 1000 रुपये। पैसे देने से मना करने पर नशे की हालत में पुलिसकर्मियों ने की बर्बरतापूर्ण मारपीट। पीड़ित ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार, डायल-100 की टीम पर भी लगाया लापरवाही का आरोप।
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हेलमेट के नाम पर अवैध वसूली का प्रयास
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित भरतराम पुत्र मावाराम गरासिया, जो कि पटेलफली (गणका-आबूरोड) का निवासी है, ने अपने परिवाद में घटना का विस्तार से वर्णन किया है। भरतराम ने बताया कि गत 27 फरवरी की रात वह मजदूरी का काम खत्म करके मावल से अपने पिता के पास खेत पर जा रहा था। जब वह तलहटी के समीप पहुँचा, तो वहाँ नशे की हालत में दो पुलिसकर्मी, जिनकी पहचान अशोक और दिनेश के रूप में हुई है, ने उसे रुकवाया।
पुलिसकर्मियों ने भरतराम को हेलमेट नहीं पहनने के कारण टोका। आरोप है कि उन्होंने चालान काटने के बजाय उससे सीधे 1000 रुपये की मांग की। जब मजदूर ने पैसे देने में असमर्थता जताई और नियमानुसार चालान काटने की बात कही, तो दोनों पुलिसकर्मी आगबबूला हो गए। उन्होंने भरतराम के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और देखते ही देखते उसे बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।
नशे की हालत में पुलिसकर्मियों का तांडव
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पीड़ित का आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मी शराब के नशे में धुत थे। उन्होंने उसे मारते-मारते सड़क से काफी दूर तक ले गए। मारपीट इतनी गंभीर थी कि भरतराम के पैरों और जांघों पर गहरे जख्म बन गए हैं। जब वह दर्द से कराहते हुए जमीन पर गिर गया और हिलने-डुलने की स्थिति में नहीं रहा, तब जाकर पुलिसकर्मियों ने उसे छोड़ा। वर्तमान में पीड़ित की स्थिति ऐसी है कि उसे बैठने, उठने और चलने-फिरने में भी भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
डायल-100 की निष्क्रियता और सिस्टम की विफलता
इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह रहा कि पीड़ित को पुलिस सहायता तंत्र से भी कोई मदद नहीं मिली। जमीन पर गिरे हुए ही भरतराम ने किसी तरह अपने फोन से 100 नंबर पर डायल कर मदद मांगी। सूचना मिलने पर एक महिला पुलिसकर्मी मौके पर पहुँची। जैसे ही महिला पुलिसकर्मी वहाँ आई, आरोपी पुलिसकर्मी अशोक और दिनेश मौके से फरार हो गए।
हैरानी की बात यह है कि मदद के लिए पहुँची महिला पुलिसकर्मी ने भी पीड़ित की कोई सहायता नहीं की और न ही उन आरोपी पुलिसकर्मियों को रोकने का प्रयास किया। पीड़ित का आरोप है कि अब पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले को रफा-दफा करने और आपसी सुलह कराने की कोशिशों में जुटा हुआ है। न्याय न मिलता देख पीड़ित ने अब उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर पुलिस के प्रति आक्रोश पैदा कर दिया है।
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