सिरोही। निकाय चुनाव 2026 का रण अब सिरोही और शिवगंज में पूरी तरह सज चुका है। मुकाबला सिर्फ पार्षदों की जीत-हार का नहीं, बल्कि दोनों प्रमुख दलों के दिग्गजों की राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी बनता दिखाई दे रहा है।
सिरोही-शिवगंज में किसका बजेगा डंका?: भाजपा के दिग्गजों की साख दांव पर, लोढ़ा ने संभाली कांग्रेस की कमान
सिरोही और शिवगंज निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई छिड़ गई है। भाजपा जिलाध्यक्ष की गृह नगरपालिका शिवगंज पर सबकी नजरें हैं, वहीं पूर्व विधायक संयम लोढ़ा कांग्रेस की रणनीति बना रहे हैं।
HIGHLIGHTS
- सिरोही निकाय चुनाव 2026 | नगर परिषद सिरोही और नगरपालिका शिवगंज में सियासी मुकाबला रोचक
- शिवगंज भाजपा जिलाध्यक्ष की गृह नगरपालिका है, जहां भाजपा के लिए जीतना महत्वपूर्ण है।
- कांग्रेस की कमान पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने संभाली है, जो दोनों क्षेत्रों में रणनीति बना रहे हैं।
- पिछली बार दोनों निकायों में कांग्रेस के बोर्ड थे, जिसे बचाने की चुनौती कांग्रेस के सामने है।
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सबसे ज्यादा नजर शिवगंज नगरपालिका पर है, जो भाजपा जिलाध्यक्ष की गृह नगरपालिका है। ऐसे में बड़ा सवाल है—क्या इस बार शिवगंज में भाजपा अपना बोर्ड बनाने में सफल होगी या कांग्रेस का दबदबा बरकरार रहेगा?
दूसरी ओर कांग्रेस ने भी मोर्चा पूरी ताकत से संभाल लिया है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा सिरोही नगर परिषद और शिवगंज नगरपालिका दोनों क्षेत्रों में कांग्रेस की चुनावी रणनीति को धार देते नजर आ रहे हैं। हालिया बैठक में लोढ़ा ने कार्यकर्ताओं को घर-घर पहुंचकर चुनावी माहौल बनाने का आह्वान भी किया है।
भाजपा के तीन दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
सिरोही विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के लिए यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि क्षेत्र से जुड़े राज्यमंत्री, भाजपा जिलाध्यक्ष और सांसद—तीनों के लिए यह चुनावी परीक्षा जैसा है।
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खासकर शिवगंज भाजपा जिलाध्यक्ष की गृह नगरपालिका होने के कारण यहां का परिणाम राजनीतिक रूप से बड़ा संदेश देगा। अगर भाजपा बोर्ड बनाने में कामयाब होती है तो इसे संगठन की मजबूती और स्थानीय नेतृत्व की बड़ी जीत माना जाएगा। वहीं अगर कांग्रेस अपना बोर्ड बचाने में सफल रहती है तो भाजपा के लिए सवाल खड़े होना तय है।
कांग्रेस के सामने बोर्ड बचाने की चुनौती
सिरोही और शिवगंज में पिछली बार कांग्रेस के बोर्ड बने थे। ऐसे में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पुराने किले को बचाने की है।
संयम लोढ़ा के सक्रिय होने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस पुराने प्रदर्शन को दोहरा पाएगी या भाजपा इस बार सत्ता परिवर्तन का रास्ता तैयार करेगी?
टिकट बंटवारा बनेगा सबसे बड़ा फैक्टर
चुनाव से पहले दोनों दलों में टिकट के दावेदारों की लंबी कतार है। ऐसे में प्रत्याशी चयन, बगावत, भीतरघात और निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
कांग्रेस ने टिकट प्रक्रिया में जिला स्तर को अधिक अधिकार देने की रणनीति अपनाई है, जबकि भाजपा में भी टिकट वितरण को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है।
अब जनता के फैसले का इंतजार
सिरोही और शिवगंज में इस बार मुकाबला सीधे तौर पर भाजपा बनाम कांग्रेस से आगे बढ़कर प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता दिखाई दे रहा है।
क्या भाजपा शिवगंज में अपना बोर्ड बनाने के साथ सिरोही में भी कांग्रेस के किले को ढहा पाएगी?
या फिर संयम लोढ़ा की रणनीति के आगे भाजपा के दिग्गजों की पूरी ताकत बेअसर साबित होगी?
सिरोही-शिवगंज का चुनावी परिणाम सिर्फ दो निकायों के बोर्ड तय नहीं करेगा, बल्कि आने वाले दिनों में जिले की सियासत का मूड भी तय करेगा।