जयपुर | एसएमएस अस्पताल में नशा मुक्ति के मरीजों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अस्पताल में डॉक्टर मरीजों को सलाह तो देते हैं, लेकिन भर्ती की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
एसएमएस अस्पताल में नशा मुक्ति वार्ड: एसएमएस अस्पताल: नशा मुक्ति वार्ड बंद होने से मरीज परेशान
जयपुर के एसएमएस अस्पताल में नशा मुक्ति वार्ड बंद होने से मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। रोजाना आने वाले सैकड़ों मरीजों को भर्ती के लिए चार किलोमीटर दूर मनोचिकित्सालय जाना पड़ता है, जिससे उपचार प्रभावित हो रहा है।
HIGHLIGHTS
- एसएमएस अस्पताल का नशा मुक्ति वार्ड सितंबर 2020 से बंद है।
- रोजाना 150 से 180 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए आते हैं।
- गंभीर मरीजों को चार किलोमीटर दूर मनोचिकित्सालय जाना पड़ता है।
- अस्पताल प्रशासन जल्द ही वार्ड दोबारा शुरू करने की बात कह रहा है।
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इलाज के बजाय यात्रा का अनुभव
एसएमएस अस्पताल के बांगड़ परिसर में पहले 20 बेड का नशा मुक्ति वार्ड संचालित होता था। सितंबर 2020 में कोरोना काल के दौरान इसे अस्थायी तौर पर मनोचिकित्सालय शिफ्ट किया गया था।
छह साल बीत जाने के बाद भी यह वार्ड वापस नहीं लौट सका है। रोजाना आने वाले सैकड़ों मरीजों में से कई को तत्काल भर्ती की जरूरत होती है, लेकिन उन्हें सिस्टम के कारण परेशानी झेलनी पड़ रही है।
मरीजों को करना पड़ रहा है सफर
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भर्ती होने के लिए मरीजों को चार किलोमीटर दूर सेठी कॉलोनी स्थित मनोचिकित्सालय जाना पड़ता है। वार्ड नहीं होने से गंभीर मरीजों के इलाज में बाधा आ रही है।
कई मरीज मनोचिकित्सालय में भर्ती होने से हिचकते हैं। इससे उनका उपचार प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़
वर्तमान में धनवंतरि ब्लॉक स्थित नशा मुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य ओपीडी में रोजाना 150 से 180 मरीज आते हैं। इनमें से 5 से 8 मरीजों को तत्काल भर्ती करने की जरूरत होती है।
अस्पताल में भर्ती की सुविधा नहीं होने से इन मरीजों को दर-दर भटकना पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार, नशे की लत से ग्रस्त मरीजों में लिवर, किडनी और हार्ट संबंधी बीमारियां भी होती हैं।
एसएमएस में सुविधाओं का लाभ नहीं
एसएमएस में भर्ती रहने पर गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और मेडिसिन विभागों की मदद तुरंत मिल सकती है। यहां सोनोग्राफी, सीटी स्कैन और आईसीयू जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
अस्पताल प्रशासन जगह की कमी को वार्ड बंद होने की मुख्य वजह बताता रहा है। दिवाली तक कार्डियक टावर में आईपीडी शुरू होने के बाद बांगड़ परिसर में वार्ड खाली होने की संभावना है।
अस्पताल में नशा मुक्ति वार्ड की जरूरत है। जगह की कमी के कारण दिक्कत आ रही है। जल्द ही इसके लिए जगह तलाशकर वार्ड शुरू करेंगे।
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