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भारत

भारत-यूके हाइब्रिड विमानन परियोजना: टीडीबी-डीएसटी ने उन्नत हाइब्रिड प्रणोदन के लिए गुरुग्राम की केसी एविएशन को दिया समर्थन: भारत-यूके सहयोगात्मक पहल

मानवेन्द्र जैतावत

टीडीबी ने गुरुग्राम स्थित केसी एविएशन के साथ 'बूस्ट इलेक्ट्रिक जंप टेक-ऑफ' परियोजना के लिए समझौता किया है। यह पहल भारत-यूके सहयोग के तहत हाइब्रिड विमानन और मानवरहित हवाई प्रणालियों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

HIGHLIGHTS

  • प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने गुरुग्राम की केसी एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ बीई-जेटीओ परियोजना हेतु समझौता किया।
  • यह परियोजना भारत-यूके सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के अंतर्गत एक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य मानवरहित और हल्के विमानों के लिए उन्नत हाइब्रिड प्रणोदन और जंप टेक-ऑफ प्रणाली विकसित करना है।
  • उत्तर भारत में पहली बार स्टार्टअप्स के लिए एक समर्पित रोटरक्राफ्ट प्रणोदन परीक्षण बेंच सुविधा स्थापित की जाएगी।
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गुरुग्राम | भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत आने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने विमानन क्षेत्र में एक बड़ी पहल की है। बोर्ड ने गुरुग्राम स्थित केसी एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ “बूस्ट इलेक्ट्रिक जंप टेक-ऑफ (बीई-जेटीओ)” नामक महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह परियोजना औद्योगिक स्थिरता के लिए भारत-यूके सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए यूके स्थित एआरसी एयरोसिस्टम्स लिमिटेड के साथ साझेदारी की गई है।

उन्नत हाइब्रिड प्रणोदन तकनीक का विकास

टीडीबी द्वारा समर्थित यह परियोजना मुख्य रूप से उन्नत हाइब्रिड प्रणोदन आधारित जंप टेक-ऑफ (जेटीओ) प्रणाली के विकास पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य मानव रहित और हल्के विमान प्लेटफार्मों की परिचालन क्षमताओं को पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ और प्रभावी बनाना है। इस परियोजना के माध्यम से रोटरक्राफ्ट प्रणोदन प्रणालियों के सत्यापन के लिए एक समर्पित परीक्षण बेंच सुविधा की स्थापना की जाएगी। यह बुनियादी ढांचा अगली पीढ़ी की एरियल मोबिलिटी प्रौद्योगिकियों के परीक्षण और उनके अनुकूलन के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

लचीलापन और वर्टिकल टेक-ऑफ क्षमताएं

प्रस्तावित समाधान हाइब्रिड प्रणोदन प्रौद्योगिकियों का एकीकरण करता है, जिससे जाइरोकोप्टर और मानवरहित हवाई प्रणालियों के लिए लघु टेक-ऑफ संभव होगा। यह तकनीक लगभग ऊर्ध्वाधर (वर्टिकल) टेक-ऑफ क्षमताएं प्रदान करती है, जिससे टेक-ऑफ के लिए आवश्यक रनवे की दूरी काफी कम हो जाती है। परिचालन लचीलेपन में इस सुधार से विशेष रूप से भारत के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में विमानों का संचालन आसान हो जाएगा।

विविध क्षेत्रों में अनुप्रयोग

इस तकनीक के विकसित होने से क्षेत्रीय संपर्क, आपदा प्रतिक्रिया और चिकित्सीय आपातकालीन निकासी जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। इसके प्रमुख अनुप्रयोगों में शामिल हैं:

  • दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सा आपूर्ति और आपातकालीन निकासी।
  • बाढ़ या भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया।
  • मानव रहित लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की कुशल प्रणाली।
  • रणनीतिक निगरानी और सुरक्षा अभियानों में सहायता।

स्टार्टअप्स के लिए नया पारिस्थितिकी तंत्र

परियोजना का एक अन्य बड़ा लक्ष्य उत्तर भारत में अपनी तरह की पहली उन्नत प्रणोदन परीक्षण सुविधा स्थापित करना है। यह सुविधा मानव रहित और उन्नत एरियल मोबिलिटी प्रणालियों पर काम कर रहे नए स्टार्टअप्स और डेवलपर्स को एक मान्य बुनियादी ढांचा प्रदान करेगी। केसी एविएशन एक नवस्थापित एयरोस्पेस उद्यम है, जो उद्योग और अनुसंधान संस्थानों की विशेषज्ञता को एक साथ लाकर विमानन क्षेत्र की जरूरतों को पूरा कर रहा है।

रणनीतिक महत्व और भविष्य की राह

टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने इस अवसर पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग रणनीतिक क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीकों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हाइब्रिड प्रणोदन में नवाचार भारत की क्षेत्रीय वायु गतिशीलता को मजबूत करेगा और टिकाऊ विमानन समाधानों में योगदान देगा। केसी एविएशन के प्रवर्तकों ने सरकार के इस समर्थन के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह परियोजना तकनीक के वास्तविक सत्यापन को गति प्रदान करेगी।

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