कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख Mamata Banerjee ने संगठन में बड़े बदलाव की शुरुआत कर दी है। पार्टी ने सभी स्तरों की संगठनात्मक समितियों को तत्काल प्रभाव से भंग करने का फैसला लिया है। इस संबंध में टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक आधिकारिक पत्र जारी कर जानकारी दी।
संगठनात्मक समितियां तत्काल प्रभाव से भंग: पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद टीएमसी का बड़ा फैसला
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पार्टी के अनुसार, चुनावी परिणामों की व्यापक समीक्षा, संगठनात्मक मूल्यांकन और आत्ममंथन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद संगठन का नए सिरे से पुनर्गठन किया जाएगा। टीएमसी ने कहा कि पार्टी को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी
हालांकि पार्टी ने समितियों को भंग करने के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे हालिया चुनावी हार और संगठन के भीतर उभरी चुनौतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि टीएमसी नेतृत्व संगठन को पुनर्गठित कर कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना चाहता है और पार्टी पर अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहता है।
एक दिन पहले ममता बनर्जी ने किया था धरना प्रदर्शन
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इससे पहले मंगलवार को Mamata Banerjee ने कोलकाता में धरना-प्रदर्शन किया था, जिसमें Abhishek Banerjee समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ताओं पर लगातार अत्याचार किए जा रहे हैं और हाल ही में अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।
धरने के दौरान ममता बनर्जी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह तब तक संघर्ष जारी रखेंगी जब तक भाजपा को सत्ता से बाहर नहीं कर देतीं।
चुनावी हार के बाद बढ़ी संगठनात्मक चुनौतियां
चुनावी नतीजों के बाद टीएमसी को संगठनात्मक स्तर पर भी झटके लगे हैं। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने पार्टी से इस्तीफा दिया है। हाल ही में पार्टी ने अपने दो विधायकों को कथित तौर पर पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में निष्कासित भी किया।