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भारत

रूस से डीजल समझौता: ट्रंप का रूस से डीजल समझौता, अमेरिका में सियासी घमासान

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से डीजल समझौता करने पर अमेरिका में विवाद शुरू हो गया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत जैसे देशों को ऊर्जा संकट से बचाने के लिए प्रतिबंध 60 दिनों के लिए हटाए गए हैं।

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HIGHLIGHTS

  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध के बीच रूस के साथ डीजल समझौता किया है।
  • ट्रंप की अपनी ही पार्टी के सांसद रूस से प्रतिबंध हटाने को लेकर उनके खिलाफ खड़े हुए।
  • मार्को रुबियो के मुताबिक भारत को तेल संकट से बचाने के लिए प्रतिबंध 60 दिन हटाए गए।
  • रूस शांत नहीं बैठने वाला है और वह किसी न किसी तरह अपना डीजल बेचेगा।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूक्रेन युद्ध के बीच रूस के साथ डीजल समझौता किए जाने के बाद देश में तीव्र राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है।

रूस से प्रतिबंध हटाने के निर्णय का विरोध इतना बढ़ गया है कि ट्रंप की अपनी ही पार्टी के कई सांसद अब उनके फैसले के खिलाफ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

विदेश मंत्री मार्को रुबियो का डैमेज कंट्रोल

इस सियासी विवाद के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रतिबंध हटाने के फैसले का बचाव किया है।

रुबियो ने खुलासा किया कि भारत जैसे सहयोगी देशों को तेल संकट से सुरक्षित रखने के लिए रूस पर से प्रतिबंध 60 दिनों के लिए हटाए गए हैं।

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि विश्व भर में एक साथ कई युद्ध चल रहे हैं, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है।

वैश्विक संघर्ष और तेल की बढ़ती कीमतें

मार्को रुबियो ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में दुनिया में तीन बड़े संघर्ष जारी हैं:

  • ईरान से जुड़ा युद्ध
  • सऊदी अरब पर होने वाले हूती हमले
  • यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध

रुबियो के अनुसार ये तीनों संघर्ष एक-दूसरे से टकरा रहे हैं, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बहुत तेजी से ऊपर जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी विकट स्थिति में प्रतिबंधों को लगातार जारी रखना दुनिया के लिए और अधिक महंगा साबित हो सकता है।

भारतीय ऊर्जा जरूरतों पर रुबियो का बयान

प्रेस से बातचीत के दौरान मार्को रुबियो ने विशेष तौर पर भारत का उल्लेख करते हुए उसकी ऊर्जा स्थिति को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि भारत ने विभिन्न देशों से तेल खरीदकर अपनी जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया है, लेकिन वह अभी भी रूसी तेल पर काफी निर्भर है।

रुबियो ने जोर देकर कहा कि एक ही दिन में पूरे ऊर्जा सिस्टम को बदल पाना किसी भी देश के लिए बिल्कुल आसान नहीं होता है।

सहयोगी देशों की सुरक्षा की दलील

विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका को अपने सहयोगी देशों के हितों पर भी लगातार ध्यान रखना पड़ता है।

अगर प्रतिबंधों को तुरंत बेहद सख्त किया जाता, तो भारत जैसे मित्र देशों को अत्यधिक महंगा तेल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता।

प्रतिबंधों के प्रभाव पर बड़ा खुलासा

मार्को रुबियो ने रूस की रणनीति पर खुलकर बात करते हुए एक अहम बयान दिया।

रूस अपना डीजल किसी न किसी तरीके से बेचेगा ही, वह शांत नहीं बैठने वाला है। फर्क सिर्फ इतना है कि अमेरिका को उसमें कितना हिस्सा मिलेगा। प्रतिबंध लगाने से रूस का नुकसान उतना नहीं होता जितना वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ जाती है।

उन्होंने अंत में स्पष्ट किया कि कड़े प्रतिबंधों से रूस को बड़ा नुकसान होने के बजाय वैश्विक बाजार में अस्थिरता का जोखिम कहीं अधिक बढ़ जाता है।

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