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खेल

तूलिका मान सस्पेंड!: CWG 2026 से पहले तूलिका मान सस्पेंड, डोपिंग का साया

बलजीत सिंह शेखावत

भारत की स्टार जूडोका तूलिका मान को ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से ठीक पहले NADA ने 'वेयरअबाउट्स फेलियर' के कारण प्रोविजनल रूप से सस्पेंड कर दिया है।

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HIGHLIGHTS

  • CWG 2026 से पहले भारत की स्टार जूडोका तूलिका मान सस्पेंड।
  • नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) ने प्रोविजनल सस्पेंशन लगाया है।
  • कार्रवाई का कारण 'वेयरअबाउट्स फेलियर' बताया गया है।
  • तूलिका 12 महीनों में तीन बार लोकेशन की जानकारी देने में विफल रहीं।
tulika maan suspended by nada before commonwealth games 2026

CWG 2026 से पहले भारत को बड़ा झटका

भारतीय खेल जगत के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से ठीक पहले, भारत की स्टार जूडोका तूलिका मान को नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) द्वारा अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।

यह निलंबन भारत के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि तूलिका महिला +78kg जूडो कैटेगरी में पदक की सबसे प्रबल दावेदारों में से एक थीं। इस फैसले के बाद अब वह ग्लासगो के लिए उड़ान नहीं भर पाएंगी।

क्यों निलंबित हुईं तूलिका मान?

नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) ने तूलिका मान पर यह कड़ी कार्रवाई 'वेयरअबाउट्स फेलियर' (Whereabouts failure) के आधार पर की है। यह एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन का एक गंभीर मामला है।

इस नियम के तहत, एथलीटों को डोपिंग परीक्षण के लिए अपनी लोकेशन की जानकारी देना अनिवार्य होता है।

क्या है 'वेयरअबाउट्स फेलियर' का नियम?

एंटी-डोपिंग नियमों के अनुसार, हर एथलीट को आउट-ऑफ-कंपटीशन टेस्टिंग के लिए अपनी लोकेशन और एक घंटे की टाइमिंग विंडो की जानकारी NADA को देनी होती है। यह जानकारी अपडेट रखना एथलीट की जिम्मेदारी है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डोपिंग रोधी अधिकारी किसी भी समय एथलीट का परीक्षण कर सकें।

तूलिका से कहाँ हुई चूक?

रिपोर्ट के अनुसार, तूलिका मान पिछले 12 महीनों के दौरान तीन बार यह जानकारी अपडेट करने में विफल रहीं।

इसके अलावा, यह भी हो सकता है कि जब टेस्टिंग अधिकारी बताई गई जगह पर पहुंचे, तो वह वहां मौजूद नहीं थीं।

वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) के नियमों के तहत, 12 महीने की अवधि में तीन बार ऐसा होना एंटी-डोपिंग नियम का उल्लंघन माना जाता है, जिसके परिणामस्वरूप निलंबन की कार्रवाई होती है। तूलिका का मामला इसी नियम के अंतर्गत आता है।

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