वाशिंगटन | अरब सागर इन दिनों एक भीषण युद्ध जैसी तैयारी का केंद्र बन गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक व्यापक समुद्री नाकेबंदी शुरू की है।
ईरान की नाकेबंदी: अमेरिका का एक्शन: अरब सागर में अमेरिका की महा-नाकेबंदी: ईरान के बंदरगाहों को घेरा, USS अब्राहम लिंकन तैनात
अमेरिका ने अरब सागर में ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य घेराबंदी शुरू कर दी है। USS अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में 10,000 सैनिकों और 100 विमानों ने ईरान के समुद्री रास्तों को सील कर दिया है।
HIGHLIGHTS
- USS अब्राहम लिंकन और 12 जंगी जहाजों ने अरब सागर में ईरान की घेराबंदी की।
- ऑपरेशन में 10,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक और 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान शामिल हैं।
- F-35C स्टेल्थ जेट्स और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर से लैस है यह अमेरिकी बेड़ा।
- राष्ट्रपति ट्रंप ने नाकेबंदी की सराहना करते हुए इसे बेहद सफल ऑपरेशन बताया।
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इस ऑपरेशन ने वैश्विक राजनीति और सामरिक संतुलन को हिलाकर रख दिया है। अमेरिकी सेना का सबसे शक्तिशाली युद्धपोत USS अब्राहम लिंकन वहां डटा हुआ है।
CENTCOM की बड़ी सैन्य घेराबंदी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस अभियान में 10,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
इस बेड़े में 12 से अधिक नौसेना के जहाज और 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान शामिल हैं। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों को पूरी तरह घेर लिया है।
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CENTCOM ने स्पष्ट किया है कि ईरान के तटों पर आने-जाने वाले हर जहाज की गहन तलाशी ली जाएगी। कोई भी जहाज इस घेरे से बच नहीं पाएगा।
USS अब्राहम लिंकन: एक तैरता किला
USS अब्राहम लिंकन कोई साधारण युद्धपोत नहीं है। यह एक चलता-फिरता एयरबेस है, जो अत्याधुनिक घातक हथियारों से पूरी तरह लैस है।
इस जहाज पर आठ F-35C स्टेल्थ लड़ाकू विमान तैनात हैं। ये विमान रडार की नजर में आए बिना दुश्मन पर सटीक हमला करने में सक्षम हैं।
इसके साथ ही कई अन्य विमान भी तैनात हैं:
- F/A-18 सुपर हॉर्नेट जेट
- इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट
- MH-60 सीहॉक हेलीकॉप्टर
इस एक पोत की मारक क्षमता अतुलनीय है और किसी छोटे देश की वायुसेना के बराबर है।
ट्रंप का कड़ा रुख और हॉर्मुज स्ट्रेट
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई की खुलकर प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना वहां अद्भुत और शानदार काम कर रही है।
ट्रंप के मुताबिक, अब कोई भी जहाज अमेरिकी नेवी की अनुमति के बिना वहां से गुजरने की हिम्मत नहीं कर पाएगा। सुरक्षा घेरा बहुत मजबूत है।
हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं किया गया है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए खुला रहेगा।
सुरक्षा और तनाव की मुख्य वजह
USS डेल्बर्ट डी ब्लैक जैसा गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी इस ऑपरेशन का हिस्सा है। यह ईरानी समुद्री गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रहा है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसका क्षेत्रीय प्रभाव अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। अब अमेरिका कूटनीति से आगे बढ़कर सीधे सैन्य दबाव बना रहा है।
यह नाकेबंदी मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को बदलने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस समुद्री तनाव और इसके परिणामों पर टिकी हैं।
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