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वड़ा पाव गर्ल का बड़ा खुलासा: वड़ा पाव गर्ल चंद्रिका दीक्षित का छलका दर्द: 15 दिन के बच्चे को छोड़ की 12 घंटे नौकरी, सास ने किया था रिजेक्ट

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दिल्ली की मशहूर वड़ा पाव गर्ल चंद्रिका दीक्षित ने अपनी निजी जिंदगी के संघर्षों पर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे सास की शर्त के कारण उन्हें अपने नवजात बच्चे को छोड़कर काम करना पड़ा।

HIGHLIGHTS

  • चंद्रिका दीक्षित की सास ने शादी के बाद उन्हें अपनाने से इनकार कर दिया था।
  • मजबूरी में चंद्रिका को अपने 15 दिन के बच्चे को क्रेच में छोड़कर नौकरी करनी पड़ी।
  • हल्दीराम में 12 घंटे की शिफ्ट के बाद उन्होंने घर का गुजारा चलाया।
  • मिस्ट्री मैन सैफी के साथ अफेयर की खबरों पर चंद्रिका ने चुप्पी तोड़ी है।
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नई दिल्ली | दिल्ली की सड़कों पर वड़ा पाव बेचकर रातों-रात सोशल मीडिया सेंसेशन बनने वाली चंद्रिका दीक्षित एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी कहानी जितनी फिल्मी लगती है, उसके पीछे का संघर्ष उतना ही गहरा और दर्दनाक है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान चंद्रिका ने अपनी निजी जिंदगी के उन पन्नों को पलटा है, जिनके बारे में दुनिया को अब तक जानकारी नहीं थी।

रिश्तों में आई कड़वाहट और सास की शर्त

चंद्रिका दीक्षित ने बताया कि उनकी शादी के शुरुआती दिन बहुत ही चुनौतीपूर्ण थे। उनके पति युगम गेरा के साथ उनका रिश्ता आज भले ही मुश्किल दौर में हो, लेकिन शुरुआत से ही परिवार का समर्थन उन्हें नहीं मिला था। चंद्रिका के अनुसार, उनकी सासू मां ने उन्हें बहू के रूप में स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था।

सास की तरफ से एक सख्त शर्त रखी गई थी कि जब तक वह खुद के पैरों पर खड़ी नहीं हो जातीं, तब तक उन्हें परिवार का हिस्सा नहीं माना जाएगा। इस वजह से शादी के बाद भी चंद्रिका और युगम को अलग रहना पड़ा। चंद्रिका का कहना है कि उन्हें अपना वजूद साबित करने के लिए अकेले ही संघर्ष की राह चुननी पड़ी।

15 दिन का बच्चा और 12 घंटे की नौकरी

जिंदगी का सबसे कठिन समय तब आया जब चंद्रिका मां बनीं। उन्होंने खुलासा किया कि जब उनका बेटा मात्र 15 दिन का था, तब उन्हें काम पर वापस लौटना पड़ा। आर्थिक तंगी और परिवार के दबाव के कारण उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। उन्हें अपने कलेजे के टुकड़े को एक क्रेच में छोड़ना पड़ा।

चंद्रिका ने बताया कि वह उस वक्त हल्दीराम में 12 घंटे की लंबी शिफ्ट किया करती थीं। एक तरफ उनका छोटा बच्चा मां की ममता के लिए तरसता था, तो दूसरी तरफ चंद्रिका को घर चलाने के लिए पसीना बहाना पड़ता था। वह किराए के मकान में रहती थीं और हर दिन का खर्च उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी।

सवालों के घेरे में आज का काम

आज जब चंद्रिका वड़ा पाव बेचकर सफल हो चुकी हैं, तो कई लोग उन पर सवाल उठाते हैं। इस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब वह 15 दिन के बच्चे को छोड़कर 12 घंटे काम करती थीं, तब किसी ने उनकी मदद नहीं की। आज जब वह अपने दम पर कुछ कर रही हैं, तो दुनिया को उनसे दिक्कत हो रही है।

कोरोना काल और वड़ा पाव का सफर

वड़ा पाव का ठेला लगाने की शुरुआत के पीछे की कहानी भी बेहद भावुक है। चंद्रिका ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान जब सब कुछ बंद हो गया, तब उनके पति युगम रैपिडो चलाकर घर का खर्च चलाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन वह कमाई घर का किराया और बच्चे की दवाइयों के लिए काफी नहीं थी।

बच्चा अक्सर बीमार रहता था और डॉक्टर के भारी-भरकम खर्चे चंद्रिका को परेशान करते थे। इसी मजबूरी में उन्होंने सड़क पर ठेला लगाने का फैसला किया। उन्हें लगा कि अगर वह हाथ पर हाथ धरे बैठी रहीं, तो उनका बच्चा भूखा सो जाएगा। इसी हिम्मत ने उन्हें आज दिल्ली की सबसे मशहूर 'वड़ा पाव गर्ल' बना दिया है।

मिस्ट्री मैन सैफी और अफेयर का सच

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर यह चर्चा गरम है कि चंद्रिका का सैफी नामक एक 'मिस्ट्री मैन' के साथ अफेयर चल रहा है। लोगों का मानना है कि इसी वजह से उनके और पति युगम के बीच दूरियां आई हैं। इस मुद्दे पर चंद्रिका और सैफी दोनों ने पहली बार खुलकर बात की है।

सैफी ने इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि उनके और चंद्रिका के बीच केवल गहरी दोस्ती है। उन्होंने कहा कि दुनिया भले ही इसे मोहब्बत का नाम दे, लेकिन वे एक-दूसरे के बेहतरीन दोस्त हैं। चंद्रिका ने भी इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि सैफी और उनके विचार काफी मिलते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे से इमोशनली कनेक्ट कर पाते हैं।

अकेलेपन की लड़ाई और भविष्य

चंद्रिका का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ खोया है। आज वह जो कुछ भी हैं, अपने संघर्ष के दम पर हैं। पति के साथ रिश्तों में आई दरार ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ा जरूर है, लेकिन वह अपने बच्चे के भविष्य के लिए हार मानने को तैयार नहीं हैं।

उनका कहना है कि वह समाज की परवाह किए बिना अपने काम पर ध्यान देना चाहती हैं। वह चाहती हैं कि उनके बच्चे को वह सब मिले जो उन्हें नहीं मिल पाया। चंद्रिका की यह कहानी दिखाती है कि सफलता के पीछे हमेशा चमक-धमक नहीं, बल्कि आंसुओं और पसीने की एक लंबी दास्तान होती है।

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