नई दिल्ली | आजकल आंखों में सूखापन, जलन या खुजली होना एक आम समस्या बन गई है। जैसे ही हमारी आंखें सूखने लगती हैं, हम इसका सारा दोष मोबाइल, लैपटॉप या टीवी पर डाल देते हैं। बेशक, लंबा स्क्रीन टाइम एक बड़ी वजह है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे कुछ छिपे हुए कारण भी हो सकते हैं?
आंखें बार-बार सूखती हैं? फोन नहीं, ये 5 आदतें हैं जिम्मेदार
स्क्रीन टाइम के अलावा, आई स्पेशलिस्ट ने बताए आंखों में सूखेपन के 5 बड़े कारण, जिनसे आप अब तक अनजान थे।
HIGHLIGHTS
- एसी या पंखे की सीधी हवा रातभर में आंखों की प्राकृतिक नमी को सुखा देती है।
- हाई ब्लड प्रेशर, एलर्जी और डिप्रेशन की कुछ दवाइयां आंसू बनने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती हैं।
- कांटेक्ट लेंस का लंबे समय तक इस्तेमाल या खराब क्वालिटी आंखों तक ऑक्सीजन पहुंचने से रोकती है।
- खराब क्वालिटी के मेकअप प्रोडक्ट्स आंखों में तेल बनाने वाली ग्रंथियों को ब्लॉक कर सकते हैं।
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आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर हेमलता यादव के अनुसार, हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी आंखों की नमी को खत्म कर सकती हैं। इन कारणों पर अक्सर हमारा ध्यान नहीं जाता, लेकिन ये हमारी आंखों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं।
फोन के अलावा ड्राई आई के 5 प्रमुख कारण
आइए उन पांच प्रमुख कारणों के बारे में जानते हैं जो स्क्रीन टाइम के अलावा आपकी आंखों में सूखेपन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
1. एसी और पंखे की सीधी हवा
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गर्मियों में एसी या तेज पंखे की हवा में सोना आरामदायक लगता है, लेकिन यह आपकी आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
जब रातभर एसी या पंखे की सीधी हवा आपके चेहरे पर पड़ती है, तो यह आंखों की प्राकृतिक नमी और आंसूओं को तेजी से सुखा देती है। इसी वजह से सुबह उठने पर आंखें सूखी और लाल महसूस होती हैं।
2. कुछ खास दवाइयों का असर
यदि आप किसी बीमारी के लिए नियमित रूप से दवाइयां ले रहे हैं, तो यह भी ड्राई आई का एक कारण हो सकता है।
आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर हेमलता यादव के अनुसार, "हाई ब्लड प्रेशर, एलर्जी (एंटीहिस्टामाइन), डिप्रेशन या नींद की कुछ दवाइयां शरीर में तरल पदार्थ के निर्माण को प्रभावित करती हैं, जिससे आंखों में आंसू बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।"
इन दवाओं का सेवन करने से पहले डॉक्टर से इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में जरूर पूछें।
3. कांटेक्ट लेंस का गलत इस्तेमाल
जो लोग चश्मे की जगह कांटेक्ट लेंस पहनते हैं, उनमें ड्राई आई का खतरा अधिक होता है।
लंबे समय तक लेंस लगाए रखना, खराब क्वालिटी के लेंस का उपयोग करना या उनकी सफाई का ध्यान न रखना, आंखों तक ऑक्सीजन की सप्लाई को बाधित करता है। इससे आंसू बनाने वाली परत को नुकसान पहुंचता है।
4. बढ़ती उम्र और हार्मोनल बदलाव
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं, जिसका असर आंखों पर भी पड़ता है। 40-50 साल की उम्र के बाद, आंखों में आंसू बनने की क्षमता स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है।
खासकर महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण ड्राई आई की समस्या बहुत आम हो जाती है।
5. मेकअप प्रोडक्ट्स और आई लैशेज
काजल, आईलाइनर, मस्कारा या नकली आईलैशेज का इस्तेमाल भी आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है।
अगर मेकअप प्रोडक्ट्स अच्छी क्वालिटी के नहीं हैं या रात में सोने से पहले उन्हें ठीक से साफ नहीं किया जाता, तो वे आंखों के किनारों पर मौजूद तेल बनाने वाली ग्रंथियों (Meibomian Glands) को ब्लॉक कर देते हैं, जिससे सूखापन बढ़ता है।
ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षण
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, ड्राई आई सिंड्रोम के कुछ प्रमुख लक्षण हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है:
- नजर का धुंधला हो जाना।
- आंखों में लगातार जलन या चुभन महसूस होना।
- तेज रोशनी या धूप के प्रति संवेदनशीलता।
- आंखों से पानी बहना या सफेद डिस्चार्ज निकलना।
आंखों का स्वास्थ्य हमारी जीवनशैली से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। सिर्फ स्क्रीन टाइम को कम करना ही काफी नहीं है, बल्कि हमें अपनी अन्य आदतों पर भी ध्यान देना होगा। यदि आपको ड्राई आई के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे बेहतर कदम है।
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