नई दिल्ली | अक्सर लोग चक्कर आने या सिर घूमने को सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यह शरीर के भीतर छिपे किसी बड़े असंतुलन का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या वर्टिगो से जुड़ी हो सकती है। जब बिना चले भी दुनिया घूमने लगे, तो समझ लीजिए कि यह महज़ थकान नहीं है। यह आपके शरीर के आंतरिक संतुलन तंत्र में आई गड़बड़ी का नतीजा हो सकता है। इसे समझना और समय पर इलाज करना बेहद जरूरी है।
चक्कर आना महज़ कमज़ोरी नहीं: चक्कर आने की वजह सिर्फ कमज़ोरी नहीं, हो सकता है वर्टिगो
क्या आपको भी अक्सर चक्कर आते हैं? जानें वर्टिगो के लक्षण और उपाय।
HIGHLIGHTS
- वर्टिगो का सीधा संबंध कान से होता है, जो शरीर के संतुलन को नियंत्रित करता है।
- कान के कैल्शियम क्रिस्टल्स का खिसकना चक्कर आने का सबसे प्रमुख कारण माना जाता है।
- ब्लड प्रेशर और शुगर की दवाओं के साइड इफेक्ट्स से भी शरीर में असंतुलन हो सकता है।
- बैलेंस ट्रेनिंग और विशेष कसरतों के जरिए वर्टिगो की समस्या को जड़ से मिटाया जा सकता है।
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वर्टिगो और सामान्य चक्कर में क्या अंतर है?
लोग अक्सर चक्कर आने, सिर घूमने या शरीर में अस्थिरता महसूस होने को एक ही बात समझ लेते हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस में इनमें बारीक अंतर होता है। चलते समय संतुलन खोना दिमाग की नसों की गड़बड़ी हो सकती है।
इसके विपरीत, वर्टिगो का सीधा संबंध कान से होता है। कान ही हमारे शरीर का संतुलन नियंत्रित करता है। अगर आपको मतली, उल्टी या कान में सीटी बजने जैसे लक्षण हैं, तो यह वर्टिगो की समस्या हो सकती है।
कान की भूमिका और शारीरिक संतुलन
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हमारे कान के अंदरूनी हिस्से में ऐसे अंग होते हैं जो दिमाग को शरीर की स्थिति बताते हैं। जब इन अंगों में कोई बाधा आती है, तो दिमाग को गलत संकेत मिलते हैं। इससे व्यक्ति को चक्कर आने लगते हैं।
वर्टिगो होने के मुख्य कारण क्या हैं?
वर्टिगो के पनपने के पीछे कई वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। सबसे प्रमुख कारण कान के अंदर मौजूद कैल्शियम क्रिस्टल्स का अपनी जगह से खिसकना है। इसे मेडिकल भाषा में बीपीपीवी (BPPV) कहा जाता है।
कान के अंदर बेहद छोटे कैल्शियम कार्बोनेट क्रिस्टल्स होते हैं। जब ये अपनी जगह से हटकर सेमिसर्कुलर कैनाल में चले जाते हैं, तो दिमाग को भ्रम होता है कि शरीर घूम रहा है। इससे अचानक तेज चक्कर आते हैं।
कैल्शियम क्रिस्टल्स और उम्र का प्रभाव
सिर की पुरानी चोट या कान का ऑपरेशन भी इसका कारण बन सकता है। उम्र बढ़ने के साथ कान के अंदर होने वाले बदलाव भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। बुजुर्गों में यह समस्या अधिक देखी जाती है।
उम्र के साथ ये क्रिस्टल्स ढीले पड़ जाते हैं। इसके अलावा, बुजुर्गों में कमजोर नजर और जोड़ों का ढीलापन संतुलन बनाए रखना मुश्किल कर देता है। इससे अचानक गिरने या चोट लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
दवाइयों के दुष्प्रभाव और संक्रमण
अगर आप ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या शुगर की दवाइयां ले रहे हैं, तो सावधान रहें। कई बार दवाओं की आपसी क्रिया या उनके साइड इफेक्ट्स से भी चक्कर आने की समस्या पैदा हो सकती है।
नींद की गोलियों का सेवन भी शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, मेनियार्स रोग या किसी वायरल संक्रमण के कारण संतुलन वाली नस प्रभावित होने से भी वर्टिगो की समस्या हो सकती है।
वर्टिगो के प्रकार और उनकी गंभीरता
वर्टिगो मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। पहला 'पेरिफेरल' है, जो कान की दिक्कतों से जुड़ा होता है। ज्यादातर मरीजों में यही प्रकार पाया जाता है और यह सही उपचार से ठीक हो जाता है।
दूसरा 'सेंट्रल' वर्टिगो है, जो दिमाग की समस्याओं के कारण होता है। यह स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है। इसके लक्षणों में डबल विजन, बहुत तेज़ सिरदर्द और अचानक गिर जाना जैसी स्थितियां शामिल होती हैं।
सटीक जांच और उपचार के तरीके
वर्टिगो की जांच के लिए अक्सर एमआरआई या सीटी स्कैन की सलाह दी जाती है। हालांकि, ईएनटी विशेषज्ञ कुछ साधारण बेडसाइड टेस्ट के जरिए भी समस्या का सटीक पता लगा सकते हैं।
वीएनजी (VNG) जैसे आधुनिक परीक्षणों से यह स्पष्ट हो जाता है कि समस्या किस कान में है। इसके बाद डॉक्टर कुछ विशेष एक्सरसाइज या 'मैन्युवर्स' के जरिए क्रिस्टल्स को वापस उनकी सही जगह पर पहुंचाते हैं।
"वर्टिगो ख़ुद कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर छिपी किसी समस्या का एक महत्वपूर्ण संकेत है।" - डॉ. मेजर राजेश भारद्वाज
बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां
अगर आपको किसी खास स्थिति में चक्कर आते हैं, तो उस तरह बैठने या सिर घुमाने से बचें। अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करें और समय पर सोने की आदत डालें। पौष्टिक आहार लेना बहुत जरूरी है।
शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए भरपूर पानी पिएं। तेज धूप, अत्यधिक शोर-शराबे वाले माहौल और मानसिक तनाव से खुद को दूर रखें। ये छोटी बातें वर्टिगो को नियंत्रित करने में काफी मददगार साबित होती हैं।
घर पर करें ये बैलेंस ट्रेनिंग एक्सरसाइज
फिटनेस रूटीन में बैलेंस ट्रेनिंग को शामिल करना फायदेमंद होता है। रोजाना केवल 3-5 मिनट की कसरतें आपके संतुलन में बड़ा सुधार ला सकती हैं। यह बुजुर्गों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने में सहायक है।
आप एक टांग पर खड़े होने का अभ्यास कर सकते हैं। दीवार के सहारे खड़े होकर बारी-बारी से पैरों पर संतुलन बनाएं। इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और संतुलन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है।
आंख और हाथों का तालमेल
अपनी उंगली को नाक तक लाना और फिर उसे दूर ले जाना एक बेहतरीन एक्सरसाइज है। इस दौरान अपनी आंखों से उंगली को ट्रैक करें। इससे आंखों और दिमाग का तालमेल बेहतर होता है और चक्कर कम आते हैं।
वर्टिगो को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। सही समय पर पहचान और उचित उपचार से इसे जड़ से मिटाया जा सकता है। अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाएं और संतुलित जीवन का आनंद लें।
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