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Cricket: कौन हैं सौरभ नेत्रावलकर? भारत से USA टीम तक का सफर
मुंबई में जन्मे सौरभ नेत्रावलकर भारत की अंडर-19 टीम से खेलकर अब अमेरिकी क्रिकेट टीम का हिस्सा हैं। जानें उनके क्रिकेट और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के दोहरे करियर की कहानी।
HIGHLIGHTS
- मुंबई में जन्मे सौरभ नेत्रावलकर भारत की अंडर-19 टीम का हिस्सा रह चुके हैं।
- वह 2010 अंडर-19 विश्व कप में केएल राहुल और मयंक अग्रवाल जैसे खिलाड़ियों के साथ खेले।
- स्कॉलरशिप पर अमेरिका जाकर उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में करियर बनाया और ओरेकल में काम किया।
- सौरभ नेत्रावलकर ने अमेरिकी क्रिकेट टीम की कप्तानी भी की है।
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भारतीय मूल के क्रिकेटर सौरभ नेत्रावलकर इन दिनों गूगल पर तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं। क्रिकेट प्रेमी उनके और उनके सफर के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं। मुंबई में जन्मे नेत्रावलकर की कहानी काफी दिलचस्प है, जो भारत की अंडर-19 टीम से होते हुए अमेरिका की राष्ट्रीय टीम तक पहुंची।
कौन हैं सौरभ नेत्रावलकर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ नेत्रावलकर का जन्म 16 अक्टूबर 1991 को मुंबई में हुआ था। बचपन से ही क्रिकेट के प्रति उनका गहरा लगाव था और उन्होंने इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दिया।
जूनियर क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन
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जूनियर स्तर पर खेलते हुए सौरभ ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने 2008-09 की कूच बिहार ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करते हुए केवल 6 मैचों में 30 विकेट हासिल किए।
इस बेहतरीन प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें भारत की अंडर-19 टीम में जगह मिली, जो किसी भी युवा क्रिकेटर के लिए एक बड़ा सपना होता है।
2010 अंडर-19 विश्व कप का सफर
सौरभ नेत्रावलकर को 2010 में खेले गए अंडर-19 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में चुना गया। यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला।
दिग्गज खिलाड़ियों के साथ खेले
उस अंडर-19 टीम में कई ऐसे खिलाड़ी थे जो बाद में भारतीय राष्ट्रीय टीम के बड़े सितारे बने। इनमें केएल राहुल, मयंक अग्रवाल, जयदेव उनादकट, हर्षल पटेल और संदीप शर्मा जैसे नाम शामिल थे।
दिलचस्प बात यह है कि उस टीम के एक और सदस्य, हरमीत सिंह, भी बाद में अमेरिका की राष्ट्रीय टीम से जुड़े। इसके अलावा, सौरभ ने 2013-14 सीजन में मुंबई की ओर से कर्नाटक के खिलाफ अपना एकमात्र फर्स्ट क्लास मुकाबला भी खेला।
क्रिकेट से इंजीनियरिंग तक का सफर
क्रिकेट के मैदान पर शानदार प्रदर्शन करने के साथ-साथ सौरभ पढ़ाई में भी काफी होशियार थे। उन्होंने दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखा।
स्कॉलरशिप ने बदली राह
एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप मिलने के बाद, उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने का फैसला किया। वहां उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया।
अमेरिका में उन्होंने एक क्रिकेट APP भी डिजाइन किया और बाद में दुनिया की जानी-मानी कंपनी ओरेकल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की।
अमेरिका में क्रिकेट का सपना नहीं छोड़ा
इंजीनियरिंग में एक सफल करियर बनाने के बावजूद, सौरभ ने अपने क्रिकेट के सपने को मरने नहीं दिया। उन्होंने अमेरिका में भी अपने जुनून को जिंदा रखा।
नौकरी के साथ ट्रेनिंग
वेस्टइंडीज के कोच लॉयड जोडा ने उनकी गेंदबाजी की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें विभिन्न क्रिकेट क्लबों से जुड़ने में मदद की। इसके बाद, सौरभ ने फिर से क्रिकेट को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया।
उनका समर्पण अद्वितीय था। वह दिन में सुबह से शाम तक ओरेकल में अपनी नौकरी करते थे और फिर शाम को क्रिकेट की ट्रेनिंग के लिए जाते थे। इसी मेहनत और लगन ने उन्हें अमेरिका की राष्ट्रीय टीम तक पहुंचाया।
अमेरिकी टीम की कप्तानी
सौरभ नेत्रावलकर ने न केवल अमेरिका के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला, बल्कि टीम का नेतृत्व करने का सम्मान भी हासिल किया।
उन्होंने वेस्टइंडीज में आयोजित रीजनल सुपर-50 टूर्नामेंट और 2018 आईसीसी वर्ल्ड क्रिकेट लीग डिवीजन-3 टूर्नामेंट में अमेरिकी टीम की कप्तानी की। भारत से अमेरिका तक का उनका यह सफर जुनून, मेहनत और समर्पण की एक मिसाल है।
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