नई दिल्ली | भारतीय क्रिकेट के इतिहास में विराट कोहली का नाम सबसे सफल टेस्ट कप्तान के रूप में दर्ज है। साल 2022 के शुरुआती महीने में दक्षिण अफ्रीका से टेस्ट सीरीज हारने के बाद कोहली ने इस्तीफा दिया था।
विराट ने कप्तानी छोड़ने पर चुप्पी तोड़ी: विराट कोहली ने बताया टेस्ट कप्तानी क्यों छोड़ी, किया बड़ा खुलासा
विराट कोहली ने मानसिक थकान और बल्लेबाजी के दबाव को कप्तानी छोड़ने की मुख्य वजह बताया है।
HIGHLIGHTS
- विराट कोहली ने टेस्ट कप्तानी छोड़ने के पीछे मानसिक और शारीरिक थकान को मुख्य कारण बताया है।
- कोहली के अनुसार, वह बल्लेबाजी और कप्तानी के दोहरे बोझ से पूरी तरह थक चुके थे।
- उन्होंने खुलासा किया कि 9 साल तक किसी ने उनसे उनके मानसिक स्वास्थ्य के बारे में नहीं पूछा।
- कोहली भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान रहे हैं, जिन्होंने 68 मैचों में से 40 में जीत दिलाई।
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इस फैसले ने क्रिकेट जगत को स्तब्ध कर दिया था। सात साल तक टीम की कमान संभालने के बाद कोहली का यह निर्णय काफी रहस्यमयी लग रहा था। अब कोहली ने खुद इस राज से पर्दा उठाया है।
दोहरी जिम्मेदारी का भारी बोझ
विराट कोहली ने हाल ही में आरसीबी इनोवेशन लैब में एक बातचीत के दौरान अपने मन की बात साझा की। उन्होंने बताया कि उस समय उन पर बल्लेबाजी और कप्तानी दोनों का जबरदस्त दबाव था।
कोहली ने कहा कि वह टीम की बल्लेबाजी इकाई के मुख्य स्तंभ थे। साथ ही, नेतृत्व की पूरी जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर थी। इन दोनों भूमिकाओं को एक साथ निभाना कठिन होता जा रहा था।
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शुरुआत में कोहली को इस बात का अहसास नहीं हुआ कि यह सब उनकी निजी जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। उनका पूरा ध्यान केवल भारतीय क्रिकेट को दुनिया के शिखर पर बनाए रखने में लगा था।
मानसिक और शारीरिक थकान बनी वजह
कोहली ने खुलासा किया कि कप्तानी छोड़ने के समय वह मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे। उनके पास अब टीम को देने के लिए कोई नई ऊर्जा या विचार शेष नहीं बचे थे।
विराट ने अपनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह इस काम में खुद को पूरी तरह खपा चुके थे। उन्होंने महसूस किया कि अब उनके लिए इस जिम्मेदारी को आगे बढ़ाना संभव नहीं रह गया है।
जब मैंने कप्तानी छोड़ी, तब तक मैं पूरी तरह से थक चुका था। मेरे पास अब कुछ भी नहीं बचा था। मैं पूरी तरह से इस काम में खप चुका था। यह थकाने वाला अनुभव था।
नेतृत्व की चुनौतियां और अकेलापन
कोहली के अनुसार, कप्तानी केवल मैदान पर निर्णय लेने तक सीमित नहीं होती। इसमें खिलाड़ियों को समझना, उन्हें संभालना और उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराना शामिल है। यह प्रक्रिया काफी थका देने वाली होती है।
उन्होंने एक कड़वा सच साझा करते हुए कहा कि एक कप्तान हमेशा दूसरों की भलाई के बारे में सोचता है। इस दौड़ में वह अक्सर खुद के बारे में सोचना भूल जाता है। कोहली को आराम चाहिए था।
नौ साल का लंबा और सफल सफर
विराट ने याद किया कि लगभग नौ साल के कप्तानी के सफर में किसी ने उनसे यह नहीं पूछा कि वे कैसे हैं। 2014 में एमएस धोनी के संन्यास के बाद कोहली ने टेस्ट टीम की कमान संभाली थी।
उनकी कप्तानी में टीम इंडिया कई सालों तक आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 पायदान पर रही। कोहली ने 68 टेस्ट मैचों में टीम का नेतृत्व किया और 40 मैचों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
विराट कोहली का यह खुलासा खेल जगत के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। यह दर्शाता है कि मानसिक स्वास्थ्य और कार्य-जीवन का संतुलन एथलीटों के लिए कितना आवश्यक है। कोहली की विरासत हमेशा याद रहेगी।
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