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सिरोही में बापू को ठेंगा: ड्राई डे पर अवैध शराब बिक्री – thinQ360 Exclusive

गणपत सिंह मांडोली

सिरोही जिला मुख्यालय पर अवैध रूप से शराब बेची जा रही थी। इस अवैध कारोबार के पीछे प्रशासन की ढिलाई और माफियाओं की सक्रियता सामने आई है।

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सिरोही: गांधी जयंती के मौके पर सरकारी आदेशानुसार 2 अक्टूबर को "ड्राई डे" घोषित किया गया था, जिसके तहत पूरे जिले में शराब की बिक्री पर सख्त पाबंदी थी। बावजूद इसके, thinQ360 की एक्सक्लूसिव कवरेज में खुलासा हुआ है कि सिरोही जिला मुख्यालय पर अवैध रूप से शराब बेची जा रही थी। इस अवैध कारोबार के पीछे प्रशासन की ढिलाई और माफियाओं की सक्रियता सामने आई है।

thinQ360 की टीम ने मौके पर जाकर शराब बिक्री की गतिविधियों का दस्तावेजीकरण किया, जहां कुछ दुकानदारों ने नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम शराब बेची। यह घटना न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठाती है। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रशासन की मिलीभगत या लापरवाही के कारण शराब माफिया को हौसला मिला, जिससे पाबंदी के बावजूद यह गैरकानूनी गतिविधि हुई।

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thinQ360 की टीम ने स्थानीय निवासियों से भी बातचीत की, जिन्होंने इस अवैध कारोबार पर अपनी नाराजगी व्यक्त की और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की। कई नागरिकों ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित ड्राई डे का खुलेआम उल्लंघन, प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है।

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thinQ360 के पास इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो और तस्वीरें हैं, जो प्रशासन की चूक को स्पष्ट रूप से दिखाते हैं। इस मुद्दे पर जब प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस अवैध गतिविधि के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है।
महात्मा गांधी जयंती पर ड्राई डे: शराब पर पाबंदी और इसके उद्देश्य

महात्मा गांधी जयंती, 2 अक्टूबर को, पूरे देश में गांधीजी के आदर्शों और सिद्धांतों को याद करते हुए मनाई जाती है। इस दिन को "ड्राई डे" के रूप में भी मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समाज में शराब जैसी बुराइयों के खिलाफ जागरूकता फैलाना और गांधीजी के स्वच्छ, नैतिक जीवन के प्रति प्रतिबद्धता को सम्मान देना है।

महात्मा गांधी हमेशा से शराब और नशे के खिलाफ रहे थे। उनका मानना था कि शराब न केवल व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर बनाती है, बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने को भी तोड़ती है। गांधीजी ने अपने जीवन में नशा-मुक्त समाज का सपना देखा था, जिसे पूरा करने के लिए सरकार ने उनके जन्मदिन को "ड्राई डे" के रूप में स्थापित किया।

इस दिन पूरे देश में शराब की बिक्री पर पाबंदी लगाई जाती है, ताकि लोगों को गांधीजी के आदर्शों को अपनाने और नशामुक्त समाज की दिशा में काम करने की प्रेरणा मिले। साथ ही, यह दिन हमें नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराता है और एक स्वस्थ समाज के निर्माण की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करता है।

हालांकि, कई बार कुछ जगहों पर इस पाबंदी का उल्लंघन देखा जाता है, जो प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता होती है ताकि गांधीजी के सिद्धांतों का सम्मान बना रहे और समाज नशे के चंगुल से मुक्त हो सके।

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